जाट-विश्नोईयों को साधने में लगी कांग्रेस, लुणी और ओसियां सीट पर फंसा पेच

जयपुर। राजस्थान के चुनावी रण में बढ़ती जा रही सियासी गर्माहट के बीच कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर जोर-आजमाइश जारी है। पार्टी दावेदारों की भीड़ के बीच जहां जीताऊ प्रत्याशियों के चयन को लेकर मशक्कत कर रही है। वहीं पार्टी से दूर छिटक गए जाट और विश्नोई समाज को फिर से साधने की कोशिशें तेज हो गई है। यही वजह है कि दिल्ली में आलाकमान के समक्ष कांग्रेस के नेताओं का एक धड़ा जहां लुणी से पूर्व विधायक मलखानसिंह के पुत्र महेन्द्र को तथा ओसियां से पूर्व मंत्री महीपाल मदेरणा की पुत्री दिव्या मदेरणा को टिकट देने की पैरवी कर रहा है वहीं दूसरा धड़ा इसका विरोध कर रहा है। यही कारण है कि इन दोनों सीटों पर अभी तक आलाकमान भी किसी तरह का निर्णय लेने में हिचकिचा रहे हैं।

वोटरों का फिर से जुड़ाव
सूत्रों के अनुसार राजस्थान की सभी 200 विधानसभा सीटों पर टिकट को लेकर चल रहे मंथन के बीच मारवाड़ में लुणी और ओसियां सीट पर पेच फंसा हुआ है। कांग्रेस नेताओं के एक धड़े का कहना है कि गत विधानसभा चुनाव में भंवरी प्रकरण के बाद कांग्रेस से दूर हो चुके जाट और विश्नोई समाज को फिर से कांग्रेस से जोड़ने के लिए लुणी से मलखान के पुत्र महेन्द्र को और ओसियां से महीपाल की पुत्री दिव्या को टिकट दिया जाए ताकि दोनों ही समाज के वोटरों का जुड़ाव फिर से कांग्रेस से हो सके। साथ ही इसका असर मारवाड़ के साथ ही पूरे राजस्थान में दिखाई देगा जो कांग्रेस के पक्ष में रहेगा। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस इस कदम के जरिए जाट और विश्नोई समाज में कांग्रेस के प्रति बने अविश्वास के भाव को खत्म करना चाहती है ताकि उनका परम्परागत वोट बैंक फिर से उनके साथ जुड़ सके।

नए चेहरे को उम्मीदवार
जबकि दूसरे धड़े के कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि ऐसा होने पर एक बार फिर भंवरी प्रकरण चुनाव में उछलेगा और इससे पार्टी को गत चुनाव की तरह इस बार भी राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। इन नेताओं का कहना है कि इस बार दोनों ही सीटों से किसी नए चेहरे को उम्मीदवार बनाया जाए ताकि भंवरी प्रकरण की आंच से कांग्रेस बच सके और राजस्थान में कांग्रेस के पक्ष में जो माहौल बना हुआ है वे बरकरार रह सके। गत चुनाव में कांग्रेस ने जेल में बंद पूर्व विधायक मलखान विश्नोई की 80 वर्षीय मां को और महीपाल मदेरणा की पत्नी लीला मदेरणा को टिकट दिया था। लेकिन दोनों ही सीटों पर कांग्रेस को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। साथ ही कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करना का भी आरोप लगा था जिससे पार्टी को राजनीतिक रूप से भी काफी नुकसान उठाना पड़ा।