चुनाव से ठीक पहले वसुंधरा ने मतदाताओं की जेब में डाले 905 रुपए

-जिओ भामाशाह योजना में लाखों परिवारों ने लिया जिओ का फोन 
-9 सितम्बर 2018 तक कुल भामाशाह परिवार – एक करोड़ 64 लाख 85 हजार 978
सुनीता माहेश्वरी
उदयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनाव सामने हैं। नए नेताओं ने टिकट के लिए जनता के बीच में आना-जाना शुरू कर दिया है। कुछेक सर्वे एजेंसियों के आगामी सरकार को लेकर सर्वे के परिणाम भी सामने आए हैं जिसमें मौजूदा भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार को कमजोर भी करार दिया गया है। लेकिन, इन्हीं सब के बीच राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मास्टर स्ट्रोक खेला है जो अभी तो नहीं, लेकिन चुनावी दंगल में रंग जरूर दिखाएगा, यह माना जा सकता है। यह मास्टर स्ट्रोक वसुंधरा सरकार ने जिओ भामाशाह योजना के रूप में खेला है।
कांग्रेस सहित सम्पूर्ण विपक्ष केन्द्र से लेकर राज्यों में भाजपा सरकारों को घेरने में कोई कमी नहीं छोड़ रहा है। पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों को लेकर आम आदमी को जागरूक करने और उसके वोट को अपनी झोली में तब्दील करने के प्रयास जोरों पर है। और, इसी माहौल के बीच राजस्थान में वसुंधरा राजे ने यहां की बहुचर्चित भामाशाह योजना को जिओ फोन से जोड़ते हुए ‘जिओ भामाशाह योजना’ कर चुनाव से ऐन पहले मतदाताओं को रिझाने का दांव खेल दिया है। राजस्थान में छोटे से विपक्ष ने इसका विरोध भी किया है और चुनाव आयोग तक इसकी शिकायत करने की भी बात कही है, लेकिन आचार संहिता से पहले बांट दी गई यह सौगात किस नियम के कितने घेरे में आएगी, यह कहना मुश्किल है।
वसुंधरा सरकार की इस योजना में भामाशाह कार्ड धारक परिवारों के लिए जिओ फोन की सौगात दी गई है, वह भी महज 95 रुपए में। लेकिन, दूसरी तरह से देखा जाए तो इस योजना के बहाने मुख्यमंत्री वसुंधरा ने फोन लेने वाले परिवारों की जेब में 905 रुपए चुपके से पहुंचा दिए हैं। योजना के तहत भामाशाह कार्ड धारक 1095 रुपए देकर जिओ का मोबाइल सिम सहित ले सकता है। इसके साथ 500 रुपए का रिचार्ज नि:शुल्क है। इतना ही नहीं, जैसे ही भामाशाह कार्ड धारक फोन में भामाशाह एप डाउनलोड करके अपने आईडी-पासवर्ड से उसमें लॉगिन करता है, उसी समय उसके खाते में 500 रुपए सब्सिडी के रूप में पहुंच रहे हैं।
यह बात अलग है कि 5 रुपए छुट्टे नहीं होने के कारण लोग पूरे 1100 रुपए दे रहे हैं और उन्हें इसके बदले में 500 रुपए नकद और 500 रुपए का रिचार्ज यानी कुल 1000 रुपए मिल रहे हैं। इनमें से 100 रुपए काट दिए जाएं तो 900 रुपए का लाभ भामाशाह परिवार को हो रहा है। यानी 100 के बदले 900 रुपए।
चूंकि भामाशाह परिवार की मुखिया महिला है, ऐसे में मोबाइल लेने के लिए भी महिलाओं की भीड़ है। हालांकि, परिवार का कोई भी बालिग सदस्य जिसका नाम भामाशाह कार्ड में दर्ज है, वह भी अपना अंगूठा बायोमीट्रिक पर लगाकर फोन ले सकता है, लेकिन हाल ही लगे तीन दिन के शिविरों में महिलाओं का मेला लग गया।
चुनावी दृष्टि से देखा जाए तो सीधे महिला के पर्स में सीधे-सीधे 900 रुपए का जोड़ वसुंधरा की चुनावी गणित का ही संकेत माना जा सकता है। परिवार की महिला खुश तो परिवार भी खुश। इस योजना से वसुंधरा राजे सरकार यह उम्मीद बांध सकती है कि हाल ही आए सर्वे चुनाव तक पलट जाएं।
भामाशाह परिवारों की संख्या भी कोई छोटी-मोटी नहीं है। सितम्बर की 9 तारीख तक राजस्थान में कुल एक करोड़ 64 लाख 85 हजार 978 परिवार भामाशाह में पंजीकृत हैं। हालांकि, 500 रुपए की नकद सब्सिडी उन्हीं परिवारों को मिलेगी जो राशन की दुकान से 2 रुपए किलो का गेहूं प्राप्त करने के पात्र हैं, यानी गरीब हैं। यह संख्या भी एक करोड़ से अधिक परिवारों की है। लेकिन, 500 रुपए का छह माह का रिचार्ज तो सभी भामाशाह परिवारों के दिया जा रहा है। यानी जो 2 रुपए किलो वाला गेहूं लेने के पात्र नहीं हैं, उनकी जेब में 500 का रिचार्ज तो जा ही रहा है, कुल मिलाकर उन्हें 600 रुपए में छह माह के लिए कॉल और इंटरनेट फ्री मिल गया है।
कुल मिलाकर राजस्थान में 9 सितम्बर 2018 तक एक करोड़ 64 लाख 85 हजार 978 भामाशाह कार्डों में 6 करोड़ 8 लाख 94 हजार 750 सदस्य हैं, जिनमें से कम से कम 35 प्रतिशत तो बालिग ही हैं जो आने वाले चुनाव में अगली सरकार चुनेंगे। देखना यह है कि वसुंधरा सरकार का यह मास्टर स्ट्रोक ‘जिओ भामाशाह’ से कितना जीवन पाता है।