जसवंतजी….प्रधानमंत्री बन सकते थे…वसुंधरा ने मिलिभगत कर उनका टिकट कटवाया और निकलवाया- गहलोत

नई दिल्ली . भाजपा को  चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से बड़ा झटका देते हुए मानवेंद्र सिंह ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने के बाद कांग्रेस मुख्यालय में हुई प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत ने बड़ा खुलासा  किया है. उन्होंने कहा कि पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह पीएम पद के कैंडिडेट थे. उन्हें जानबूझकर टार्गेट किया गया था. गहलोत के  इस बयान के बाद से राजस्थान की सियासत में उबाल आ गया है.
उन्होंने कहा कि पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह का टिकट किसी समीकरण की वजह से नहीं, बल्कि वसुंधरा राजे ने किसी से मिलीभगत करके कटवाया था . केवल उनका टिकट ही नहीं कटवाया गया था, बल्कि उन्हें हराने की दिशा में भी काम किया गया था. गहलोत ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सरकार में विदेशमंत्री से लेकर रक्षामंत्री का पद संभालने वाले जसवंत सिंह  खुद पीएम पद के दावेदार थे. इसलिए उन्हें 2014 के  लोकसभा चुनाव में टार्गेट किया गया. पार्टी को अपनी मेहनत से सींचने वाले जसवंत सिंह का टिकट राजनीतिक षडयंत्र के तहत काटा गया था. इस दौरान गहलोत ने मुख्यंत्री वसुंधरा राजे पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वसुंधरा को राजस्थान का नेतृत्व संभलवाने में पूर्व उपराष्ट्रपति रहे भैरोसिंह शेखावत और जसवंत सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण थी. गहलोत ने आरोप लगाया कि वसुंधरा ने भैरोसिंह शेखावत के साथ भी काफी बुरा व्यवहार किया था. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने एक बार भी शेखावत को कार्यक्रम तक में नहीं बुलाया. जबकि, शेखावत के बीमार होने के दौरान भी उनकी परवाह नहीं की. इसी प्रकार जसवंत सिंह के साथ भी किया गया. गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी का क्या हाल हुआ है। इसके बारे में सभी जानते हैं। आपको बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जसवंत सिंह अपने गृह जिले बाड़मेर-जैसलमेर सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन, इस चुनाव में उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया था. इससे आहत होकर जसवंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जिसमें वे हार गए थे. पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ने पर बाद में उन्हें  6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया गया था. इस घटना से नाराज होने के बाद साढ़े चार साल की राजनीतिक चुप्पी के बाद मानवेंद्र ने भाजपा को छोड़कर अब कांग्रेस का दामन थाम लिया है. उनके इस कदम को राजस्थान में भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. वहीं, मानवेंद्र के कांग्रेस में शामिल होने के बाद नए राजनीतिक समीकरण बनते नजर आ रहे हैं.

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