बागियों से बीजेपी और कांग्रेस दोनों का नुकसान, किसका होगा राजस्थान!

जयपुर: राजस्थान में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव से पहले 200 विधानसभा सीटों के लिए कांग्रेस करीब 3,000 संभावित दावेदारों से जूझ रही है, जो बागी होकर राज्य में गणित बिगाड़ सकते हैं। कांग्रेस से बीजेपी में जाने का मन बना रहे कांग्रेस नेता बीजेपी के लिए भी चुनौती से कम नहीं क्योंकि उन्हें टिकट देकर बीजेपी अपने आधिकारिक उम्मीदवार को किनारे करने का रिस्क नहीं लेना चाहती। ऐसी स्थिति में बागी उम्मीदवार नेता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों की टिकट मिलने की संभावनाएं कम कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सत्तारूढ़ बीजेपी में भी कई उम्मीदवार टिकट न मिलने पर बागी होंगे, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य में चार विधानसभा चुनावों को देख चुके राजनीतिक विश्लेषक कहते है, ‘चूंकि राजस्थान में दोनों दल कड़ी टक्कर के लिए तैयार हैं, इसलिए दोनों पार्टियां अपनी हिस्सेदारी और उम्मीदवारों को सर्वश्रेष्ठ रखेंगी। ऐसे में टिकट न मिलने पर नाराजगी होगी, जिसके परिणामस्वरूप बागी होकर कई उम्मीदवार अपनी पार्टियों के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।’ दरअसल, पांच साल तक सत्ता से बाहर रही कांग्रेस में बीजेपी की तुलना में ज्यादा बागी उम्मीदवारों के सामने आने की संभावना है। वरिष्ठ नेता इस चुनौती के लिए पार्टी को तैयार कर रहे हैं। कांग्रेस के महासचिव अशोक गहलोत ने कहा, ‘हर कोई टिकट नहीं ले सकता है, लेकिन पार्टी के लिए काम करने वाले लोगों को हम उचित रूप से समायोजित करेंगे।’ 2013 में, कांग्रेस को बगावत के चलते 17 नेताओं को निष्कासित करना पड़ा था, जबकि बीजेपी ने 16 को बाहर किया था। इन बागी उम्मीदवारों ने न केवल कुछ सीटें जीतीं, बल्कि कई अन्य सीटों में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार की जीत की संभावनाओं को भी नुकसान पहुंचाया था। पत्रकार प्रकाश भंडारी ने कहा, ‘2013 के चुनाव में 26 ऐसी सीटें थीं जहां जीत का मार्जिन 5,000 वोटों से कम का था। ऐसी सीटों पर, बागी नेता परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।’ यह तो तय है कि राजस्थान में बागियों का संभाल पाने वाली पार्टी ही इन सीटों पर फायदे में रहेगी।