जय जयनारायण व्यास विश्वविद्वालय की राजनीति राजपूतों ओर जाटों के इर्द गिर्द

जोधपुर। छात्र राजनीति जाट और राजपूतों के इर्द गिर्द घूमती है. जय जयनारायण व्यास विश्वविद्वालय के छात्रसंघ चुनाव में एक बार फिर जाट उम्मीदवार ने बाजी मारी है. अब तक के चुनावों में महज एक बार ही किसी अन्य जाति के प्रत्याशी ने जीत हासिल की है. इस बार मुकाबला बेहद टक्कर का रहा. एनएसयूआई के सुनील चौधरी ने abvp के मूल सिंह को कांटे की टक्कर में 9 वोटों से हराया को हराया. हालांकि इससे पहले 2015,16,17 में लगातार इस पद पर जीत कर एबीवीपी ने हैट्रिक बनाई थी. लेकिन 2018 में पहली बार किसी महिला प्रत्याशी के रूप में एनएसयूआई की कांता ग्वाला ने पूरा पैनल जीत कर एबीवीपी के लगातार जीत के सिलसिले को रोका था. लेकिन इस बार एनएसयूआई को केवल अध्य्क्ष के अलावा सयुंक्त महासचिव पद मिला है. महासचिव पद पर एनएसयूआई से बागी हुई बबलू सोलंकी ने एबीवीपी के बैनर से चुनाव लड कर जीत हासिल की है. जबकि वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दिनेश पंचारिया जीते हैं. जेएनवीयू में कि 1990 से 2018 तक यहां कुल 24 बार चुनाव हुए है. इनमें 1997 में एक बार ब्राहृण उम्मीदवार अरूणआचार्य ने चुनाव जीता था. बाकी 23 में 13 राजपूत व 10 बार जाट चुनाव जीते हैं. यूं कहें तो पूरी राजनीति राजपूतों ओर जाटों के इर्द गिर्द ही घूमती है. इनके अलावा किसी भी जाति के उम्मीदवार यहां जीत दर्ज नहीं करवा पाए है. जबकि यहां जाट, राजपूत, विश्नोई, ब्राह्मण, एससी एसटी के लगभग बराबर संख्या में मत रहते है.
लगातार दूसरी बार abvp को मात
परिणाम के साथ ही ABVP संगठन के लचर चयन प्रक्रिया की पोल खुल गई, क्योंकि अध्यक्ष के अलावा उसे जीत सिर्फ महासचिव पद पर मिली है. वो भी एनएसयूआई के बागी उम्मीदवार को गले लगाने से, उपाध्यक्ष पद पर जितने वाले निर्दलीय उम्मीदवार दिनेश ने खुला कहा की उसने संगठन मंत्री मांगीलाल से टिकट की मिन्नतें की लेकिन नहीं माने. जबकि से संगठन के प्रत्याशी का नामांकन खारिज हुआ था.

विधायक, सांसद  व मुख्यमंत्री दिए जेएनवीयू ने

जयनारायण व्यास विश्वविद्वालय में छात्रसंघ से राजनीति करने वाले कई छात्र नेता आज प्रदेश व देश की राजनीति में सक्रिय है. 1996 में यहां अध्यक्ष बनने के बाद वर्तमान विधायक बाबूसिंह राठौड तीन बार विधायक बन चुके हैं. जबकि 1993 में अध्यक्ष बने गजेंद्र सिंह शेखावत वर्तमान में केंद्र में मंत्री है. 1990 में अध्यक्ष बने जालमसिंह रावलोत भी भाजपा से एक बार विधायक बन चुके हैं. अभी भी प्रदेश की राजनीति में सक्रिय है. 1992 में अध्यक्ष बने हरीश चौधरी बाडमेर से सांसद बन चुके हैं. पूर्व मुख्यमंत्री यहां चुनाव आर चुके हैं. चंद्रराजसिंघवी व जुगल काबरा यहां चुनाव जीतने के बाद विधायक बने थे. लेकिन बाबूसिंह राठौड के बाद 22 सालों में कोई भी राजनीति की सीढियां नहीं चढ़ सका.

अपेक्स परिणाम-2018

अध्यक्ष : विजेता एन यूएसआई के सुनील चौधरी ने एबीवीपी के मूलसिंह को 9 वोटों से हराया, सुनील को 4170 व मूलसिंह को 4161 वोट मिले.
महासचिव : विजेता एबीवीपी के बबलू सोलंकी ने एनएसयूआई के सोमेश सोलंकी को 828 मतों से हराया, बबलू को 3816 व सोमेश को 2988 वोट मिले.
वरिष्ठ उपाध्यक्ष : विजेता निर्दलीय दिनेश पंचारिया ने प्रवीण कुमार को 2551 वोटों से हराया, दिनेश को 4059 व प्रवीण कुमार को 1508 वोट मिले.

संयुक्त महासचिव : विजेता एनएसयूआई के मनीष विश्नोई ने विकास को 2028 वोटों से हराया, मनीष को 4304 व विकास को 2276 वोट मिले.
24 चुनावों का लेखा जोखा
1989-जालमसिंह रावलोत, राजपूत- एबीवीपी
1990-कुलवंतसिंह राठौड, राजपूत- छात्र संघर्ष समिति
1991-हरीश चौधरी, जाट- एनएसयूआई
1992-गजेंद्र सिंह शेखावत, राजपूत- एबीवीपी
1993-शिवराजसिंह राठौड, राजूपत- एबीवीवी
1994- रामप्रकाश चौधरी, जाट, एबीवीपी
1995-बाबूसिंह राठौड, राजपूत, छात्र संघर्ष समिति
1996- अरूण आचार्य, ब्राह्मण- एबीवीपी
1997- विनोद भगासरा, जाट- एनएसयूआई
1998- गजेंद्र सिंह राठौड, राजपूत- छात्र संघर्ष समिति
1999 – ओमप्रकाश खदाव, जाट- एसएफआई
2000 – कैलाश बेडा, जाट- एबीवीपी
2001 – जितेंद्र सिंह राठौड, राजपूत- एबीवीपी
2002 – ईश्वरसिंह बालावत, राजपूत- एबीवीपी
2003- जयनारायण पूनिया, जाट- एसएफआई
चुनावों पर रोक लगी
2010 – अरविंदचौधरी, जाट- एनएसयूआई
2011 – प्रदीपसिंह राठौड, राजपूत- एनएसयूआई
2012 – रविंद्र सिंह राणावत, राजपूत- एनएसयूआई
2013 – महेंद्र जाखड जाट- एसएफआई
2014 – भोमसिंह राठौड राजपूत- एबीवीपी
2015 – आनंदसिंह राठौड राजपूत- एबीवीपी
2016 – कुनालसिंह , राजपूत- एबीवीपी
2017 – कांता ग्वाला, जाट- एनएसयूआई
2018 – सुनील चौधरी, जाट- एनएसयूआई