कांग्रेस में मनमर्जी के ब्लॉक अध्यक्ष, अब बैठको में होने लगी ‘जूतमपैजार’

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से हाल में प्रदेश भर में बनाए गए कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्षों को लेकर अब गुटबाजी चरम पर पहुंच चुकी है। अधिकांश जिलों में जिलाध्यक्ष की ओर से जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर मनमर्जी से ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने से आम कांग्रेस कार्यकर्ता में रोष दिखाई देने लगा है।

-नागौर कांग्रेस में मनमर्जी के ब्लॉक अध्यक्ष
अब बैठको में होने लगी ‘जूतमपैजार’
-खींवसर कांग्रेस ‘ए’ ब्लॉक अध्यक्ष खींवसर की बजाए कुचेरा से बनाया, जिले में कई जगहों पर कांग्रेस में सिर फुटव्वल की नौबत, चुनावी सीजन में गुटबाजी पहुंची चरम पर, आलाकमान तक पहुंची शिकायत
-डॉ.के.आर.गोदारा-
जोधपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से हाल में प्रदेश भर में बनाए गए कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्षों को लेकर अब गुटबाजी चरम पर पहुंच चुकी है। अधिकांश जिलों में जिलाध्यक्ष की ओर से जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर मनमर्जी से ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने से आम कांग्रेस कार्यकर्ता में रोष दिखाई देने लगा है। इसके चलते चुनावी साल में कांग्रेस में गुटबाजी और धड़ेबंदी को लेकर फिर से राजनीतिक हलकों में चर्चांए जोरों पर हैं। नागौर जिले में मनमर्जी से बनाए गए कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष को लेकर अब जगह-जगह कांग्रेस की बैठकों में ‘जूतमपैजार’की स्थितियां बनने लगी है। उदाहर के तौर पर नागौर जिले के खींवसर कांग्रेस ब्लॉक ‘ए’ में खींवसर विधानसभा मुख्यालय के कार्यकर्ता को ब्लॉक अध्यक्ष बनाया जाना था, लेकिन जिलाध्यक्ष ने इसकी अनदेखी करते हुए मनमर्जी से कुचेरा के कार्यकर्ता को खींवसर ‘ए’ ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद कांग्रेस की राजनीति में सिर फुटव्वल की नौबत आ गई।
खुलकर सामने आई धड़ेबंदी
नागौर में मंगलवार को विभिन्न स्थानों पर ‘मेरा बूथ, मेरा गौरव’ की बैठकें आयोजित की गई, लेकिन मनमर्जी से ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाने का मामला इन बैठकों में छाया रहा। कई जगहों पर तो कार्यकर्ता आपस में एक दूसरे से भिड़ गए तो कहीं पर जूतमपैजार जैसी स्थितियां बन गई। कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं ने इसकी शिकायत आलाकमान से भी की है। कांग्रेस आलामान और प्रदेश नेतृत्व हर हाल में पार्टी को एकजुट रखकर चुनाव जीतने की जुगत में है, लेकिन खुलकर सामने आ रही धड़ेबंदी और नेताओं के मतभेद ने कांग्रेस नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी है। कांग्रेस में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे प्रदेश से लेकर जिला और विधानसभा स्तर पर नेताओं के गुटों में आपसी द्वंद शुरू हो गया है। मेरा बूथ,मेरा गौरव कार्यक्रम टिकटार्थी नेताओं के शक्ति प्रदर्शन का जरिया बन गए हैं। टिकट के दावेदार नेता पार्टी के कार्यक्रमों में भीड़ जुटाकर अपनी ताकत दिखा रहे हैं। पहले संगठन चुनावों में भी पद पाने के लिए कांग्रेस में खूब जोड़ तोड़ चली।
टिकटों के लिए जोर आजमाइश
इसके बाद जिलाध्यक्षों की मनमर्जी से ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाने के बाद नागौर जिले की कांग्रेस राजनीति में भूचाल आया हुआ है। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस में टिकटों की दौड़ शुरु हो गई है। मौजूदा दौर में कांग्रेस में हर सीट पर नेता टिकटों के लिए जोर आजमाइश करते दिख रहे हैं, लेकिन टिकटों की यह दौड़ ही फील्ड में नेताओं का संग्राम बनती दिख रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर ‘हवाई’नेताओं को ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाने से आम कांग्रेसी में रोष है। साथ ही इसका खामियाजा आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा। कांग्रेस के हलकों में पुराने समय से ही नेता यह कहते सुने जाते है कि कांग्रेस उम्मीदवार को दो मोर्चों पर लड़ना पड़ता है। एक लड़ाई टिकट लेने के बाद खुद की पार्टी के दूसरे गुट से और उसके बाद में विरोधी पार्टी के उम्मीदवार से।

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