राजस्थान कांग्रेस में टिकटों की दौड़ शुरू, शैलजा बनी स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष

-ललितेश त्रिपाठी और शाकिर सनादी को बनाया सदस्य
-संगठन महासचिव अशोक गहलोत ने जारी किए आदेश

जयपुर। कांग्रेस में विधानसभा चुनावों की टिकटों की दौड़ शुरू हो गई है। कांग्रेस ने आज राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए स्क्रीनिंग कमेटी की घोषणा कर दी है, पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेत कुमारी शैलजा को स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि ललितेश त्रिपाठी और शाकिर सनादी को कमेटी का सदस्य बनाया है।
कुमारी शैलजा को राजस्थान कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने कई सियासी समीकरण साधने की कोशिश की है। कुमारी शैलजा लोकसभा चुनावों के समय राजस्थान की प्रभारी रह चुकी है, कांग्रेस के बड़े दलित नेताओं में उनकी गिनती होती है। स्क्रनिंग कमेटी के गठन के साथ ही अब कांग्रेस में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जुलाई के पहले सप्ताह में स्क्रीनिंग कमेटी की पहली बैठक होने के आसार हैं। स्क्रीनिंग कमेटी हर सीट का पैनल तैयार करके टिकट चयन का काम करेगी। टिकट वितरण के मापदंड भी अभी तय होने हैं, इस बार देखना होगा कि कांग्रेस दो बार हारे हुए, बड़े अंतर से हारने वालों और उम्रदराज नेताओं को टिकट देती है या नहीं, यह सब मापदंड भी अभी तय होने हैं।
स्क्रीनिंग कमेटी बनने के साथ ही कांग्रेस में अब पूरी तरह से चुनावी माहौल बन गया है। टिकट के दावेदार नेता सक्रिय हो गए हैं और स्क्रीनिंग कमेटी से संपर्क साधने की कवायद भी शुरू कर दी है। कांग्रेस ने भाजपा से पहले स्क्रीनिंग कमेटी की घोषणा करके एक तरह से उम्मीदवार चयन की दिशा में काम शुरू करने में बाजी जरूर मार ली है। कांग्रेस इस बार कुछ सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा भाजपा से पहले करने की रणनीति बना रही है ताकि तैयारी का पूरा मौका मिले। स्क्रीनिंग कमेटी जल्द ही काम शुरू कर देगी और कांग्रेस में उम्मीदवार चयन की धमाचौकड़ी भी शुरू हो जाएगी। टिकट दिलवाने और विरोधियों का टिकट कटवाने की सियासी चालें भी अब देखने को मिलेगी। कांग्रेस में अब बची हुई चुनावी कमेटियों की घोषणा भी जल्द होने के आसार हैं जिनमें चुनाव अभियान समिति, प्रदेश चुनाव समिति, घोषणा पत्र समिति पर सबकी निगाहें हैं। फिलहाल कांग्रेस ने स्क्रीनिंग कमेटी बनाकर उम्मीदवार चयन की कवायद शुरू कर दी है, अब देखना होगा कि चुनावी मोर्चे पर कांगेस कितनी जल्दी अपने उम्मीदवार उतार पाती है।