‘सेवादल’ की अनदेखी पड़ी ‘भारी’

देश में कांग्रेस का अग्रिम संगठन और ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस की मजबूत नींव समझा जाने वाला ‘सेवादल’ वर्तमान समय में नाममात्र का रह गया है। आरएसएस और कांग्रेस सेवादल का सफर साथ साथ शुरू हुआ, लेकिन सेवादल अपना संगठन उतना मजबूत नहीं बना पाया जितना आरएसएस ने तैयार किया है।

‘सेवादल’ की अनदेखी पड़ी ‘भारी’
-आरएसएस के साथ हुआ था सेवादल का सफर
-वर्तमान में आरएसएस से मीलों पीछे छूट गया, कांग्रेस नेताओं की उपेक्षा से कमजोर हो गई सेवादल की नींव
-डॉ.के.आर.गोदारा-
जोधपुर। देश में कांग्रेस का अग्रिम संगठन और ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस की मजबूत नींव समझा जाने वाला ‘सेवादल’ वर्तमान समय में नाममात्र का रह गया है। आरएसएस और कांग्रेस सेवादल का सफर साथ साथ शुरू हुआ, लेकिन सेवादल अपना संगठन उतना मजबूत नहीं बना पाया जितना आरएसएस ने तैयार किया है। कांग्रेस नेताओं की अनदेखी और उपेक्षा के चलते सेवादल अब सिर्फ कांग्रेस नेताओं को ‘सलामी’ देने,स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं बनाए रखने और औपचारिक रूप से कांग्रेस की रीति-नीति के प्रचार-प्रसार में भाग लेने वाला संगठन बनकर रह गया है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से लेकर स्थानीय स्तर तक के नेता तक सेवादल से जुड़े लोगों को अधिक तवज्जो नहीं दे रहे थे। देश का प्राचीन संगठन जिसकी स्थापना देश सेवा के लिए की गई थी, समाजसेवा के लिए की गई थी, विपरीत परिस्थितियों में खुद को ढ़ालने की शपथ के साथ जिस संगठन की स्थापना की गई थी वह महज फोटोसेशन, गॉर्ड आफ आॅनर तक सीमित रह गई। सेवादल की स्थापना 28 दिसंबर 1923 को हुई,जिसकी परिकल्पना जेल में रखी गई, लेकिन आज के दौर में कांग्रेस सेवादल की मूल अवधारणा ही समाप्त हो गई। सेवादल की मौजूदा स्थिति से तन,मन, धन से सेवादली बेहद दुखी है। सेवादलियों की मानें तो कांग्रेस सेवादल संस्था नहीं संगठन है, संस्कार है, यह एक ऐसा कारखाना है जहां सच्चे देशवासी को तराशा जाता था। इसमें बदली हुई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की उच्च तकनीकी सिखाई जाती रही है। निरंतर कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी कर्मठता कायम रखने के कारण यह जींवत और कर्मठ संगठन के रूप में इसकी पहचान रही है। कहा जाता है कि इसका सरोकार किसी जाति, धर्म, सेक्स एवं संप्रदाय से सर्वथा उपर रहा है।
कमजोर होता गया सेवादल
लगातार अनदेखी और उपक्षा के चलते कांग्रेस का यह अग्रिम संगठन सेवादल संगठन स्तर पर कमजोर होता गया और वर्तमान में यह सिर्फ कांग्रेस का औपचारिक अग्रिम संगठन बनकर रह गया। इसके चलते कांग्रेस की नींव कमजोर होती गई और अब ग्रामीण स्तर पर तो सेवादल से जुड़े लोग लगभग गायब ही हो चुके हैं। कांग्रेस को लगातार अग्रिम संगठन सेवादल की अनदेखी अब भारी पड़ने लगी है। भाजपा के पास वैचारिक और ग्राउंड सपोर्ट के लिए आरएसएस के कमिटेड कार्यकर्ताओं की एक पूरी कतार है। कांग्रेस इस मामले में कमजोर पड़ जाती है।
 कांग्रेस का यह अग्रिम संगठन अब सिर्फ नेताओं की आवभगत तक ही सीमित हो कर रह गया है। इसके चलते कांग्रेसी नीतियों का प्रचार-प्रसार, लोकसेवा कार्य का सही तरीके से लोगों तक मैसेज नहीं पहुंच पा रहा है।
आमजन की सेवा का जज्बा
सेवादल अंशकालिक कार्यकर्ताओं का संगठन रहा है। किसी व्यक्ति के खाली समय के सद्पयोग का एक उपयुक्त मंच है बल्कि व्यक्ति के उद्देश्य पूर्ति में सहायक भी है। उद्देशय जो समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी हो। जो बिना किसी भेदभाव के आमजन की सेवा करना चाहता हो। 1923 में मशहूर ऐतिहासिक झंडा आंदोलन के दौर में जब देश भर के तमाम नौजवानों ने नागपुर पहुंचकर इस आंदोलन में सहभागिता दी, उसी वक्त कर्नाटक के दो युवक डॉ.नारायण सुब्बाराव हार्डिकर और डॉ.हेडगेवार भी उस झंडा आंदोलन में शामिल हुए। दोनों को गिरफ्तार कर नागपुर जेल भेजा गया। यहीं सेवादल की परिकल्पना तैयार हुई। जेल से निकलने के बाद डॉ.हार्डिकर ने अपनी कल्पना को महात्मागांधी और पंडित नेहरू के समक्ष रखी। नेहरू और गांधी को यह परिकल्पना खासी रास आई और इसे आत्मसात करना तय हो गया। तब इसका डेस नीली हाफ पेंट और सफेद शर्ट हुआ करता था। 1931 में काकीनाडा में अखिल भारतीय स्तर पर नौजवानों की सभा बुलाई जिसकी अध्यक्षता पंडित नेहरू ने की और वहीं हिंदुस्तान सेवादल नामक संस्था का जन्म हुआ।
राजीव गांधी ने दिया विस्तार
1983 में कांग्रेस सेवादल के पटना सम्मेलन में तत्कालीन कांग्रेस महासचिव राजीव गांधी ने शिरकत की। सेवादल के क्रिया कलापों से राजीव इतने प्रभावित हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को ऐसी ही सफेद सेना की जरूरत है। फिर राजीव जब तक जीवित रहे तब तक सेवादल को काफी विस्तार मिला, कैडर बिल्डिंग प्रोग्राम हुए, लेकिन विस्तार के साथ ही गुणवत्ता भी घटी, भीड़ ज्यादा हुई तो सेवादल मूल मंत्र से भटक गया। राजीव गांधी की मौत के बाद सेवादल में विघटन तेजी से हुआ और वर्तमान में कांग्रेस के इस अग्रिम संगठन की हालत काफी नाजुक दौर में है। यही कारण है कि सेवादल के विघटन के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी की भी स्थितियां लगातार खराब होती गई और कभी पूरे देश में राज करने वाली कांग्रेस आज मात्र दो-तीन राज्यों में ही सिमट कर रह गई।