बड़े अंतर से चुनाव हारने वाले नेताओं को टिकिट नहीं देगी प्रदेश कांग्रेस

राजस्थान में विधानसभा चुनाव आठ माह बाद है मगर सत्ता में आने को लालायत कांग्रेस में टिकिटों को लेकर अभी से मारामारी शुरू हो गई है। एआईसीसी टिकिट वितरण में एंटनी कमेटी की सिफारिशे लागू करेगी जिसमें बडेÞ अंतर से चुनाव हारने वाले नेताओं को टिकिट कटना तय है।

-30 हजार वोटों से चुनाव हारे कांग्रेसियों को इस बार टिकिट नहीं!
-एआईसीसी लागू कर सकती है एंटनी कमेटी की सिफारिशे
-टिकिट हासिल करने के लिए कांग्रेसी ही कटवा रहे कांग्रेसी का टिकिट
जयपुर। विधानसभा चुनाव नजदीक आते देखकर कांग्रेस में कईं नेता और दावेदार भारी अंतर से चुनाव हारने वाले नेताओं को  टिकट नहीं देने की वकालात करने लगे हैं। एंटनी कमेटी की सिफारिशों को लागू करने का हवाला देते हुए 30 हजार वोटों से ज्यादा हारने वाले को अब मौका नहीं देने की खुलकर पैरवी करना भी शुरू कर दिया है। अगर फामूर्ला लागू होता है तो फिर करीब 50 नेताओं की टिकट पर संकट मंडरा जाएगा। करारी हार झेल चुके नेताओं में सालेह मोहम्मद,अमीन खान,गंगाजल मील,भगवना सहाय सैनी,अर्चना शर्मा,संजय बाफना,दुर्रु मियां,रामविलास चौधरी,बीना काक और दिलील चौधरी जैसे प्रमुख नेताओं के नाम है।
राजस्थान विधानसभा चुनाव में अब महज 6 माह का समय शेष बचा है। लिहाजा हर कोई अब टिकट पाने की तिकड़म में जुट गया है। इसके लिए दावेदार जयपुर से लेकर दिल्ली तक नेताओं के धोक लगानें जुट गए हैं।  इस बीच कई नेताओं ने टिकट वितरण में नए फामूर्लों का इस्तेमाल करने की डिमांड पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से करना शुरू कर दिया। जिससे की उनका फामूर्ले की जद में आने से टिकट कट जाए और खुद का नंबर आ जए। इसलिए इन दिनों कांग्रेस गलियारों में एंटनी कमेटी की कईं सिफारिशों को खोद खोदकर निकाला जा रहा है। जिसमें एक सिफारिश थी 20 हजार मतों से ज्यादा हारे नेताओं को टिकट नहीं देने की, लेकिन यह सिफारिश लागू होना बेहद मुश्किल है क्योंकि पिछली बार मोदी लहर में कईं दिग्गज धराशायी हो गए थे। ऐसे में सूत्रों की माने तो पार्टी आलाकमान 20 हजार की जगह 30 हजार वोटों से ज्यादा हारने वाले नेताओं को टिकट नहीं देने का प्रयोग इस बार कर सकती है।
राहुल गांधी इसको लेकर कईं बैठकों में गंभीरता से मंथन भी कर चुके हैं। करीब 50 नेता 30 हजार सेज्यादा वोटों से पिछली बार चुनाव हारे थे। बड़े अंतर से पिछला चुनाव हारने वाले, मदनलाल,खानपुर से संजय गुर्जर,अलवर शहर से नरेन्द्र शर्मा,बीकानेर पूर्व से गोपाल गहलोत और भादरा से जयदीप डूडी को भी 30 हजार से ज्यादा हार का मुंह देखना पड़ा था। ये नेता  जहां से चुनाव लड़े थे वहां से अन्य दावेदार इनके भारी अंतर से हारने को अब अपनी टिकट की दावेदारी में हथियार की तरह पेश कर रहे हैं। हालांकि भारी मतों से हारे नेता दबी जुबान और बंद कमरों में पिछली बार मोदी लहर चलने और कईं दिग्गजों के चुनाव हारने जैसी बचाव में दुहाई पेश करते हुए  नेतृत्व को मनाने में जुटा हुआ है। लेकिन फामूर्ला लागू करने की पैरवी कर रहे नेता कह रहे हैं कि दो से ढाई लाख मतदाता वाली सीटों पर ये 30 हजार से हार गए तो फिर दोबारा मौका देने पर कैसे तीर मार लेंगे।
हालांकि चुनावी मैदान में तत्काल क्या समीकरण और स्थितियां बनती है यह मतदान से दस दिन पहले तक निर्भर करता है। लेकिन विरोधियों और दावेदारों की इस बात में भी दम है कि वो 30 हजार के अंतर को कैसे पाट पाएगा। क्योंकि इतनी बड़ी हार से यह साबित हो चुका है कि जनता उसे कतईं पसंद नहीं करती।
बॉक्स-यह दिग्गज बड़े अंतर से हारे थे चुनाव
नाम                                               विधानसभा क्षेत्र
दुर्रु मियां                                            तिजारा                               40,000
बीना काक                                          सुमेरपुर                               42,643
दिलीप चौधरी                                       जैतारण                               34,874
ओम जोशी                                          फलौदी                                34,171
गंगाजल मील                                       सूरतगढ़                              32,593
रमेश खंडेलवाल                                     नीमकाथाना                         34,202
भगवानसहाय सैनी                                  चौमूं                                 44,473
शालेह मोहम्मद                                     पोकरण                              34,444
अमीन खां                                           शिव                                  30,913
गंगाबेन गरासिया                                   पिंडवाड़ा माउंटआबू                  30,855
रतन देवासी                                         रानीवाड़ा                             32,652
कोटा साउथ                                         पंकज मेहता                          49,439
छबड़ा                                                करण सिंह                           62, 000
झालरापाटन                                         मीनाक्षी चंद्रावत                     60,896
मालवीय नगर                                       अर्चना शर्मा                         48,718
संजय बाफना                                        सांगानेर                             62,832
विक्रम सिंह                                          विधाधर नगर                       37,913
पुष्कर                                                नसीम अख्तर                       41,290