बीजेपी विधायकों का विरोध दरकिनार, कार्यकर्ताओं की सलाह से ही 20 हजार बूथ समितियों का पुर्नगठन

विधायकों द्वारा बूथ समितियों में बनाए गए फर्जी अध्यक्षों का मामला,
कार्यकतार्ओं को खुश करने के लिए भाजपा का मास्टर स्ट्रोक

जयपुर। प्रदेश भाजपा ने चुनावी साल में आखिर जमीनी कार्यकतार्ओं को सर आंखों पर बैठाया है। प्रदेश में विधायकों द्वारा 25 हजार बूथ समितियों में फर्जी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब फर्जी अध्यक्षों को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वहीं पार्टी ने मास्टर स्ट्रोक लेते हुए विधायकों के तमाम विरोध को दरकिनार कर पार्टी ने अनुभवी और जमीनी कार्यकतार्ओं की सलाह से ही 20 हजार बूथ समितियों का पुर्नगठन कर दिया है। संगठन के पदाधिकारियों का मानना है कि अगर कार्यकर्ता खुश होगा तो पार्टी को मिशन 180 तक पहुंचने में परेशानी नहीं होगी।

असल में प्रदेश में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के निर्देश पर 51 हजार बूथ समितियां बनाई गई थी। लेकिन इन समितियों में स्थानीय विधायकों ने फर्जी अध्यक्ष बना दिए।

अब पार्टी ने ऐसे फर्जी अध्यक्षों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पार्टी ने विधायकों के विरोध को दरकिनार करते हुए अपने अनुभवी और जमीनी कार्यकतार्ओं पर भरोसा जताया है। प्रदेश में 20 हजार बूथ समितियों का पुर्नगठन कार्यकतार्ओं से सलाह मशविरा करने के बाद ही गठित की गई है।

प्रदेश भाजपा के सूत्रों का कहना है कि तीन सीटों पर हुए उपचुनाव के बाद समीक्षा में सामने आया था कि अगर जमीनी कार्यकर्ता नाराज नहीं होता तो पार्टी की इतनी करारी हार नहीं होती। लिहाजा यह तय किया गया कि विधायक चाहे कितना ही विरोध करें बूथ समितियों का पुर्नगठन तो जमीनी और अनुभवी कार्यकताओं के सलाह मशविरे के बाद ही होगा।

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