अमित शाह 16 सितंबर को फिर राजस्थान में, लेकिन वसुंधरा से नहीं होगी मुलाकात

जोधपुर। विधानसभा चुनाव को लेकर बिछी सियासी बिसात पर जहां भाजपा-कांग्रेस के बीच शह-मात का खेल जारी है। वहीं, दोनों पार्टियों के भीतर भी राजनीतिक द्वंद चल रहा है। हाल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के जयपुर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की गैर मौजूदगी से सियासत गरमा गई है। लेकिन, यही स्थिति शाह के अगले दौरे के दौरान भी बनती दिखाई दे रही है। 16 सितंबर को अमित शाह जोधपुर और पाली के दौरे में आ रहे हैं। लेकिन, इस सभा में भी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मौजूद नहीं रहेंगी। इससे पार्टी के भीतर की सियासत एक बार फिर चरम पर पहुंचती नजर आ रही है।
विधानसभा चुनाव को देखते हुए शाह 16 से जोधपुर संभाग के जिलों में भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे और कई सम्मेलनों को संबोधित भी करेंगे। लेकिन इस दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मौजूद नहीं होंगी। वे कोटा संभाग के दौरे में व्यस्त रहेंगी । मुख्यमंत्री 16 सितंबर को कोटा संभाग के बारां जिले के साथ ही करीब 7 अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर वहा जन सभाओं को संबोधित करेंगी। मुख्यमंत्री का यह मैराथन दौरा पहले ही बन चुका था । उसके बाद हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का भी राजस्थान दौरा तय हुआ, लेकिन दोनों ही नेताओं के दौरों की तारीख में स्थान अलग अलग रखा गया। इससे प्रदेश में सियासी चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे जहां शाह और राजे के बीच बढ़ती दूरियों के साथ ही राजनीतिक खटास के रूप में देख रहे हैं। वहीं, भाजपा नेता इसे आने वाले चुनाव के लिए अपनाई गई भाजपा की एक रणनीति का हिस्सा करार दे रहे हैं। आपको बता दें कि सीएम वसुंधरा की राजस्थान गौरव यात्रा का कार्यक्रम यात्रा के लिए बनी कमेटी और प्रदेश के नेताओं ने तय किए। इसमें संभागवार कार्यक्रम तय करने के दौरान सीएम की सहमति भी ली गई। वहीं, शाह के राजस्थान के दौरे को प्रदेश संगठन महामंत्री और केंद्रीय इकाई के निर्देश पर तय किए गए। इसमें शाह का दौरा इस तरह से रखा गया कि शाह और सीएम वसुंधरा राजे एक साथ एक मंच को साझा करते हुए नहीं दिखे। शाह और वसुंधरा राजे के एक मंच पर नहीं होने को लेकर सियासत गरमा गई है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के रिश्ते अभी तक पटरी पर नहीं आ सके हैं।  वहीं, इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता सियासी हमला कर रहे हैं। वे इसे भाजपा में केंद्रीय नेतृत्व व प्रदेश नेताओं के बीच चल रही सियासी उठापटक के रूप में प्रचारित कर रहे है। पीसीसी चीफ सचिन पायलट और अशोक गहलोत ने बयान में भी इस मुद्दे पर इशारा किया है।
हम एक हैं, इसलिए साथ सभा करना जरूरी नहीं-भाजपा
शाह और वसुंधरा राजे के एक साथ मंच साझा नहीं करने पर हो रही सियासत के बीच भाजपा नेताओं ने कहा कि भाजपा पूरी तरह से एक है। इसलिए इसे बताने की आवश्यकता नहीं है।  भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता पिंकेश पोरवाल ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा कि राजस्थान में अलग-अलग सभाएं करने का मकसद यही हैं कि सभी नेताओं की शक्ति का पूरा इस्तेमाल किया जा सके। चारों तरफ से पूरे राजस्थान को कवर किया जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा एक है और यह जताने के लिए जरूरी नहीं कि मुख्यमंत्री और अमित शाह हर सभा एक साथ करें । पोरवाल ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी प्रदेश में इसी तरह की रणनीति भाजपा ने अपनाई थी। उन्होंने कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए कहा जो लोग अलग-अलग होते हैं वही एकजुटता दिखाने के लिए मोटरसाइकिल और बस की एक सीट पर एक साथ बैठकर घूमते हैं जिस तरह सचिन पायलट और अशोक गहलोत कर रहे हैं।