राजस्थान का रण जीत के लिए कांग्रेस बनाऐगी कार्यकारी प्रदेशाअध्यक्ष

उड़िसा, एमपी व छग के बाद आलाकमान प्रदेश में करेगा प्रयोग, दो से चार नेता बन सकते है कार्यकारी अध्यक्ष, आठ राजनेता है दावेदार

जयपुर। कांग्रेस आलाकमान पार्टी की मजबूती के लिए कई नए नए प्रयोग कर रहे हैं। इसके लिए पार्टी ने हर राज्य में कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनाने का फामूर्ला अपनाया है। उड़ीसा,एमपी और छग जैसे चुनावी राज्यों से इसकी शुरूआत भी कर दी है। राजस्थान में भी जल्द दो से चार कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया चल रही है। बाद में इन्हीं कार्यकारी पीसीसी चीफ में से एक को परफोर्मेंस के आधार पर प्रदेशाध्यक्ष बनाने की योजना है।
राजस्थान विधानसभा का चुनावी रण जल्द ही सजने वाला है। इससे पहले कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और सोशल इंजीनियरिंग को साधने में जुटी हुई है। चुनावी राज्यों में जीत दर्ज करने के लिए आलाकमान राहुल गांधी कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनाने का नया फामूर्ला अपनाया है। उड़ीसा,एमपी और छत्तीसगढ़ सहित कईं राज्यों में कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनाए जा चुके हैं। अब बारी राजस्थान की है। बात अगर राजस्थान की करें तो इससे पहले भी पांच कार्यकारी प्रदेशाध्क्ष बनाए जा चुके हैं। अबरार अहमद,परसराम मोरदिया,जुगल काबरा और गोपाल सिंह ईडवा कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं।
पीसीसी उपाध्यक्ष मुमताज मसीह का कहना है कि इससे पहले सिर्फ औपचारिकता के तौर पर कार्यकारी प्रदेश अध्यक्षों की भूमिका होती थी। यानि चुनाव प्रचार के दौरान पीसीसी मुख्यालय पर एक बाबू की तरह उसे लगा दिया जाता था। लेकिन अब राहुल गांधी ने इस पद को पावरफुल बनाने की तैयारी कर ली है। यानि कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष को अलग अलग जोन और सीटों में काम करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। बाद में वर्किंग परफोर्मेंस के आधारी पर उन्हीं में से एक को पीसीसी चीफ बनाने जाने की पूरी प्लानिंग है।
बॉक्स-यह बन सकते है कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष
राजस्थान में दो से चार कार्यकारी पीसीसी चीफ बनाने की प्रक्रिया जारी है। बीच में पीसीसी नेतृत्व ने राजस्थान में यह फामूर्ला नहीं लागू करने का सुझाव दिया था। लेकिन आलाकमान ने उस प्रस्ताव को नहीं माना। लिहाजा कार्यकारी प्रदेशाध्यक्षों के नामों की खोज लगभग पूरी हो चुकी है। सूत्रो के मुताबिक,विधायक महेन्द्रजीत सिंह मालवीय,सांसद रघु शर्मा,रघुवीर मीणा,गोपाल सिंह,मास्टर भंवरलाल मेघवाल,लालचंद कटारिया,बृजेन्द्र ओला और रमेश मीणा में से चार नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है।