बेहतर विधानसभा अध्यक्ष और मुख्य सचेतक के चुनाव में जुटी कांग्रेस

ऐसे में कांग्रेस के सामने अब नई चुनौती आ खड़ी हुई है और वो है मजबूत विपक्ष को विधानसभा में रोके रखना. इसके लिए कांग्रेस को जरूरत होगी विधानसभा में बेहतर फलोर मैनेजमेंट की. कांग्रेस को विधानसभा में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य सचेतक जैसे पदों पर ऐसे विधायकों को नियूक्त करना होगा जो विपक्ष को रोक सके.
हालांकि अध्यक्ष का पदा संवैधानिक होता है, जिन्हें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को ही समान अवसर देने होते हैं. लेकिन इसके बाद आने वाले पद काफी महत्तपूर्ण हो जाते हैं, जिसमें विधानसभा मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक ऐसे पद होतें है जो विधानसभा में विपक्ष को रोके रखने का काम करतें हैं. ऐसे में इन पदों पर जिन नेताओं की नियुक्ति होनी है वो कांग्रेस के लिए खासे अहम होने वाले हैं.
बात करें अध्यक्ष पद की तो इस पर सीपी जोशी का नाम सबसे आगे है. अगर सीपी जोशी ही इस पर के लिए मना कर दें तो बात अलग है. अन्यथा सीपी जोशी इस पद के लिए पहली पसंद होगी. अगर सीपी जोशी लोकसभा चुनाव लड़ने के चलते अगर इस पद को स्वीकार ना करें तो ऐसे में दीपेन्द्र सिंह शेखावत इस पद के लिए दूसरी पसंद कांग्रेस के हो सकते हैं. वैसे भी बीती कांग्रेस सरकार में शेखावत ने ही ये काम संभाला था और उस समय भी विधानसभा में विपक्ष की संख्या लगभग इतनी ही रही थी.
हालांकि जिस तरह से इस सीट पर भाजपा ने अपने कार्यकाल में कैलाश मेघवाल को दलित चेहरे के तौर पर बैठाया था. उसके बाद कांग्रेस के पास धोध से चुनाव जीतकर आए वरिष्ठ विधायक परसराम मोर दिया भी एक विकल्प बन गए हैं. इसके साथ ही अगर कांग्रेस जाट समाज को प्रतिनिधित्व विधानसभा में देना चाहेगी तो हेमाराम चौधरी भी इसका विकल्प हो सकते हैं. इसके बाद बात करें मुख्यसचेतक पद की तो इस पद पर ऐसे नेता को बैठाया जाएगा जो वरिष्ठ होने के साथ ही सदन के काम करने के तरीके को भी जानता हो. इस पद पर केवल दो ही नाम आगे आ रहे हैं. इनमें दो बार विधायक और एक बार सांसद रहे महेश जोशी तो दूसरी तीसरी बार विधायक और मंत्री रह चुके राजकुमार शर्मा हैं. दोनों ही नेता वाकपटूता में तेज में है और विधानसभा के काम को समझते हैं.

महेश जोशी पहले उपमुख्य सचेतक रह भी चूके हैं. हालांकि अगर सीपी जोशी को स्पीकर बनाते हैं तो ऐसे में ब्राहम्ण दूसरा नहीं होगा. इसी तरह से हेमाराम चौधरी को अगर स्पीकर पद नहीं दिया जा सका तो फिर उन्हें उपाध्यक्ष भी बनाया जा सकता है. वहीं उपमुख्यसचेतक पद पर कहा जा रहा कि किसी पहली बार बने विधायक को मौका दिया जा सकता है. हालांकि अगर पहली बार बने विधायकों को मौका यहां भी नहीं दिया जाता है तो फिर कामां से विधायक जाहीदा या फिर शकुंतला रावत को भी मौका दिया जा सकता है. अगर किसी महिला विधायक को इस पद मौका दिया जाता है शकुंतला रावत का दावा ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहा है.