जैसलमेर : पुरानों के साथ नए खिलाड़ी भी भाग्य आजमाने को आतुर

जैसलमेर। प्रदेश में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने के साथ ही दोनों प्रमुख दल कांग्रेस व भाजपा के संभावित दावेदारों ने अपने अपने घोड़े दौड़ाने शुरू कर दिए हैं। भारत पाक सीमा पर बसे सीमावर्ती जैसलमेर जिले की जैसलमेर विधानसभा सीट महत्वपूर्ण है। क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़े जिले की जैसलमेर विधानसभा सीट पर भाजपा व कांग्रेस दोनों दलों में राजनीति के पुराने मंजे हुए खिलाड़ियों के साथ ही नए खिलाड़ी भी भाग्य आजमाने को आतुर है तो दूसरी ओर प्रदेश स्तर के प्रमुख नेता स्थानीय कार्यकर्ताओं से सम्पर्क में हैं और पूरी नजर रखे हुए हैं।

भाजपा की परम्परागत सीट
जैसलमेर विधानसभा सीट भाजपा की परम्परागत सीट मानी जाती है। राजपूत बाहुल्य मतदाताओं वाली सीट होने के कारण इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी को जीतने के लिए खास मशक्कत नहीं करनी पड़ती। हालांकि कुछेक बार कांग्रेस के प्रत्याशी भी इस सीट पर विजयी हुए लेकिन अधिकांश बार कब्जा भाजपा का ही रहा। इस बार के चुनाव में जहां भाजपा को दो बार विधायक रहने व गत बार प्रदेश में सरकार रहने से एंटी इनकंबेंसी का सामना करना पड़ सकता है वहीं पूर्व वित्त मंत्री जसवंतसिंह जसोल के पुत्र व पूर्व सांसद व शिव विधायक मानवेन्द्रसिंह के कांग्रेस में जाने से नुकसान उठाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में पार्टी प्रत्याशी के लिए इस बार चुनाव आसान नहीं रहेगा। तो दूसरी ओर कांग्रेस में इस बार प्रत्याशी कौन रहेगा इसका भी परिणाम पर असर पड़ेगा।

मिथक को तोड़ा था
जैसलमेर विधानसभा सीट के लिए दोनों प्रमुख दल भाजपा व कांग्रेस के गत चुनाव में प्रत्याशी रहे भाजपा विधायक छोटूसिंह भाटी व कांग्रेस के पराजित प्रत्याशी रुपाराम धणदे फिर से टिकट लेने वालों की सूची में सक्रिय है। विधायक छोटूसिंह भाटी ने गत विधानसभा चुनावों में दूसरी बार उसी पार्टी से विधायक बन कर उस मिथक को तोड़ा था कि किसी पार्टी का प्रत्याशी दूसरी बार जैसलमेर से चुनाव नहीं जीता। हालांकि भाटी इस बार भी टिकट लेकर हैट ट्रिक के प्रयास में है। भाजपा के ही पूर्व विधायक व किसान नेता सांगसिंह भाटी भी इस बार टिकट की दौड़ में है तो विक्रमसिंह नाचना, शिव के पूर्व विधायक डॉ. जालमसिंह रावलोत, सुजानसिंह हड्डा भी टिकट लेने के लिए अपने प्रयास कर रहे हैं।

दावेदारों की कमी नहीं
ऐसा समझा जाता है कि जिस प्रत्याशी पर संघ का हाथ रहेगा उसका दावा अधिक मजबूत रहेगा। क्योंकि अक्सर जैसलमेर की टिकट में संघ की राय को महत्व दिया जाता है। उधर कांग्रेस की ओर से जलदाय विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर रुपाराम धणदे गत चुनाव में मोदी लहर के बावजूद करीब ढाई हजार मतों से ही चुनाव हारे थे। ऐसे में उनका दावा है कि वे सबसे अधिक मजबूत कांग्रेस प्रत्याशी है। वैसे पूर्व में चुनाव हार चुकी कांग्रेस महासचिव सुनीता भाटी भी पूरे प्रयास कर रही है। पूर्व राजपरिवार की सदस्या पूर्व महारानी रासेश्वरी राज्यलक्ष्मी भी इस बार सक्रिय राजनीति में उतरने का ऐलान कर चुकी है और वे भी कांग्रेस से टिकट लेने वालों की दौड़ में शामिल है। ऐसे में कांग्रेस व भाजपा दोनों प्रमुख दलों में टिकट दावेदारों की कमी नहीं है।