राजस्थान विधानसा चुनाव में हुड्डा लगाएंगे कांग्रेस की नैया पार!

हुड्डा बनेंगे राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी

-डॉ.के.आर.गोदारा-
जोधपुर। राजस्थान में आगामी दिसबंर में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस आलाकमान सभा तरीके आजमा रहा है। कांग्रेस की नई रणनीति के तहत राजस्थान में कांग्रेस से दूर हो चुके जाट समुदाय को फिर से कांग्रेस के पाले में लाने के लिए अब हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्रसिंह हुड्डा को एआईसीसी का जनरल सेक्रेटरी बनाने की तैयारी है। साथ ही हुड्डा को राजस्थान कांग्रेस का प्रभारी बनाया जाएगा ताकि जाटों को कांग्रेस के झंडे तले फिर से लाया जा सके। कांग्रेस आलाकमान का मानना है कि हुड्डा के राजनैतिक कौशल की सेवाएं राजस्थान चुनाव में ली जाए ताकि जाट वोटों का कांग्रेस के पक्ष में फिर से ध्रुवीकरण कर चुनाव में कांग्रेस की नैया पार लगाई जा सके। गत चुनाव में जाटों के भाजपा का समर्थन करने के चलते राजस्थान में कांग्रेस की बुरी तरह से हार हुई थी। लेकिन इस बार कांग्रेस आलाकमान किसी तरह की कोई रिस्क लेने के मूढ़ में नहीं है और चुनाव से पहले हर संभव रणनीति पर प्रभावी तरीके से काम किया जा रहा है।
ओला के निधन से स्थान रिक्त
कांग्रेस के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार इस समय राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान से कोई भी प्रभावी जाट नेता कांग्रेस में नहीं है। पूर्व केन्द्रीय विदेश मंत्री रामनिवास मिर्धा के निधन के बाद से ही कांग्रेस में राजस्थान से किसी प्रभावी जाट नेता की कमी महसूस की जा रही थी। लेकिन कुछ हद तक यह कमी शीशराम ओला पूरी कर रहे थे। लेकिन पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कद्दावर जाट नेता शीशराम ओला के निधन के बाद राजस्थान से कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावी जाट नेता की कमी और अधिक खलने लगी। ओला का 86 वर्ष की आयु में दिसम्बर 2013 को निधन हो गया था। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान से प्रभावी जाट नेता के कांग्रेस में नहीं होने से जाट समाज कांग्रेस से दूर होने लगा और गत चुनाव में पूरी तरह से भाजपा के साथ खड़ा दिखार्ई दिया। इसके चलते गत विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को राजस्थान में बुरी तरह से हारना पड़ा। इसके बाद आलाकमान अब राजस्थान में किसी प्रभावी जाट नेता को राष्ट्रीय भूमिका में लाना चाहता है, लेकिन राजस्थान में इस कैडर का फिलहाल कांग्रेस में कोई जाट नेता आलाकमान की नजर में नहीं है। यही कारण है कि हरियाणा के पूर्व सीएम हुड्डा को राजस्थान में प्रभारी बनाकर जाट वोटों को साधा जा सके।
इसलिए हुड्डा पर फोकस
कांग्रेस के वरिष्ठ सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की यूथ फर्स्ट पॉलिसी के चलते उम्रदराज हो चुके नेताओं को एक तरह से मार्गदर्शक के रूप में जगह दी जा रही है। साथ ही उनके अनुभव का लाभ लेने के लिए सक्रिए राजनीति की बजाए संगठन में लगाया जा रहा है। हुड्डा को राजस्थान में प्रभारी बनाकर भेजने की एक वजह यह भी है। कांग्रेस में 70 पार हो चुके सुशील कुमार शिदें (75), दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित (79), पूर्व केन्द्रीय मंत्री किशोर चंद्र देव और पूर्व केन्द्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली (77) को भी संगठन में जगह देकर उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई है। हुड्डा भी 70 के करीब पहुंच चुके हैं और उन्हें अब संगठन में एआईसीसी में जनरल सेक्रेटरी बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की सेवा करने में लगाया जाएगा।
अच्छा नहीं रहा नेता थोपना
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार वैसे राजस्थान से किसी बाहरी जाट नेता को यहां के जाटों पर थोपने का अनुभव कांग्रेस के लिए अच्छा नहीं रहा है। पिछली बार विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले हरियाणा के ही कद्दावर कांग्रेस नेता वीरेन्द्रसिंह को राजस्थान में चुनाव प्रभारी बनाकर भेजा था, लेकिन वो यहां कांग्रेस के जाट नेताओं से सांमजस्य नहीं बिठा पाए और कांग्रेस के बुरी तरह से पराजय का सामना करना पड़ा था। वीरेन्द्र चौधरी को राजस्थान •ोजने से कांग्रेस को लाभ की बजाए उल्टा नुकसान उठाना पड़ा था। इसकी वजह यह रही कि वीरेन्द्रसिंह की नीतियों के चलते राजस्थान में कांग्रेस के कद्दावर जाट नेता दो फाड़ हो गए और कई बड़े नेताओं ने कांग्रेस को अलविदा करते हुए निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए। इससे कांग्रेस को अधिकांश सीटें पर बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। हरियाणा और राजस्थान की जाट राजनीति में जमीन आसमान का अंतर है।