गहलोत दिल्ली छोड़ेंगे तो….कौन बनेगा राहुल का सारथी

जयपुर .  राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने के बाद इसकी कमान संभालने वाले सीएम अशोक गहलोत अब दिल्ली छोड़ देंगे. गहलोत के सीएम बनने के बाद पार्टी के भीतर नए राष्ट्रीय महासचिव की तलाश शुरू हो गई है. साथ ही ये सवाल भी बड़ा हो गया है पार्टी हाईकमान राहुल गांधी का सारथी अब कौन बनेगा. इस पद के लिए सबसे पहला नाम मुकुल वासनिक का सामने आ रहा है. हालांकि, कई और भी  नेताओं का  नाम पर चर्चा शुरू हो गई है.
पार्टी की कमान राहुल गांधी के हाथ में जाने के बाद उन्होंने संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव किया था. इस बदलाव के दौरान ही राहुल ने गहलोत को संगठन के राष्ट्रीय महासचिव का पद सौंपा था. इस पद पर रहते हुए गहलोत को अभी पूरा एक साल भी नहीं हुआ है, लेकिन, अपने रणनीति कौशल के बदौलत वे राहुल के बेहद करीबी नेताओं में गिने जाते हैं. संगठन महासचिव के दौरान  गुजरात से लेकर कर्नाटक के चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन में उभार लाने वाले गहलोत का राजनीतिक कद भी लगातार बढ़ता रहा. वे राहुल गांधी के चाणक्य के रूप में पहचाने जाने लगे.  दरअसल, गहलोत ने पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव का पद उस समय संभाला था, पार्टी की स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई थी. कई राज्यों के चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी को खड़ी करने की जिम्मेदारी राहुल ने गहलोत को दी थी. इस जिम्मेदारी के बीच गहलोत ने सबसे पहले गुजरात के चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन को बेहतर करते हुए पूरी पार्टी के भीतर करंट पैदा कर दिया.
जबकि, कर्नाटक में भाजपा के जबड़े से सत्ता को छीनकर कांग्रेस की झोली में डालने वाले गहलोत की रणनीतिक कौशल ने उनके कद को काफी बढ़ा दिया. जिसके बाद उनकी हैसियत ना केवल पद बल्कि ताकत के लिहाज से भी पार्टी के भीतर नंबर 2 की हो गई. गहलोत के इस पद पर रहते हुए तीन बड़े राज्यों राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में पार्टी को मिली जीत ने उत्साह से भर दिया. राजस्थान में मिली जीत के बाद  सीएम की कमान संभाल चुके गहलोत अब राष्ट्रीय महासचिव के पद से विदाई ले रहे हैं. उनकी इस विदाई के साथ ही नए राष्ट्रीय महासचिव की तलाश भी शुरू हो गई है. इस लिहाज से पहला नाम मुकुल वासनिक का सामने आ रहा है.   फिलहाल मुकुल वासनिक के पास पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) के प्रभार के साथ-साथ तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी की जिम्मेदारी है. वह लंबे समय से पार्टी महासचिव हैं और विभिन्न प्रदेशों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. ऐसे में उन्हें आगामी आम चुनाव से पहले संगठन की अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है.
वासनिक को गांधीस परिवार के करीबियों में गिना जाता है. वे लंबे समय से केंद्रीय राजनीति में सक्रिय भी रहे हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि वासनिक के नाम पर मुहर लग सकती है. हालांकि, उनके अलाव इस पद के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद सहित करीब आधा दर्जन नेताओं के नाम पर भी सियासी गलियारों में चर्चा बरकरार है. आपको बता दें कि कांग्रेस में अध्यक्ष के बाद राष्ट्रीय महासचिव के पद को काफी अहम और ताकतवर माना जाता है.  सामने लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी भी जल्द से जल्द इस पद को भरना चाहती है. जानकारों का कहना है कि अब सभी की निगाह इस तरफ  टिक गई है कि गहलोत की जगह पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव कौन बनेगा, जिसके जरिए राहुल  देश की सियासत को साधेंगे.