शाह-वसुंधरा के बीच चल रहा है 20-50 का मैच….देखते हैं कौन जीतता है

जयपुर .  सत्ता को बरकरार रखते हुए चुनाव के मैदान में जीत हासिल करने के लिए हाथ-पैर मार रही भाजपा के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर प्रदेश और दिल्ली नेतृत्व आमने-सामने है. टिकटों के मापदंड को लेकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के बीच खिंची तलवार के बाद दोनों खेमों में खलबली बढ़ गई है. वहीं, शाह के निर्देश पर जयपुर में पैनल को लेकर की गई दोबारा मशक्कत के बाद वसुंधरा राजे फिर अपनी सूची के साथ दिल्ली पहुंच गई हैं. यहां उनकी शाह के साथ बैठक होनी है. सभी की निगाहें दोनों के बीच होने वाली बैठक पर टिक गई है.
चुनावी मैदान में तमाम सियासी चुनौतियों से जूझ रही भाजपा के भीतर टिकट बंटवारे के मापदंड को लेकर पैदा हुई रार ने पार्टी के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी है. सूत्रों ने बताया कि राज्य में शाह अपने स्तर पर करवाए सर्वे तथा संघ, विस्तारक की ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर वसुंधरा के आधे से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट पर कैंची चलाना चाहते हैं. जबकि, वसुंधरा केवल 20 फीसदी विधायकों का टिकट काटने पर ही तैयार हो रही हैं.  यही वजह है कि शाह और  राजे के बीच एक बार फिर से अड़ा-अड़ी का खेल शुरू हो गया है. इसके बाद दोनों खेमे भी एक्टिव हो गए हैं. आपको बता दें कि रणकपुर और जयपुर में 200 सीटों पर हुई रायशुमारी के बाद करीब 90 सीटों पर सिंगल पैनल वसुंधरा राजे के निर्देशन में तैयार किया गया था. जिसे पिछली बैठक में वसुंधरा ने अमित  शाह के समक्ष रखा था. करीब 90 सीटों पर सिंगल पैनल देखने के बाद शाह ने इस पर विचार करने से मना कर दिया था. शाह के इनकार के बाद वसुंधरा राजे अपनी सूची के साथ बैठक से बाहर आ गई थी. इसके बाद शाह के निर्देश पर 22 नेताओं ने 33 जिलों का दौरा कर जमीनी फीडबैक एकत्रित करते हुए राज्य की कोर कमेटी के साथ उसे साझा किया. सूत्रों ने बताया जयपुर में दोबारा मशक्कत करने के बाद तैयार किए गए पैनल के साथ वसुंधरा एक बार फिर दिल्ली पहुंच गई हैं. यहां उनकी मुलाकात अमित शाह से होनी है. इस मुलाकात के दौरान वसुंधरा राजे की ओर से तैयार लिस्ट पर चर्चा होनी है. सभी की निगाहें शाह और वसुंधरा की बैठक पर ही टिकी हुई है. आपको बता दें कि राज्य में फैले एंटी इंकंबेसी को शाह मौजूदा विधायकों का टिकट काटकर कम करना चाहते हैं. उनकी जगह वे नए चेहरों को मैदान में उतारना चाहते हैं, जिससे जनता का समर्थन पार्टी को मिल सके. हालांकि, इस कदम के पीछे शाह की राजनीतिक मंशा वसुंधरा राजे को घेरने की भी है. वहीं, वसुंधरा राजे शाह की मंशा को भांपते हुए पहले ही कड़े तेवर कर लिए हैं. ऐसे में शाह और वसुंधरा के बीच एक बार फिर चुनावी मैदान में दो-दो हाथ होने के आसार बनते नजर आ रहे हैं. गौरतलब है कि इससे पहले प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर शाह और वसुंधरा आमने-सामने हो चुके हैं. 74 दिन तक  चले राजनीतिक द्वंद के बीच शाह को ही बीच का रास्ता निकालते हुए मामले को निपटाना पड़ा था.