जाट खिसक जाएगा….2014 में कहां था जाट…राहुल ने जब हरीश चौधरी से पूछा…मानवेन्द्र की कांग्रेस एंट्री

जोधपुर . भाजपा से लंबे समय की नाराजगी के बाद पार्टी को छोड़ने का एलान कर चुके राजस्थान के बाड़मेर से शिव विधायक मानवेंद्र सिंह की कांग्रेस में एंट्री को हरी झण्डी मिल चुकी है. चर्चा है कि वे नवरात्र में अष्टमी (17 अक्टूबर को) कांग्रेस का दामन थाम लेंगे. मानवेंद्र की कांग्रेस में एंट्री पर मुहर लगने से पहले जाट समाज के खिसकने को लेकर बने डर के माहौल के बीच पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के सवालों के आगे सब निरुत्तर हो गए. दरअसल, पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह को पिछली लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिए जाने से नाराज मानवेंद्र ने पचपदरा में स्वाभिमान रैली करते हुए समर्थकों के साथ भाजपा को छोड़ने के एलान किया था. उनके इस एलान के तुरंत बाद मौके पर लगे कांग्रेस जिंदाबाद के नारों के बाद साफ हो गया कि उनकी अगली राजनीतिक जमीन कांग्रेस में होगी. मानवेंद्र की इस रैली से पहले दिल्ली में हुई कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद ये चर्चा पुख्ता होती चली गई. लेकिन, इसी बीच कांग्रेस में मानवेंद्र विरोधी नेताओं ने अपनी आपत्ती कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत के जरिए पार्टी हाईकमान के सामने रख दी. बताया जा रहा है कि मानवेंद्र की एंट्री को लेकर सबसे बड़ी आपत्ती कांग्रेस सचिव हरीश चौधरी ने जताई थी. उन्होंने कहा था कि मानवेंद्र के कांग्रेस में शामिल होने से जाट मतदाता खिसक सकते हैं. पार्टी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस में एंट्री को लेकर  हो रहे विरोध के बीच मानवेंद्र ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी. जिसमें उन्होंने चौधरी की आपत्ती और दिए जा रहे तर्क को सामने रखा था. सूत्रों ने बताया कि उसके राहुल ने हरीश चौधरी से सवाल किया कि क्या जाट समाज 2014 में आपके साथ था? और 2019 में भाजपा ने उसी उम्मीदवार को सामने उतार दिया तो क्या होगा ?. राहुल के इन सवालों के आगे चौधरी निरुत्तर हो गए. पार्टी के उच्च सूत्रों का कहना है कि इसके बाद मानवेंद्र और हरीश चौधरी को एक टेबल पर बिठाकर राजस्थान प्रदेश प्रभारी अविनाश पाण्डे ने दोनों के बीच समझौता कराया. इसके बाद मानवेंद्र के कांग्रेस में शामिल  होने का रास्ता साफ हो गया. बताया जा रहा है कि मानवेंद्र जोधपुर में धन्यवाद रैली करेंगे. इस कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल हो सकते हैं. वहीं, मानवेंद्र के कांग्रेस में जाने की खबरों के साथ ही पश्चिमी राजस्थान की सियासी जमीन की तपिश बढ़ गई है. भाजपा के भीतर सियासी हलचल भी बढ़ गई है. क्योंकि, इस बार राजपूत समाज कई मुद्दों पर भाजपा से नाराज है. ऐसे में माना जा रहा है कि राजपूत  मतदाता भी पश्चिमी राजस्थान में मानवेंद्र के साथ ही कांग्रेस की तरफ रुख कर सकता है. जिससे भाजपा की चुनावी राह मुश्किल हो सकती है. आपको बता दें कि मानवेंद्र ने लोकसभा चुनाव लड़ने की बात कही है. जबकि, उनकी पत्नी चित्रा सिंह के विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा जारी है.
यह रहा है सियासी गणित
जानकारी के मुताबिक  पश्चिमी राजस्थान की बाड़मेर-जैसलमेर की सीट की राजनीति जाट और राजपूत नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है. 1991 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के रामनिवास मिर्धा ने जाट, मुस्लिम और दलितों का गठजोड़ तैयार करके जीत हासिल की थी. इसके बाद कांग्रेस से कर्नल सोनाराम (भाजपा में शामिल होने से पहले) 1996, 1998 और 1999 में इसी जातीय जुगलबंदी के बल पर संसद में पहुंचे थे. जबकि, भाजपा यहां राजपूत और बाकी सवर्ण जातियों के दम पर चुनाव उतरी, लेकिन हार का सामना करना पड़ा. लगातार चार बार मिली जीत के चलते इस सीट पर कांग्रेस की किलेबंदी हो गई, जिसमें सेंध 2004 के चुनाव में भाजपा लगाने में कामयाब रही थी.