वो हस्तियां जो देश दुनिया में बढ़ा रही हैं मारवाड़ का मान

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मारवाड़ की धरा ने कुछ ऐसे मोती उपजे हैं जो जिन्होंने अपनी मेहनत के बूते न केवल अपना नाम कमाया है, बल्कि वे लोगों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत भी हैं. ये मारवाड़ की वो हस्तियां है, जो थार के रेतीले धोरों की सरहदों को पार करके देश दुनिया में मारवाड़ का गौरव बढ़ा रहे हैं. इन अनमोल रत्नों को एक मंच पर लाने का काम किया न्यूज18 राजस्थान ने. मारवाड़ के ये गौरव आज भी अपनी पूरी ऊर्जा, क्षमता और समर्पण भाव से अपने अपने क्षेत्रों में जुटे हुए हैं. इनमें युवाओं से लेकर सौ साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं. ये मारवाड़ के वो मोती हैं जिनके योगदान को कोई भी समाज भुला नहीं सकता. ऐसी विभूतियों को सामाजिक सरोकारों के तहत साहस और शौर्य की जमीं जोधुपर में आयोजित समारोह में ‘मारवाड़ अलंकरण’ से नवाजा. समाज के प्रमुख साधु संतों के सानिध्य में आयोजित हुए इस गरिमामय समारोह की मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे रहीं. समारोह में मुख्यमंत्री राजे ने इनको सम्मानित किया, वहीं साधु संतों ने इनको आशीर्वाद दिया. आइए आपको रू-ब-रू कराते हैं मारवाड़ के इन हस्तियों से.
1. स्नेहा जैन, जोधपुर: सूर्यनगरी की स्वर्ण परी कही जाने वाली स्नेहा जैन छह साल की उम्र में एथलीट के ट्रेक पर आयी और दो बच्चों की मां बनने के बाद भी स्नेहा का ये सफर बतौर एथलीट जारी है. स्नेहा अब तक 270 गोल्ड मैडल जीत चुकी हैं. पोस्टल सर्विसेज की स्नेहा ने ये मैडल ओपन एथलेटिक्स में भी लिए तो अखिल भारतीय सेवाओं जैसी दूसरी प्रतियोगिताओं में भी जीते.
2. चूनाराम जाट, बाड़मेर: ऑल इण्डिया स्तर पर 12वीं रेंक हासिल कर इसरो में चुने गए हैं गुदड़ी के लाल चूनाराम. बाड़मेर के बायतु ढाणी के ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े चूनाराम ने अभावों के बीच पलकर सफलता का ऐसा अध्याय रचा कि 2008 में नवोदय स्कूल, पचपदरा में प्रवेश से लेकर अब तक कीर्तिमान ही गढ़ रहे हैं. 2012 में बारहवीं में टॉपर रहे चूनाराम ने NIIT से बीटेक के बाद युवा वैज्ञानिक के लिए चयनित 35 नौजवानों में 12वां स्थान हासिल किया है.
3-4. उस्मान खान और सचिन दुबे, नागौर: रेतीले थार में जन्मे युवा वैज्ञानिक उस्मान खान और सचिन दुबे लय और ताल की तरह आगे बढ़ रहे दो ऐसे शख्स हैं जिनके स्टार्ट अप “मॉड्यूल इनोवेशंस” के चर्चे पूरी दुनिया में हो रहे हैं. बीते साल दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 25 इनोवेटर में शुमार किये गए सचिन और उस्मान ने अपने साथियों के साथ मिल “यूरिनरी ट्रेक फेक्शन” स्ट्रिप बनाकर ग्रामीण महिलाओं के लिए ज़िन्दगी आसान कर दी है. पहले ग्रामीण महिलाओं के यूरीन ट्रेक इंफेक्शन की लेबोरेट्री जांच में एक-एक सप्ताह लग जाता था, जिससे इंफेक्शन और बढ़ जाता .लेकिन अब उस्मान और सचिन दुबे की टीम ने ये स्ट्रिप ईजाद कर इलाज आसान कर दिया है.5. डॉ. कृति भारती, जोधपुर: मासूमों को बाल विवाह की बेड़ियों से मुक्ति दिलाने में सारथी बनी डॉ. कृति भारती अब तक 35 बाल विवाह निरस्त करवाने और सैकडों बाल विवाह रोकने का अद्भुत और अनुकरणीय काम कर चुकी हैं. खुद बचपन में संघर्ष झेलकर बड़ी हुई कृति को बचपन खो देने का अहसास कुछ इस तरह है कि बच्चों और महिलाओं के पुनर्वास में वह बरसों से शिद्दत के साथ जुटी है.
6. शेर सिंह साफा, जोधपुर: राजस्थानी साफों को सात समंदर पार तक पहुंचाने में सबसे अहम् भूमिका अदा करने वाले शेर सिंह चाम्पावत उर्फ़ शेर सिंह साफा ने राजस्थानी साफों को जन-जन तक पहुंचाने का काम नब्बे के दशक में शुरू किया था. शुरुआत हुई ग्वालियर राजपरिवार से एक विवाह उत्सव में मिले साफा बांधने के एक आमंत्रण से. उस उत्सव से शेर सिंह चाम्पावत को एक नयी पहचान मिली और वह मशहूर हो गए शेर सिंह साफा के रूप में. आज देश में साफों की करीब तीन हज़ार राजस्थानी दुकानें हैं. एक अनुमान के मुताबिक हर साल दस अरब से ज्यादा का कारोबार अकेले साफों का हो रहा है, जिससे दस हज़ार से ज्यादा कामगारों को रोजगार मिला है सो अलग. इसका श्रेय अगर शुरुआत के लिहाज से किसी को दिया जा सकता है तो वह है शेर सिंह साफा.
7. सावन खान, जैसलमेर: सूफी गायन में दुनियाभर में धूम मचाने वाले जैसलमेर के लोक गायक सावन खान का जन्म पकिस्तान की सीमा से सटे दबड़ी गांव में हुआ. इस शख्स ने बीते चालीस साल में सूफी संगीत को सरहदों के पार कुछ इस तरह पहुंचाया है कि हर कोई राजस्थानी लोक संगीत का दीवाना है. अब तक 29 देशों में थार का संगीत पहुंचा चुके हैं सावन खान.
8. पायल परसरामपुरिया, सिरोही: सिरोही की जिला प्रमुख के रूप में सेवाएं दे रही पायल परसरामपुरिया की असली पहचान सामाजिक क्षेत्र में किए गए उनके कार्यों के बिना अधूरी है. आदिवासी उत्थान और जनजाति बालिकाओं कि शिक्षा के पुनीत कार्य में जुटी पायल अपने दिवंगत ससुर की याद में बने विनोद परसरामपुरिया ट्रस्ट के जरिये “पायल सखी” अभियान के माध्यम से आदिवासी बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए तैयार ही नहीं कर रही, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उन्हें कोचिंग देने का अभियान भी चला रही है.
9. वैद्य वृन्दावन लाल शर्मा, पाली: पाली जिले के कंटालिया में आयुर्वेद के क्षेत्र में नित नए प्रयोग कर रहे इस सरकारी वैद्य के इलाज के अभिनेता मनोज कुमार और फिल्मकार सलीम खान जैसे असंख्य दीवाने हैं. कई असाध्य रोगों का आयुर्वेद के बूते इलाज कर रहे हैं वैद्य वृन्दावन लाल शर्मा.
10. टीकूदेवी गरासिया, सिरोही: अभावों में पली एक आदिवासी महिला जो मिटटी के बर्तन बनाकर न केवल दर्जनों महिलाओं को रोजगार दे रही है, बल्कि अपने उत्पाद को विदेशों में भी पहुंचा रही है.
11. मदनराज बोहरा, जालोर: पिलानी के बिट्स से गोल्ड मेडलिस्ट इस सत्तर वर्षीय युवा ने जालोर को ग्रेनाइट उद्योग के जरिए पूरी दुनिया में पहचान देने में अहम् भूमिका अदा की. ग्रेनाइट उद्यमियों के गॉड फादर कहे जाने वाले बोहरा इन दिनों किसानों के लिए कई अहम कार्य कर रहे हैं. पहले प्रदूषण से मुक्ति के लिए स्लरी से टाइल्स बनाने का काम और अब टमाटर को प्रीजर्व करने का प्रयोग कर रहे हैं.
12. सांगाराम जांगिड़, बाड़मेर: तमिलनाडु के चर्चित एडीजी (पुलिस). इनके अपराधियों के खिलाफ छेड़े गए अभियान पर केंद्रित तेलुगु फिल्म ‘खाकी’ और तमिल फिल्म ‘थीरन’ ने सफलता के कई कीर्तिमान गढ़े हैं. राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर दक्षिण भारत में मारवाड़ का परचम फहरा रहे हैं. ‘अपराधियों में भय और आमजन में विश्वास’ के राजस्थान पुलिस के स्लोगन को ठेठ दक्षिण में चरितार्थ कर रहे हैं सांगाराम जांगिड़.
13. जितेंद्र सिंह राठौड़, जैसलमेर: जैसलमेर को दुनिया के पर्यटन नक़्शे पर लाने वाले शख्स हैं नागौर जिले के चिंडालिया गांव में जन्मे जितेन्द्र सिंह राठौड़. जर्मनी से आकर जैसलमेर में सत्तर के दशक में पहला रूफ टॉप रेस्टोरेंट और होटल शुरू करने वाले जितेंद्र सिंह के बिना राजस्थान खासकर जैसलमेर में पर्यटन विकास की कहानी बेमानी है. पश्चिमी देशों के कई कैलेंडर में दाढ़ी मूंछों के साथ छाए रहने वाले जितेन्द्र सिंह राठौड़ को पर्यटन का पुरोधा कहा जाता है.
14 .राणाराम बिश्नोई, जोधपुर : वन्य जीवों और पेड़ों से बिश्नोई समाज का अनूठा रिश्ता है. उसी समाज में जन्मे राणाराम बिश्नोई गर्मियों में जगह-जगह से बीज जुटाते हैं और बारिश में उन बीजों को रेतीले थार में बिखेरने के लिए कोसों दूर तक निकल जाते हैं. अस्सी साल के राणाराम बिश्नोई ने अब तक कितने पौधे लगाए ये तो अंदाज़ा लगाना मुश्किल है. लेकिन एक मोटा अनुमान के अनुसार उनके लगाए पौधों में से करीब पचास हज़ार खेजड़ी ,बबूल और नीम आदि के पौधे आज लोगों को छांव ही नहीं दे रहे, बल्कि पशु पक्षियों के जीवन को आगे भी बढ़ा रहे हैं.
15. नन्दकिशोर शर्मा, जैसलमेर: जिस तरह जैसलमेर का जिक्र आते ही फ़िल्मी प्रेमियों को फिल्मकार सत्यजीत रे की फिल्म “सोनार बांगला “याद आ जाती है. ठीक उसी तरह जैसलमेर के इतिहास, कला और संस्कृति का जिक्र आते ही याद आ जाती है श्री नंदकिशोर शर्मा की. जैसलमेर में दो संग्रहालयों की स्थापना कर दुनिया भर से आने वाले सैलानियों को मारवाड़ के जन-जीवन और लोक संस्कृति से दशकों से रू-ब-रू करा रहे हैं शर्मा. इनकी एक बड़ी पहचान इतिहासकार के रूप में भी है.
16. सेवानिवृत कैप्टन जोध सिंह: सौ साल का एक ऐसा नौजवान जो इस उम्र में भी हर दिन सुबह तीन किमी घूमने जाता है और नौजवानों को जीवन का हर फलसफा बताता है. अपने सैनिक काल में दूसरे विश्व युद्ध से लेकर 1971 की लड़ाई तक पांच युद्धों में दुश्मनों से लोहा ले चुके कैप्टन जोध सिंह ने कई मैडल जीते हैं. जोध सिंह आज भी खुद को सेवानिवृत नहीं मानते हैं. जोध सिंह अपनी पेंशन से हर स्कूलों में कोई न कोई सुविधा बढ़ाते हैं.
17. शीन काफ निज़ाम, जोधपुर: 1947 में जोधपुर में जन्मे शिव किशन बिस्सा ने बतौर साहित्यसेवी और ग़ज़लकार शीन काफ निज़ाम जो शोहरत कमाई है वह हर किसी को नसीब नहीं होती है. मारवाड़ में शीन कॉफ निजाम का नाम बड़े ही अदब से लिया जाता है.
18. ज्योतिषी मदन राजस्थानी (दाती महाराज): शनि उपासक मदन राजस्थानी का नाम समाज सेवा में सर्वोपरि है. मदन राजस्थानी बेटियों को बचाने व पढ़ाने में लंबे समय से सक्रिय हैं. दाती महाराज ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को पहचान दी है. मदन राजस्थानी करीब आठ सौ बेटियों का कर रहे हैं लालन पालन.

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