चुनाव सिर पर और मतदाता जोडने में पिछड़ा राजस्थान

22 लाख यूथ का टारगेट था जोड़े केवल 16 लाख

जयपुर। निर्वाचन विभाग पूरी ताकत झौंकने के बाद भी नए मतदाताओं को मतदाता सूची में जोडने के मामले में अब भी राष्ट्रीय स्तर से काफी पीछे चल रहा है। वहीं बीते दो साल में जितने युवाओं के नाम मतदाता सूची में जुडने चाहिए थे उतने नाम भी नहीं जुडे हैं जिससे निर्वाचन विभाग की आगामी विधान सभा चुनाव की तैयारियों को झटका लगा है।
निर्वाचन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मतदाता सूची में नए मतदाता जोडने का राष्ट्रीय औसत 615 है लेकिन राजस्थान में यह औसत प्रति हजार व्यक्ति अब भी महज 582 ही है। जिससे निर्वाचन विभाग की ओर से चलाए जा रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम पर सवाल उठने लगे है। निर्वाचन विभाग का कहना है कि नए मतदाता जोडने में राजस्थान काफी पीछे रह गया है।
दूसरी तरफ मतदाता सूची में युवाओं को जोडने के मामले में काफी पीछे है। मतदाता सूची में युवा मतदाताओं के 22 लाख नाम जुडने चाहिए थे वहीं विभाग महज 16 लाख युवाओं के ही नाम जोड पाया है। वहीं 1 जनवरी 20018 को 18 वर्ष के होने पर 9.5 लाख मतदाताओं के नाम जोड पाया है।
मतदाता सूची में नाम कम जुडने के पीछे सबसे बडा कारण मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम का प्रचार प्रसार नहीं होना है। अधिकांश लोगों को तो पता ही नहीं रहता है कि उनके क्षेत्र में मतदाता सूची में नाम जोडने का शिविर लगाया जा रहाहै। ऐसे में लोग संबधित बूथ पर जाने से रह जाते है।