अशोक गहलोत के लिए उनके अपने घर की 2 सीटें बन गई चुनौती

जोधपुर . भाजपा को चुनावी अखाड़े में धोबी पछाड़ मारकर चित करते हुए कांग्रेस को सत्ता की जादुई कुर्सी तक पहुंचाने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत मैदान में डटे हैं. वहीं, उनके खुद के ‘घर’ में भाजपा दो बार से भारी पड़ती जा रही है. गहलोत की अपने गढ़ में जमीनी पकड़ होने के बाद यहां की दो सीटों पर लगातार भाजपा ही काबिज होती आ रही है. वहीं, पिछले चुनाव में भाजपा ने जोधपुर जिले में 10 में से 9 सीटें जीतकर गहलोत का किला ही ढहा दिया था. यहां से केवल गहलोत ही सरदारपुरा विधानसभा सीट से जीत दर्ज करा पाए थे. गहलोत के गढ़ में जोधपुर शहर और सूरसागर विधानसभा सीट पर भाजपा ही दो बार से लगातार विजयी हो रही है. जोधपुर शहर से भाजपा के कैलाश भंसाली और सूरसागर सीट से भाजपा के ही सूर्यकांत व्यास विजयी हो रहे हैं. 2008 में कांग्रेस की सरकार बनने के दौरान भी गहलोत इन दोनों सीटों पर पार्टी को जीत नहीं दिला सके थे. ऐसे में इस बार राज्य में सरकार बनाने में जुटे गहलोत के सामने दोनों सीटें भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. गहलोत के गृह जिले में लाख जतन के बाद भी जोधपुर शहर और सूरसागर की सीट वे जिता नहीं पाए. दोनों सीटों पर लगातार मिल रही हार के चलते सियासी हलचल अभी से बढ़ी हुई है. वहीं, गहलोत इस बार दोनों सीटों के जमीनी समीकरण पर शुरुआत से नजर बनाए हुए हैं. साथ ही वे पार्टी कार्यकर्ताओं से भी दोनों सीटों को हर हाल में जीतने की बात आंतरिक रूप से कर रहे हैं. दरअसल, दोनों सीटों पर इस बार वे ऐसे प्रत्याशी को उतारने में जुटे हैं, जो कि जीत हासिल करते हुए लगातार हार के दाग से मुक्ति दिला सकें.