शाह के इन 6 प्वाइंट से हिल गई पूरी भाजपा…तकरीबन सभी सीटों पर फिर से पैनल बनेंगे

नई दिल्ली/जयपुर .  चुनावी समर में उतरी भाजपा के भीतर टिकट की रार शुरू होने के बाद से सारे खेमे एक्टिव हो गए हैं. मापदंडों और टिकट बंटवारे को लेकर अधिपत्य की लड़ाई में शाह ने राजस्थान की कमेटी को 6 प्वाइंट देते हुए इस पर पैनल तैयार करने के निर्देश दिए हैं. इसके बाद से प्रदेश संगठन में करट दौड़ गया है.
शाह की दो-टूक के बाद सामने खड़ी हुई मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपना पक्ष रखते हुए तैयार की गई सूची पर डटी रहने के संकेत दे दिए हैं. सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में राजस्थान की पहली लिस्ट में करीब 90 सीटों पर सिंगल पैनल बनाने के चलते इस पर विचार करने से मना कर दिया है. साथ ही उन्होंने अपनी तरफ से कराए गए कई स्तर के सर्वे के आधार बने 6 प्वाइंटों को देते हुए इसी के आधार पर तकरीबन सभी सीटों पर पैनल बनाने के निर्देश दिए हैं. शाह के इन प्वाइंटो को देखने के साथ ही भाजपा के भीतर करंट दौड़ गया है. क्योंकि, शाह ने जिन प्वाइंटों को आगे रखा है. यदि उसके अनुसार पैनल बनते हैं तो कई विधायकों के साथ ही वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के टिकट कटने की आशंका प्रबल है. सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में हुई बैठक के दौरान वसुंधरा के नेतृत्व में तैयार किए गए लिस्ट में सिंगल पैनल देख शाह ने इस पर विचार करने से मना कर दिया है.
बताया जा रहा है कि उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में सिंगल पैनल पर कई तर्क रखते हुए आपत्ति जता दी है. बस इसी के साथ ही वसुंधरा राजे और अमित शाह के बीच  तनातनी बढ़ती जा रही है. आपको बता दें कि 2013 में टिकटों के बंटवारे का काम राजे ने ही किया था. उन्होंने उस चुनाव के दौरान भी अधिकतर सीटों पर सिंगल नाम रखा था. इस बार चुनावी रण में भी टिकट की कमान वसुंधरा अपने हाथ में ही रखना चाहती हैं. जबकि, शाह जमीनी स्तर पर कराए गए सर्वे और फीडबैक के आधार पर टिकट का वितरण करना चाहते हैं. जिसमें कई विधायकों और  मंत्रियों के टिकट पर कैंची चल सकती है.
शाह की ओर से दिए गए ये 6 प्वाइंट
  • पिछले पांच साल में हुए काम
  • हर सीट के जातिगत आंकड़े
  •  वर्तमान राजनीतिक और जातिगत स्थिति
  •  2013 के मतदान का रुख
  • सामाजिक समीकरण
  • जिसका टिकट काटोगे उसे खुश कैसे रखोगे?