केंद्र सरकार ने वाड्रा को जमीन आवंटन घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी

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बीकानेर। महाजन फायरिंग रेंज के विस्थापितों की जमीन के आवंटन में हुए घोटाले की जांच केंद्र सरकार ने सीबीआई को सौंप दी है। राज्य सरकार ने इस घोटाले से संबंधित गजनेर एवं कोलायत थाने में दर्ज 18 एफआईआर की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी। इसमें कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने भी इस घोटाले में शामिल 275 बीघा जमीन 79 लाख रुपए में खरीदी थी। राज्य सरकार ने सीबीआई जांच कराने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर का हवाला दिया था। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की सिफारिश को मानते हुए मामला सीबीआई को सौंपे जाने संबंधी नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। राज्य सरकार को भी इसकी सूचना दे दी गई है। केंद्र एवं राज्य सरकार के सीबीआई जांच कराने के निर्णय से वाड्रा एवं उनकी कंपनियां जांच के दायरे में जाएगी। इससे उनकी मुश्किलों का बढ़ना तय है। राजस्थान सरकार में गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया स्पष्ट कर चुके हैं कि महाजन फायरिंग रेंज के विस्थापितों के लिए जमीन किन लोगों को आवंटित हुई। इसका कोई प्रमाण नहीं है कि वे कौन लोग थे। रिकॉर्ड में भी इसका कोई प्रमाण नहीं मिला था। फर्जी दस्तावेज के आधार पर फर्जी लोगों ने जमीनें अपने नाम आवंटित करवा ली और बाद में इसका बेचान करते रहे। इस फर्जीवाड़े में सरकारी कर्मचारी एवं अफसरों के साथ भूमाफिया भी शामिल रहे थे। फर्जी दस्तावेज के आधार पर बिकी जमीनों में से 275 बीघा जमीन रॉबर्ट वाड्रा की स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी (एसएलएच) कंपनी ने भी वर्ष 2010 में खरीदी थी। सोलर एनर्जी प्लांट के नाम पर खरीदी गई यह जमीन वर्ष 2012 में बेच दी गई थी। इस प्रकरण में चार एफआईआर वाड्रा की कंपनी से भी संबंधित है।

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