मानवेंद्र की ‘स्वाभिमान’ रैली के बाद बदले धोरों में राजनीतिक समीकरण, बढ़ी भाजपा की परेशानियां

जिले की दोनों विधानसभा सीटों पर राजपूत बाहुल्य होने के कारण स्वाभिमान रैली ने निश्चित तौर पर भाजपा की परेशानियां बढ़ा दी है. गत विधानसभा चुनावों में जैसलमेर और पोकरण सीटों पर राजपूत समाज ने भाजपा को चुना था, लेकिन अब प्रदेश सरकार के खिलाफ चल रहे माहौल के साथ-साथ अब स्वाभिमान रैली ने भाजपा को मुसीबत में डाल दिया है. जैसलमेर के दोनों विधानसभा सीटों पर भाजपा का मजबूत वोट बैंक राजपूत समाज होने के कारण भाजपा विधानसभा चुनावों में परेशानियों में डाल सकता है. गत विधानसभा चुनावों की दोनों विधानसभा सीटों पर राजपूत समाज ने एकतरफा भाजपा के लिए वोट किया था. जिसके आंकडे भी गवाह हैं. वहीं उसके बाद भाजपा से टिकट कटने के बाद निर्दलीय ताल ठोकने वाले मारवाड़ के कद्दावर नेता जसवंत सिंह को जैसलमेर से असीम स्नेह मिला था, हालांकि जसवंत सिंह जसोल बाडमेर-जैसलमेर से सांसद का चुनाव हार गए थे, लेकिन बावजूद उसके जैसलमेर विधानसभा से जसोल को करीबन 21 हजार मतों से बढ़त मिली थी. जैसलमेर विधानसभा में जसवंत सिंह जसोल का ननिहाल होने के साथ-साथ बड़ी तादाद में समर्थक हैं. वहीं उसके बाद भाजपा से नाराज जसवंत फेक्टर ने ग्राम पंचायत चुनावों में भाजपा का सूपड़ा साफ कर दिया था. जिले के जिला प्रमुख और तीनों पंचायत समितियों में कांग्रेस को शानदार जीत हासिल हुई थी.

शनिवार को पचपदरा में आयोजित स्वाभिमान रैली में बड़ी तादाद में जैसलमेर जिले से जसवंत समर्थक पहुंचे थे. वहीं अब राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं लगाई जा रही है कि मानवेन्द्रसिंह के इस फैसले के बाद यदि जसवंत फैक्टर ने एक बार फिर अपना रंग दिखाया तो आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा को नुकसान पहुंच सकता है.