परनामी का दौरा या ‘भड़ास यात्रा’

0
768
  • सभी विधानसभा क्षेत्रों में मिली शिकायतें
  • संगठन और विधायकों दोनों से परेशानी
  • निगम महापौर भी परेशानी का सबब

अनुराग हर्ष

बीकानेर ।विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलने बीकानेर पहुंचे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी को लगभग हर विधानसभा क्षेत्र में ‘खरी-खरी’ सुननी पड़ी।  कार्यकर्ताओं की नाराजगी का पारा इस कदर चढ़ा हुआ था कि पूरी दौरा ‘भड़ास यात्रा’ में तब्दील हो गया। कहीं पार्षदों का आक्रोश था तो कहीं स्वयं विधायक ही कार्यकर्ताओं से उलझते नजर आए। पार्टी नेताओं ने अपनों की शिकायत की तो राजनीतिक पदों पर बैठे बड़े नेता भी समस्या के रूप में ही उभरे।

दरअसल, उपचुनावों में हार का सामना कर रही भाजपा अपना घर संभालने में लगी है। ऐसे में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हर विधानसभा क्षेत्र में बड़े नेताओं को भेजने का सिलसिला शुरू किया है। प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी की श्रीगणेश यात्रा का अनुभव पार्टी के लिए शायद उत्साहजनक नहीं रहा। श्रीकोलायत, बीकानेर पश्चिम, बीकानेर पूर्व, लूणकरनसर, नोखा, खाजूवाला और श्रीडूंगरगढ़ सातों विधानसभाओं के कार्यकर्ताओं ने पार्टी प्रदेशाध्यक्ष को बताया कि आखिर किन कारणों से वो विधानसभा चुनाव में पिछड़ सकते हैं।

पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी और देहात भाजपा अध्यक्ष सहीराम दुसाद के बीच अनबन इसी दौरे में एक बार फिर सामने आ गई। भाटी ने पहली बार दुसाद के साथ मंच तो साझा किया लेकिन उनके खिलाफ बोलने से नहीं चूके। भाटी ने कहा कि गुटबाजी से पार्टी को नुकसान हो रहा है। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाए। इतना ही नहीं बीकानेर पूर्व की बैठक में तो स्वयं विधायक सिद्धि कुमारी उपस्थित नहीं हुई। कारण कुछ भी रहा हो लेकिन यह आश्चर्यजनक था कि स्वयं विधायक बैठक में नहीं पहुंची, जबकि शेष छह विधानसभाओं की बैठक में विधायक और हारे हुए प्रत्याशी मौजूद थे।

ऐसे में कार्यकर्ताओं ने सिद्धि कुमारी की शिकायत करने में भी कंजूसी नहीं बरती।  बीकानेर पश्चिम में तो स्वयं विधायक गोपाल जोशी ने अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को विरोधी कहकर संबोधित किया। इस पर परनामी बिफर गए और बाद में इन ‘विरोधियों’ की बात आधे घंटे तक सुनी। खाजूवाला के विधायकों ने संसदीय सचिव डॉ. विश्वनाथ की शिकायत की तो नोखा में पार्टी की जर्जर हालत पर समय रहते चेतने की नसीहत भी प्रदेशाध्यक्ष तक पहुंच गई।

डॉ. विश्वनाथ दूसरे विधायक थे, जिन्हें परनामी की डांट खानी पड़ी। लूणकरनसर में पार्टी अलग-अलग गुटों ने परनामी के सामने सिर्फ और सिर्फ कमियां गिनाई। कहीं से भी पार्टी के मजबूत होने का वादा नहीं किया गया। बीकानेर पूर्व और पश्चिम की सीटों को सीधे सीधे प्रभावित करने वाले नगर निगम की शिकायतों का टोकरा सबसे बड़ा था। यहां अधिकांश पार्षदों ने महापौर की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए, उन्हें हटाने की मांग की। स्वयं महापौर ने भी मोर्चा संभाला और पार्षदों की शिकायतें करने में कोई कमी नहीं रखी। हालांकि इसे स्वयं महापौर का स्पष्टीकरण कहा जा सकता है।

मंदिर राजनीति से शुरूआत

देशभर में चल रही मंदिर राजनीति से परनामी भी अलग नहीं रहे। उन्होंने बीकानेर यात्रा के दौरान देशनोक में करणी माता के दर्शन किए तो शहर में युवा नेता अविनाश जोशी के साथ सुरदासाणी बगीची में भैरुजी की आरती में शामिल हुए। जयपुर रोड पर वैष्णो देवी मंदिर में पंजाबी समुदाय के साथ पहुंचकर मत्था टेका। इसके प्रति उत्तर में रविवार को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट भी देशनोक में करणी माता के दर्शन करने पहुंचे।

नए चेहरे हुए रूबरू

इस दौरे की खास बात यह रही कि प्रदेशाध्यक्ष के सामने विधानसभा चुनाव के लिए कई नए चेहरे भी सामने आए। सातों विधानसभा क्षेत्रों में टिकट मांगने वालों में कई युवा तुर्क इस बार सक्रिय नजर आ रहे हैं। जिसमें बीकानेर पश्चिम, लूणकरनसर, श्रीकोलायत, नोखा और श्रीडूंगरगढ़ शामिल है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here