उम्मीदवारों की पहली सूची जल्द, एंटी इंकमबेंसी बनी सबसे बड़ी ‘मुसीबत’

जोधपुर। भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों के सिलेक्शन के लिए कार्यकर्ताओं से रायशुमारी का काम पूरा कर लिया है। पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि उसके प्रत्याशियों की पहली लिस्ट नवंबर महीने के पहले हफ्ते में आ जाएगी। दरअसल बीजेपी ने पाली के रणकपुर में 102 सीटों के बाद अब जयपुर में 98 सीटों पर रायशुमारी का दौर पूरा हो चुका है। रायशुमारी के आखिरी दिन कुल सत्ताइस सीटों पर मंथन हुआ। रायशुमारी की खास बात ये रही की जयपुर की उन सीटों पर भी चर्चा हुई जहां हर बार दिग्गज चुनाव लड़ते रहे हैं। इस राजशुमारी में सांगानेर विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा दावेदारों ने ताल ठोकी। जयपुर जिले की उन्नीस समेत कुल सत्ताइस सीटों पर कई दावेदार नजर आए। वहीं नवम्बर के पहले सप्ताह में टिकटों की सूची जारी की अटकलें भी सामने आईं। राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्ता विरोधी लहर को टालने के लिए कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटेगी। भाजपा ने 2013 में राजस्थान में जबरदस्त जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार पार्टी को कांग्रेस से कड़ी चुनौती मिल रही है।

पार्टी में कुछ संवादहीनता
पार्टी सूत्रों ने बताया कि राजस्थान में कांग्रेस के लिए अच्छा संकेत देने वाले सर्वेक्षणों को पार्टी सूत्र ने अधिक तवज्जो नहीं दिया और स्वीकार किया कि शुरूआत में पार्टी में कुछ ‘संवादहीनता’ की स्थिति थी लेकिन अब स्थिति बदल गई है। पार्टी के एक नेता ने दावा किया हम तीनों राज्यों में फिर से सत्ता में आएंगे। उन्होंने यह नहीं बताया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में कितने विधायकों को पार्टी टिकट नहीं देगी। संगठन से मिलने वाले फीडबैक और पार्टी की ओर से कराए जाने वाले स्वतंत्र आकलन के आधार पर यह निर्णय आधारित होगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अलोकप्रिय विधायकों के टिकट काट कर उनके निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी कुछ हद तक मतदाताओं को शांत कर सकती है।

उम्मीदवार चयन में सावधानी
भाजपा सूत्रों ने बताया कि एक ओर जहां मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता बरकरार है वहीं दूसरी ओर राजस्थान में मुख्यमंत्री की कार्यशैली को लेकर लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। ऐसे परिदृश्य में सरकार का मुख्य चेहरा जब लोकप्रिय नहीं हो तो कुछ अलोकप्रिय विधायकों को दोबारा मैदान में नहीं उतारने सहित कुछ खास कदम उठा कर किसी भी कथित सत्ता विरोधी लहर को प्रभावी तौर पर खत्म किया जा सकता है। भारतीय जनता पार्टी में विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व संभालने के बाद उम्मीदवारों के चयन के लिए पार्टी गहन क्षेत्र कार्य पर भरोसा करती है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के क्रमश: 230 और 200 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी ने 2013 के चुनाव में क्रमश: 165 और 163 सीटों पर जीत हासिल की थी।

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