लंबे समय से कांग्रेस से छिटके, कायमखानियों को मना पाएंगे पायलट?

प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक प्रभावकारी होते हुए भी कहीं भी केवल अपने वोट के आधार पर सांसद निर्वाचित करवाने की स्थिति में नहीं है। राजस्थान में मुसलमानों में मेव, कायमखानी, दाउदी बोहरा, खानजादे, सिन्धी आदि अपनी-अपनी अलग-अलग पहचान रखते है। इनमें शेखावाटी के जिलों में कायमखानी और मेवात तथा मत्स्य में मेव रहते है।

-लंबे समय से कांग्रेस से छिटके 
कायमखानियों को मना पाएंगे पायलट?
-छह माह पहले पीसीसी में पायलट ने कहा था,कायमखानियों का कांग्रेस में खोया गौरव फिर से लौटाऊंगा, अब कायमखानियों ने पायलट को अपना वादा याद दिलाया
जोधपुर। प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक प्रभावकारी होते हुए भी कहीं भी केवल अपने वोट के आधार पर सांसद निर्वाचित करवाने की स्थिति में नहीं है। राजस्थान में मुसलमानों में मेव, कायमखानी, दाउदी बोहरा, खानजादे, सिन्धी आदि अपनी-अपनी अलग-अलग पहचान रखते है। इनमें शेखावाटी के जिलों में कायमखानी और मेवात तथा मत्स्य में मेव रहते है। जबकि उदयपुर में दाउदी बोहरा हैं। मेव, खानजादे और कायमखानी और दाउदी बोहरा अपनी सांस्कृतिक पहचान के कारण अधिक कट्टर नहीं है। यही हाल बाड़मेर के सिन्धी मुसलमानों का है।
राजस्थान में मुस्लिम आबादी करीब 9 प्रतिशत है। नागौर, सीकर, चूरू, जयपुर, भरतपुर और टौंक जिले में इनकी 10 प्रतिशत है। विधान सभा चुनाव 2013 में कांग्रेस पार्टी से एक भी मुस्लिम विधायक निर्वाचित नहीं हुआ। 200 विधान सभा सीट में भाजपा ने केवल 4 मुस्लिमों को उम्मीदवार बनाया। इसमें से दो निर्वाचित हुए। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने किसी भी मुस्लिम को उम्मीदवार नहीं बनाया। कांग्रस पार्टी के भी मात्र एक उम्मीदवार मुस्लिम है। क्रिकेटर हैदराबाद निवासी अजहररूद्दीन टोंक सवाईमाधोपुर क्षेत्र से उम्मीदवार है। मुस्लिम आबादी एवं कांग्रेस पार्टी को एक मुश्त वोट देने के हिसाब से दो मुस्लिम उम्मीदवार होना चाहिए था। नागौर लोक सभा क्षेत्र से भाजपा के दो मुस्लिम विधायक हबीबुर्रहमान अशरफी और युनुस खान निर्वाचित हुए। युनूस खान अभी भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री है।
36 कौम में इनकी स्वीकार्यता
राजस्थान में कायमखानी समाज को कांग्रेस में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने से रोष है। प्रदेश में नागौर, झुंझुनूं, सीकर, चूरू, जोधपुर, बीकानेर और अजमेर में बड़ी संख्या में कायमखानी है। कायमखानी मार्शल कौम के रूप में पहचानी जाती है। इस कौम का गौरवशाली इतिहास रहा है। समाज के लोग प्रशासन, सेना, पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र में प्रतिष्ठित है। कायमखानी सदैव कांग्रेस से ही जुड़े रहे हैं। अपनी सांस्कृतिक पहचान के कारण अधिक कट्टर नहीं होने के चलते 36 कौम के लोगों में इनकी स्वीकार्यता भी है। नागौर, चूरू, सीकर और झुंझुनूं में कायमखानी राजनीतिक रूप से कांग्रेस के साथ रहते आए हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से कायमखानी समाज को कांग्रेस ने हाशिये पर डाल रखा है। करीब छह माह पहले प्रदेश के कायमखानी समाज के मौजिज लोगों का एक शिष्टमंडल सचिन पायलट से पीसीसी में मिला था। पीसीसी की मौजूदा कार्यकारिणी में एक भी कायमखानी नुमांइदा नहीं होने को लेकर नाराजगी भी जताई थी।
कांग्रेस में खोया गौरव लौटाएंगे
इस दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सचिन पायलट ने भरोसा दिलाया था कि समाज को सूद समेत उसका हक मिलेगा। साथ ही पायलट ने इशारों ही इशारों में कायमखानी समाज को सावधान किया कि वह भी अपने समाज में उन लोगों से दूर रहे जिनकी वजह से समाज पीछे गया है। पायलट ने कहा कि कायमखानी समाज का बहुत शानदार इतिहास है और इसके लोगों ने सरहद पर बड़ी कुर्बानियां दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और कायमखानी समाज का परस्पर गहरा रिश्ता रहा है। अब चूंकि विधानसभा चुनाव जल्द होने वाले हैं ऐसे में क्या सचिन पायलट अपनी बात पर कायम रहते हुए कायमखानियों को उनका कांग्रेस में खोया गौरव लौटा पाएंगे? यह सवाल आज हर किसी कायमखानी के दिमाग में चल रहा है। गत चुनाव में कायमखानी समाज में कांग्रेस पार्टी के प्रति नाराजगी बढ़ गई थी तथा विधानसभा और लोकसभा चुनावों में तकरीबन पूरा समाज कांग्रेस से दूर खड़ा दिखाई दिए।
कांग्रेस ने खोया बड़ा जनाधार
राजस्थान 1952-1991 तक केवल मात्र एक कायमखानी मुस्लिम नेता कांग्रेस से लोकसभा सदस्य चुना गया। वह राज्यमंत्री कैप्टन अयूबखान रहे। इसके विपरीत पूर्व राज्यपाल मोहम्मद उस्मान आरिफ, पूर्व कांग्रेस नेता सादिक अली और समाजवादी जनता पार्टी से कांग्रेस में आए चौधरी तैयब हुसैन हारते रहे। कांग्रेस में नवाब लुहारू, ए. अहमद, पूर्व मुख्यमंत्री प्यारे मियां बरकतउल्ला खान, अहमदबख्श सिन्धी, तकीउद्दीन शाह और मोहम्मद उस्मान आरिफ  ने राज्य के मुसलमानों को कांग्रेस पार्टी से जोड़ा। राजस्थान में कांग्रेस का दमदार मुस्लिम नेतृत्व नहीं होने से पार्टी का जनाधार घटा है। प्रदेश में अल्पसंख्यकों के थोक समर्थन से सरकार बनाने वाली कांग्रेस पार्टी के द्वारा मुस्लिम नेताओं को हाशिए पर धकेला गया है। इसके चलते शेखावाटी और मारवाड़ में प्रभावशाली कायमखानी समाज की नाराजगी की वजह से कांग्रेस ने मुस्लिम वर्ग में अपना बड़ा जनाधार खो दिया।