हरियाणा व पंजाब के गैंगस्टरों की पैनी नजर पड़ी सूर्यनगरी पर, बड़े व्यवसायी व कारोबारी निशाने पर

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जोधपुर। प्रदेश के सबसे शांत कहा जाने वाला जोधपुर शहर अब शांत नहीं रहा है। लगातार बढ़ रही फायरिंग व अपराधिक घटनाओं ने जोधपुर की जनता को दहशत में डाल दिया है। अब तक तो यहां सिर्फ दहशत फैलाने के लिए फायरिंग हो रही थी लेकिन रविवार रात को हुई एक व्यवसायी की हत्या के बाद जोधपुर में अपराध की बहुमंजिला इमारत का शिलान्यास हो गया है। राजस्थान में जयपुर के बाद जोधपुर ही एेसा शहर है जो महानगर के तौर पर बड़े स्तर पर सामने आया है। बड़े कारोबारी और एक्सपोर्टर यहां पर आ गए है। अत्यधिक विकास के साथ शहर के बड़े कारोबारियों का ध्यान भी अपराधियों ने खींच लिया है। इसका जीता जागता नमूना रंगदारी के लिए हो रही फायरिंग की घटनाएं है और अब यहां हत्या होनी भी शुरू हो गई है।

सांप्रदायिक सद्भाव, अमन-चैन और व्यापार में विश्वास के नाम से देशभर में विख्यात सूर्यनगरी आखिरकार रविवार रात रंगदारी के रंग में रंगीज ही गई। कहने को तो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने शासन काल में प्रदेश की राजधानी जयपुर और दूसरे बड़े शहर जोधपुर में बेहतरीन कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कमिश्नरेट की व्यवस्था की लेकिन उससे पुलिस के हफ्ते तो बढ़ गए लेकिन हालात सुधरने की बजाय बिगड़ते ही गए। प्रदेश में राज भले ही कांग्रेस का हो या भाजपा का, पिछले सात सालों में पुलिस कमिश्नरेट में छांट-छांट के तैनात किए गए पुलिस अधिकारियों ने शहर की बजाय स्वयं के हालात सुधारने में ही पद का उपयोग किया। शहर का कोई भी शख्स इस नई व्यवस्था से कभी खुश और खुद को महफूज नहीं समझ पाया।

ज्यों-ज्यों शहर का विकास होता गया, शहर में पुलिस अधिकारियों के पद बढ़ते गए और उनकी हाजिरी में लगने वाले कारिंदों की बढ़त के चलते गश्त के लिए कांस्टेबल कम होते गए। बीट व्यवस्था में तो अब सिर्फ दिखावे की खानापूर्ति होती है। कहने को तो शहर में सांय और रात्रिकालीन गश्त भी की जाती है लेकिन रविवार रात को जिस तरह से बाइक सवार हमलावर व्यस्ततम सरदारपुरा क्षेत्र में पुलिस थाने से चंद कदम दूर शोरूम के बाहर मालिक पर फायरिंग व हत्या करके भागे उससे तो स्पष्ट हो गया कि कागजी घोडे़ ज्यादा और हकीकत की रेस कम ही होती है।

पड़ौसी राज्यों से आ रहे कुख्यात गैंगस्टर

राजस्थान विशेषकर जोधपुर में अब पड़ौसी राज्यों हरियाणा और पंजाब से कुख्यात गैंगस्टर आ रहे है। देखा जाए तो पंजाब में दस बड़े गैंगस्टर है जिनमें पांच तो अपने अस्तित्व को बचाने के लिए एक-दूसरे के खून के प्यासे होकर मारे जा चुके है। पंजाब के गैंगस्टरों की दस लोगों की लिस्ट में इनका आतंक रॉबरी से लेकर हत्या तक रहा है। लॉरेंस विश्नोई ही एक मात्र गैंगस्टर है जो जोधपुर में सामने आया है लेकिन उससे बड़े पांच और गैंगस्टर है जो राजस्थान में पैर पसारने की तैयारी में हैै। डॉक्टर सुनील चांडक, ट्रैवल्र्स एजेंसी संचालक मनीष जैन, एक्सपोर्टर रितेश लोहिया के घर के बाहर हुई फायरिंग और अब व्यवसायी वासुदेव इसरानी की हत्या ने जता दिया कि पंजाब के गैंगस्टर जोधपुर के कारोबारियों को निशाने पर लाकर रंगदारी में लगेंगे, ऐसा अंदेशा है।

आपसी प्रतिद्वंद्विता भी बन सकती है साख

पंजाब के गैंगस्टरों की आपसी प्रतिद्वंद्विता भी यहां पैर जमाने की साख बन सकती है। वहां का गैंगस्टर सुखा काहलो शॉर्प शूटर में शुमार था लेकिन वह प्रतिद्वंद्विता के चलते मारा जा चुका है। वहीं दूसरे गैंगस्टर विक्की गोंडर ने राजस्थान के साथ ही पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी बंगाल में अपना जाल फैला रखा है। वह अभी पंजाब की एक जेल में बंद है। जयपाल भी एक एेसा गैंगस्टर है जो पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में अपने पैर जमा चुका है। बैंक रॉबरी के साथ वह करीब चालीस मुकदमों में वांछित है। नेशनल एथलीट शेरा पर हैप्पी देवड़ा गैंगस्टर की हत्या का आरोप लगा है। शेरा नेशनल एथलीट है, जो कभी दौड़ में सर्वोपरि था। बताया जाता है कि गैंगस्टर विक्की गोंडर, लॉरेंंस की जान का दुश्मन बन सकता है कारण कि हैप्पी देवड़ा की हत्या में विक्की का हाथ होना माना जा रहा है, एेसे में वह लॉरेंस का भी दुश्मन बनता है। लॉरेंस विश्नोई इन दिनों अजमेर जेल में है। कुल मिलाकर राजस्थान में पंजाब की गैंगस्टरों की नजर लगी है जो रंगदारी से लेकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने से नहीं चूक सकती है। जोधपुर की जनता के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है।

पुलिस की लापरवाही भी पड़ रही भारी

महानगर पुलिस को मालूम था कि हम कमजोर पड़ रहे है और पंजाब-हरियाणा के गैंगस्टर स्थानीय बदमाशों के साथ समझौता करके शहर में रंगदारी शुरू करने वाले है। पुलिस ने डॉक्टर, व्यापारी और ट्रैवल्र्स से जुड़े व्यापारी के मामले में मुकदमे भी दर्ज किए, आरोपियों की गिरफ्तारी भी की लेकिन तह तक जाकर इस गैंग को नेस्तनाबूद करने में असफल रही जिसका खामियाजा रविवार रात को दुकानदार वासुदेव को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ा। हालांकि कहने तो तो पुलिस ने वासुदेव को गनमैन भी उपलब्ध करा रखा था लेकिन वासुदेव पर हमला कब और कहां होगा या नहीं होगा, इसके बारे में पुलिस सही विश्लेषण नहीं कर पाई और हमलावरों ने रैकी करके सुरक्षा गार्ड के जाने के बाद इस वारदात को अंजाम दे दिया।

 

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