आहोर विधानसभा सीट : कांग्रेस के ‘अश्वमेघ’ में ‘वजूद’ का अड़ंगा! 

आहोर विधानसभा सीट पर जातीय समीकरणों के आधार पर जीत का सपना संजोए बैठी कांग्रेस के लिए जीत के अरमान अब डगमगाने लगे हैं। पूर्व मंत्री भगराज चौधरी के पुत्र जगदीश चौधरी के बागी बनने एवं एसटी नेता पंकज मीणा के बसपा से ताल ठोकने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी के सामने परम्परागत वोटों को एकजुट रखने की चुनौती आ खड़ी हुई है।

अल्लाह बख्श खान @ जालोर
आहोर विधानसभा सीट पर इस बार जातीय समीकरणों के आधार पर जीत की उम्मीदे पाले बैठी कांग्रेस के लिए अब नई मुश्किल खड़ी हो गई है। आहोर से चार बार विधायक रह चुके पूर्व मंत्री भगराज चौधरी के पुत्र एवं कांग्रेस प्रदेश सचिव जगदीश चौधरी के बागी बनने के बाद जहां चौधरी जाति के वोटों में बिखराव की आशंका सताने लगी है। वहीं बसपा नेता पंकज मीणा की दिन-ब-दिन मजबूत होती स्थिति से मीणा समाज के साथ ही मेघवाल सहित अन्य अनुसूचित जातियों के वोटों में भी आंशिक रूप से सेंधमारी की आशंका है। अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के जगदीश चौधरी पूरा जोर लगा रहे हैं। वहीं कांग्रेस की डगमगाती नैया भाजपा नेता छगनसिंह राजपुरोहित को मजबूती दे रही है।

गौरतलब है कि पूर्व विधायक शंकरसिंह राजपुरोहित के प्रति कुछ जाति-समुदायों के साथ ही कार्यकर्ताओं में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए भाजपा ने नए चेहरे के तौर पर युवा नेता छगनसिंह राजपुरोहित को मैदान में उतारा था। वहीं कांग्रेस ने गत चुनाव में मोदी लहर के बावजूद महज नौ हजार वोटों से हारने वाले सवाराम पटेल को मैदान में उतारा था। प्रारंभिक तौर पर सवाराम पटेल को जातीय समीकरणों के लिहाज से काफी मजबूत माना जा रहा था, लेकिन अचानक से जगदीश चौधरी के बागी तेवर अपनाकर निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतरने से कांग्रेस के लिए चिंता पैदा हो गई है।

इसलिए बागी बने जगदीश चौधरी

कांग्रेस प्रदेश सचिव जगदीश चौधरी के पिता भगराज चौधरी चार बार आहोर से विधायक रहे हैं। वहीं कांग्रेस सरकार में वे मंत्री भी रह चुके हैं। भगराज चौधरी को जहां जाट-चौधरी लॉबी में मजबूत नेता के तौर पर माना जाता है। वहीं उनके उत्तराधिकारी के तौर पर जगदीश चौधरी को देखा जा रहा था, लेकिन लगतार दो बार की दावेदारी के बावजूद उन्हें टिकट नहीं मिल पाया। ऐसे में अपने राजनीतिक वजूद को बचाने एवं शक्ति प्रदर्शन के लिहाज से जगदीश चौधरी ने बागी तेवर अपनाए हैं।

इसलिए कांग्रेस चिंतित

हालांकि चौधरी समाज का एक धड़ा एकजुटता से सवाराम पटेल को जीत दिलाने के लिए प्रयासरत है। लेकिन यह भी हकीकत है कि चौधरी जाति में भगराज चौधरी का खासा दबदबा रहा है। ऐसे में जगदीश चौधरी को कमजोर नहीं आंका जा सकता है। वहीं बसपा प्रत्याशी पंकज मीणा के प्रति खासकर मीणा समाज में दलित आंदोलन के बाद एकजुटता आ रही है। अनुसूचित जाति वर्ग की अन्य जातियों में भी पंकज मीणा के प्रति आकर्षण है। जाहिर है दोनों तरफ से कांग्रेस के परम्परागत वोटों के बिखराव की आशंका है। तो दूसरी तरफ भाजपा का परम्परागत वोट बैंक रहा स्वर्ण जातियां व ओबीसी वर्ग फिर से एकजुट होने लगा है। खासकर पूर्व विधायक शंकरसिंह राजपुरोहित के घोर विरोधी रहे राजपूत समाज में छगनसिंह राजपुरोहित के प्रति कोई नाराजगी नहीं है।