वसुंधरा ने विधायकों की लिस्ट रखी…तो शाह ने सर्वे रिपोर्ट रख दी…वसुंधरा ने लिस्ट उठाई और चल दी

नई दिल्ली/जयपुर . राजस्थान चुनाव में कांग्रेस को सियासी मात देने की तैयारी कर रही भाजपा के भीतर फिर से चार महीने पहले वाली स्थिति बनती जा रही है. टिकट बंटवारे के वर्चस्व और मापदंडों को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच तलवार खिंच गई है. सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में बैठक के  दौरान वसुंधरा राजे की ओर से पहली लिस्ट रखने के साथ ही शाह ने हर सीट की जमीनी कलई खोल कर रख दी. इसके बाद वसुंधरा अपनी लिस्ट के साथ बैठक से बाहर आ गई.
शाह और वसुंधरा के बीच वर्चस्व की लड़ाई आज से नहीं पहले से चल रही है. लेकिन, इस बार चहेतों को टिकट दिलाने के लिए वसुंधरा की ओर से खेले गए पहले दांव पर ही शाह ने ‘वीटो’ लगा दिया है. शाह और वसुंधरा के आमने-सामने आने के साथ ही प्रदेश भाजपा दो खेमे में बंटती नजर आ रही है. 12 हजार कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की रायशुमारी के बाद पहली लिस्ट में करीब 90 सीटों पर सिंगल पैनल बनाया गया. पार्टी के उच्च सूत्र बताते हैं कि जयपुर में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर से आधे घंटे की मंत्रणा के बाद वसुंधरा दिल्ली पहुंच गई. दिल्ली में एक दिन पहले वसुंधरा अपने खासमखास मंत्री राजेंद्र राठौड़ और अशोक परनामी की मौजूदगी में शाह के सामने पहली लिस्ट रखी . पार्टी के खास सूत्रों का कहना है कि लिस्ट को देखने के बाद शाह ने हर सीट पर  2013 से अब तक आए राजनीतिक बदलाव पर चर्चा शुरू कर दी. इस दौरान शाह ने विस्तारकों, आरएसएस सहित अन्य जगह से आए ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर तर्क देना शुरू किया तो मौके पर मौजूद परनामी और राठौड़ की भी जमीन खिसक गई.
शाह की ओर से सीटवार पूछे गए कई प्रश्नों का जवाब नहीं दे पाए. सूत्रों ने बताया कि इसके बाद वसुंधरा राजे ने तर्क रखा कि पार्टी के साथ सालों से खड़े नेताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती. इसके बाद वे  सिंगल पैनल के नामों की लिस्ट को उठाकर परनामी और राठौड़ के साथस बैठक से बाहर आ गई. सूत्रों का कहना है कि बैठक के तुरंत बाद से जावड़ेकर और माथुर को शीर्ष नेतृत्व ने मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी दी है. इसलिए चुनाव प्रभारी जावड़ेकर के साथ देर रात कर बैठक का दौर चलता रहा, लेकिन वसुंधरा तैयार नहीं हुई हैं.
आपको बता दें कि राज्य में सत्ता के खिलाफ बने एंटी इंकंबेसी को कम करने के लिए शाह ने ग्राउंड जीरो रिपोर्ट के आधार कई विधायकों के टिकट पर कैंची चलाना चाहते हैं. बताया जा रहा है कि इस फॉर्मूले के जरिए वे भाजपा को फिर से सत्ता में लाना चाहते हैं. वहीं, इसके पीछे उनकी मंशा वसुंधरा की घेरेबंदी करने की है. क्योंकि, चार महीने पहले प्रदेशाध्यक्ष के मुद्दे पर भी वसुंधरा के साथ उनके विधायकों की फौज खड़ी हो गई थी. इस ताकत को देख शाह कदम पीछे हटा चुके हैँ. लेकिन, इस बार वे जीत के इस फॉर्मूले के साथ वसुंधरा को मात देना चाहते हैं. वहीं, वसुंधरा भी सियासी चालों को समझते हुए विधायकों के बचाने के लिए ढाल बनकर खड़ी हो गई है.

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