गहलोत ने मीडियाकर्मियों से कहा कैमरे बंद कर दीजिए…बहुत दिन हो गए…अब सुनिए…

हालांकि पूरी बातचीत कैमरे के आगे न होकर अनौपचारिक थी. गहलोत ने खुद ही कहा कि आज कैमरे के सामने बात नहीं करेंगे और न ही कोई बात ऑन रिकॉर्ड होगी..इसके बाद गहलोत ने बारी- बारी से सभी मुदृदों पर अपना पक्ष रखा. बातचीत में जब उनसे बार बार पूछा गया कि क्या वे अब केंद्र में ही रहेंगे या राजस्थान दुबारा आ रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि मैं दूर गया ही कब था. गहलोत ने कहा कि मैं राजस्थान में पार्टी की हर रैली में मौजूद रहता हूं, मुझे पद की चिंता नही हैं, मैं पूरी तरह से रिलेक्स हूं. बस पार्टी का विस्तार और विकास हो यही मेरी इच्छा है. मुख्यमंत्री कौन होगा इस सवाल पर गहलोत ने कहा कि पार्टी में इसको लेकर कोई लड़ाई नहीं है. इसका फैसला चुनाव के बाद ही तय होता आया है, आगे भी होगा. पहले भी कभी सीएम कैंडिडेट की घोषणा नहीं हुई. गहलोत से पूछा गया कि केंद्र व राज्य में राजनीति करने में क्या फर्क मानते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि राज्य में रहकर वे समग्र रूप से अपनी कलम चला सकते हैं. केद्र में लिमिटेशन रहती हैं. उन्होंने कि जब मुख्यमंत्री था तो जनहित के निर्णय स्वतंत्रता पूर्वक निर्णय लिए थे, मेरी पहली सरकार की गर्वेंस को आज भी सराहा जाता है.  वाजपेयीजी से लड़कर अकाल के समय 32 हजार मैटिक टन गेहूं लाया था. राज्य की राजनीति का अपना अलग ही महत्व है. क्या खुद चुनाव लडेंगे? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे अब पद की जरूरत नहीं है….फिर भी जो हाईकमान तय करेगा उसकी पालना होगी…उम्मीदवारों की सूची पर गहलोत ने कहा कि अगले दो से तीन दिन में सूची आएगी.