टिकट की कतार में कांग्रेस नेताओं के पुत्र-रिश्तेदार

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जयपुर। राजस्थान में इस साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव में अब बहुत कम वक्त बचा है। लिहाजा, टिकट के लिए आम कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेताओं ने दावेदारी जताने का क्रम शुरु कर दिया है। खास बात यह है कि इस बार विधायक की टिकट की कतार में कईं दिग्गज नेताओं के बेटे और रिश्तेदारों की लंबी कतार लग गई है। अधिकतर उम्रदराज नेताओं ने अपनी औलादों और रिश्तेदारों को एआईसीसी-पीसीसी मेंबर बनाकर अभी से ही उन्हें टिकट के लिए प्रोजेक्ट करना शुरू कर दिया है। यह अलग बात होगी कि पार्टी उनकी इस ख्वाहिश को कितना पूरी करती है। कांग्रेस पार्टी में 70 साल की उम्र पार करने वाले नेताओं की टिकट काटे जाने की आहट और राहुल गांधी के युवाओं को ज्यादा मौका देने बीच नेताओं ने अपने पुत्रों-रिश्तेदारों को अभी से ही प्रोजेक्ट करना शुरु कर दिया है। कई दिग्गजों के बेटे और रिश्तेदार विधायक बनने की कतार में इस बार दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में जारी हुई एआईसीसी और पीसीसी मेंबरों की लिस्ट में बड़े-बुजुर्ग नेता जिस तरह अपनी संतानों को फिट कराने में कामयाब रहे हैं, उससे तो यही जाहिर होता है कि टिकट भी वो अपनी जगह अपने बेटों-बेटियों, भाई, भाभी, बहू, दामाद और अन्य रिश्तेदारों को दिलाना चाहेंगे। यानि कि “मैं नहीं तो मेरा अपना” वाली ट्रिक जरुर आजमाएंगे। टिकट के दावेदारों ऐसे बेटे औऱ बेटियां या अन्य रिश्तेदार भी हैं, जिनके पिता दिवगंत हो चुके हैं। लेकिन वो टिकट की कतार में अभी भी डटे हुए हैं। हालांकि ये नेता पुत्र और रिश्तेदार भले ही दावेदारी जता रहे हो, लेकिन टिकट का अंतिम फैसला आलाकमान तय करेगा। पूरी संभावना यहीं बनती दिख रही है कि जीत के लिए पहले पार्टी पिता को ही चुनाव लड़ने का मौका देगी। हालांकि 70 साल पार का फार्मूला लागू होने पर रिप्लेसमेंट के चलते फिर बेटों—बेटियों को मौका जरुर दिया जा सकता है। वहीं इनको टिकट देने पर पार्टी पर फिर वंशवाद का ठप्पा लगने जैसे आरोपों का भी सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यह भी तय है कि अगर वाकई वो जिताऊ है तो फिर उन्हें किसी का रिश्तेदार होने के आधार पर नजरअंदाज भी नहीं किया जाएगा।

बहरहाल, यह तो पार्टी को तय करना है किसी को चांस देना है और किसको नहीं। लेकिन फिलहाल हम उन नेता पुत्रों-रिश्तेदारों पर ग्राफिक्स के जरिये नजर डाल लेते हैं, जो टिकट रेस में शामिल हैं….

बेटा/रिश्तेदार नेताजी विधानसभा सीट
दिव्या मदेरणा (पुत्री) महिपाल मदेरणा ओसियां
संजय पहाड़िया (पुत्र)- जगन्नाथ पहाडिया वैर
बनारसी मेघवाल (पुत्री) मास्टर भंवरलाल बगरू
रोहित बोहरा (पुत्र) प्रद्युमन सिंह राजाखेड़ा
राकेश मोरदिया (पुत्र) परसराम मोरदिया धोद
समृद्ध शर्मा (पुत्र) ममता शर्मा बूंदी
डॉ प्रवीण कुमार श्रवण कुमार सूरजगढ़
मृगेन्द्र भाटी (पुत्र) स्व. नरेंद्र सिंह भाटी लोहावट
दानिश अबरार (पुत्र) स्व. अबरार अहमद सवाईमाधोपुर
प्रशांत बैरवा (पुत्र) स्व. डीपी बैरवा निवाई
योगेश शर्मा (पुत्र) स्व. चंद्रशेखर शर्मा बांदीकुई
चेतन डूडी (पुत्र) स्व. रुपाराम डूडी डीडवाना
शमा खान (पुत्रवधु) स्व. हादी खान शिव
उम्मेद सिंह- (भतीजा) स्व. खेतसिंह राठौड़ शेरगढ़
गिरिराज सिंह (बेटा) महादेव सिंह खंडेला खंडेला
रीटा चौधरी (पुत्रवधु) नारायण सिंह दांतारामगढ़
वीरेन्द्र चौधरी (बेटा) नारायण सिंह दांतारामगढ़
बालेन्दु सिंह (बेटा) दीपेन्द्र सिंह श्रीमाधोपुर
अनिल शर्मा (बेटा) भंवरलाल शर्मा सरदारशहर
अशोक शर्मा (बेटा) बनवारीलाल शर्मा धौलपुर

हालांकि इनमें से चेतन, संजय पहाड़िया, दानिश और प्रशांत बैरवा विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें पिछली बार जीत नसीब नहीं हुई। मोदी की प्रचंड लहर में इन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन अब राजस्थान के ट्रेंड एक बार भाजपा एक बार कांग्रेस की सरकार बनने के आधार के चलते इन्हें इस बार जीत तय दिख रही है। लिहाजा, टिकट के लिए वो कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे।

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