प्रदेश में 50 हजार से ज्यादा लाइसेंसी हथियार अब भी घरों में

जयपुर। प्रदेश की पुलिस प्रदेश में लग चुकी विधान सभा चुनाव आचार संहिता को गंभीरता से नहीं ले रही है। चुनाव आचार संहिता को लेकर प्रदेश की पुलिस की ओर से बरती जा रही लापरवाही का ही नतीजा है कि प्रदेश में अब भी 50 हजार से ज्यादा लाइसेंसी हथियार घरों में रखे हैं और वे थानों में जमा नहीं हुए हैं। इतनी भारी संख्या में घरों में हथियार रखे रहने से विधान सभा चुनाव के दौरान हिंसा फैलने का अंदेशा हो गया है। प्रदेश में विधान सभा चुनाव की आचार संहिता लगते ही लाइसेंसी हथियारों को थाने में जमा होना था लेकिन ये हथियार थानों की जगह अब भी लोगों के घरों में शोभा बढा रहे हैं। आपको बता दे कि हाल ही में प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त आनंद कुमार ने बताया था कि प्रदेश में इस बार आठ हजार मतदान केन्द्र अतिसंवेदनशील है। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में इनकी संख्या कम थी। बताया जा रहा है कि इस बार चुनाव में मुख्य राजनीतिक दलों के अलावा राजनीतिक सामाजिक व क्षेत्र व जाति विशेष से प्रेरिरत संस्थाए भी अपने प्रत्याशी चुनाव में उतार रही है। ऐसे में हथियारए मादक पर्दाथ व अन्य निषेधात्मक चीजों पर पुलिस की सख्ती है मगर लाईसेंस वाले हथियार तय समय पर पूरे जमा नहीं होना कहीं ना कहीं एक खतरा हो सकता है। निर्वाचन आयुक्त के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी रेंज आईजीए पुलिस आयुक्त व जिला पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिख कर लाईसेंस धारी हथियार जल्द से जल्द जमा करवाने की कह चुके है।

थानो में पहुंचे हैं 1 लाख 21 हजार हथियार
निर्वाचन विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में 1 लाख 81 हजार लाइसेंसी हथियार हैं जिन्हें विभिन्न कारणों से जिलों के कलक्टरों की अनुंसशा पर लोगों को जारी किया गया था। लेकिन न तो पुलिस इन हथियारों को चुनाव आचार संहिता लगने तक थानों में जमा करवा पा रही है और न ही जिला निर्वाचन अधिकारी इस मामले को लेकर गंभीर है। अब ऐसी स्थिति में संवेदनशील मतदान केन्द्रों पर मतदाताओं को इन हथियारों के कारण भय के माहौल का सामना करना पड सकता है और उनके कदम मतदान केन्द्रों की ओर जाने से रूक सकते हैं।

चालीस फीसदी हथियान नहीं हुए जमा
जानकारी के अनुसार 50 हजार से ज्यादा लाइसेंसी हथियार जिनमें स्वचलित बंदूकें, पिस्टल, टोपीदार बंदूके है शामिल है जिन्हें थानों में जमा नहीं कराया गया है। हांलाकि पुलिस का कहना है कि लगातार थाना स्तर पर लाइसेंसी को थाने में हथियार जमा कराने के लिए कहा जाता है। लेकिन अब भी इतने लाइसेंसी हथियार जमा नहीं हो पा रहे हैं जितने होने चाहिएं।