राजपूतों को मनाने के लिए भाजपा ने झोंका पांच ‘सिंहों’ को

जयपुर . चुनावी रण में दोबारा जीत का परचम लहराने के लिए जमीनी रणनीति बना रही भाजपा को मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस में जाने से बड़ा झटका लगा है. पहले से नाराज चल रहे राजपूत समाज पर पड़ने वाले मानवेंद्र के साइड इफेक्ट को कम करने और राजपूतों को अपनी तरफ जोड़े रखने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है. पार्टी ने राजपूत समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत करने और उन्हें समझाने के लिए अपने पांच से अधिक नेताओं को मैदान में उतारा है. साथ ही पार्टी के नेता राजपूत समाज के प्रतिनिधियों से मारवाड़ के बदले समीकरण पर भी चर्चा कर रहे हैं.
सूत्रों ने बताया कि चुनाव से पहले पार्टी राजपूत समाज को हर हाल में अपनी तरफ करना चाहती है. इसके लिए लंबे समय से प्रयास भी जारी हैं. खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे  ने मोर्चा संभालते हुए पूर्व में राजपूत मंत्रियों और विधायकों से बातचीत कर चुकी हैं. वहीं पार्टी ने राजपूत समाज को मनाने का जिम्मा अपने पांच बड़े राजपूत नेताओं को दिया है. जिनमें केंद्रीय राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़, वन एवं पर्यावरण मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, ऊर्जा राज्यमंत्री पुष्पेन्द्र सिंह, विधायक बाबू सिंह राठौड़ शामिल हैं. इसके साथ ही कई अन्य नेताओं को भी राजपूतों को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी है. सूत्रों ने बताया कि पार्टी ने सभी मंत्रियों को कहा है कि वे समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत करने के दौरान पार्टी की मंशा को बताएं. साथ ही यह भी बताएं कि पार्टी ने अब तक समात के लिए क्या-क्या किया है. वहीं, मानवेंद्र के कांग्रेस में जाने के बाद मारवाड़ सहित प्रदेश में बदल रहे समीकरण के बीच पार्टी के बड़े नेता पैनी नजर बनाए हुए हैं. वे राजपूत समाज के बीच जाकर यह भी बता रहे हैं कि भाजपा ने 2013 में 29 सीटों पर राजपूत उम्मीदवार उतारे. इनमें से 24 जीते . कांग्रेस ने 15 राजपूतों को टिकट दिए और दो ही जीत पाए. आपको बता दें कि मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस में जाने के बाद से राजपूतों के भी पार्टी से खिसकने का डर भाजपा में बना हुआ है. यही वजह है कि पार्टी अब इस मोर्चे पर पूरी तरह फोकस करते हुए मानवेंद्र के साथ राजपूत समाज को जाने से रोकने में जुट गई है. खास तौर पर मारवाड़ में पार्टी ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं.
गौरतलब है कि भाजपा के परंपरागत और भरोसेमंद वोटर माने जाने वाले राजपूतों ने इस बार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा  है . राजपूत समाज आनंदपाल, राजमहल प्रकरण, पद्मावत फिल्म विवाद में सरकार के रुख को लेकर नाराज है. उनकी नाराजगी गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेशाध्यक्ष नहीं बनाने के बाद और बढ़ गई है. इससे पहले राजपूत उपचुनाव में अपनी नाराजगी का असर दिखा चुके हैं. तब से लगातार सरकार के खिलाफ मिजाज तल्ख बनाए हुए हैं.