कभी भरतपुर तो कभी नागौर…गहलोत-पायलट के पीछे-पीछे घूमते दावेदारों की बनी रेल

जयपुर : राजस्थान में आगामी 7 दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेता जीत के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं. इसके लिए दोनों पार्टियों में बेहतर और जिताऊ प्रत्याशियों का चुनाव करने में जुटे हैं. प्रत्याशी अपने इलाकों में मतदाताओं को रिझाने में लगे हैं. लेकिन आपको पढ़कर आश्चर्य होगा कि बीते चुनावों में बुरी तरह हारी कांग्रेस के ज्यादातर प्रत्याशी अपने क्षेत्र में जनता से नहीं मिल रहे हैं.
यह अजीब है लेकिन सच यही है. इसका कारण है कि राजस्थान कांग्रेस के ज्यादातर प्रत्याशी दिल्ली में टिकट की जुगाड में लगे हैं. प्रदेश कांग्रेस में टिकट के प्रत्याशी जनता के बीच में ना होकर दिल्ली से जयपुर के बीच में फंसे हुए हैं. क्योंकि टिकटों को लेकर दिल्ली में लगातार बैठकें चल रही हैं. इसके चलते ज्यादातर प्रत्याशियों ने वहीं डेरा डाल रखा है. प्रत्याशी संगठन महासचिव अशोक गहलोत और प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के दिल्ली स्थित आवास और एआईसीसी के दफ्तर में सुबह होते ही पहुंच जाते हैं. वे शाम को ही वहां से निकलते हैं. इसके चलते ये प्रत्याशी अपने विधानसभा क्षेत्रों में समय नहीं दे पा रहे हैं प्रदेश में ये हालात बीते दो महीने से पड़े हुए हैं.
केवल प्रत्याशी ही नहीं बड़े नेता भी राजस्थान आने में कतरा रहे हैं
प्रदेश कांग्रेस के नेता विधानसभा के प्रत्याशी तो दिल्ली के चक्कर काट ही रहे हैं. लेकिन हालात ये हो गए हैं कि राजस्थान के बड़े नेताओं ने भी राजस्थान से दूरी बना ली है. राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट भी टिकट मांगने वाले प्रत्याशियों के चक्कर में राजस्थान खासतौर पर जयपुर में रहने में कतरा रहे हैं. क्योंकि जयपुर में उनके आवास ओर प्रदेश कांग्रेस के मुख्यालय में जैसे ही पायलट के पहुंचने की सूचना मिलती है, नेता वहां पहुंच जाते हैं.
टिकटार्थीयों से परेशान होकर ही प्रदेश कांग्रेस को अपील जारी करनी पड़ी कि टिकट मांगने वाले नेता अकेले ही आएं. लेकिन इस अपील का भी असर टिकटार्थियों पर नहीं पड़ा और मजबूरी में पायलट को भी दिल्ली का रूख करना पड़ा. बीते सवा महीने में अगर राहुल गांधी के दौरे की तैयारियों को हटा दिया जाए तो पायलट मुश्किल से 15 दिन ही प्रदेश में चुनावी काम कर सके है. क्योंकि जहां भी पायलट जा रहे हैं उनके पीछे-पीछे टिकट मांगने वाले पहुंच जाते हैं. जिसके चलते पायलट कोई भी काम नहीं कर पा रहे हैं.

बीते सवा महीने में पायलट के राजस्थान में दौरे
20 सितंबर को सागवाडा राहुल गांधी के दौरे पर

  • 23 सितंबर को जयपुर दौरे पर
  • 24 सितंबर को उदयपुर सिरोही पाली जिले के दौर
  • 30 सितंबर को उदयपुर संभाग के दौरे पर
  • 2 अक्टूबर को कोटा दौरे पर रहे
  • 3 अक्टूबर को जयपुर में रहे
  • 4 अक्टूबर को रहे जयपुर में टवीटर पर लोगों से की बात
  • 5 अक्टूबर को आईटी सैल की बैठक
  • 7 अक्टूबर को भरतपुर के पहाडी में सभा की पायलट ने
  • 8 को भरतपुर गए राहुल की रैली की तैयारियां देखने
  • 9 और 10 को राहुल गांधी के दौरे पर धौलपुर, भरतपुर और बीकानेर रहे
  • 14 अक्टूबर को जयपुर आए कमेटियों की बैठक में भाग लिया 15 अक्टूबर को जयपुर रहे शाम को दिल्ली चले गए
  • 20 अक्टूबर को गहलोत के भाई के निधन के बाद दिल्ली गए वहां से सीधा दिल्ली
  • 21 अक्टूबर को जयपुर आये बूथ बचाओ कार्यक्रम में भाग लिया फिर दिल्ली
  • 23 अक्टूबर को जयपुर आये सीधे सीकर गये,वहां से कोटा झालावाड गये निरीक्षण करने, 24 और 25 को कोटा झालावाड़ और सीकर दौरे पर रहे राहुल के साथ दिल्ली गए
  • 26 अक्टूबर को आए सीबीआई का घेराव और तुरंत दिल्ली चले गए