बिन्दु और पूनिया ने बिगाड़े सबके खेल…हनुमान बेनीवाल भी आए जद में

नागौर:  राजस्थान के चुनावी रण में भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे को पछाड़ने के लिए हर दांव-पेच आजमा रही है. दोनों ही पार्टियों के कई नेता ऐसे भी हैं जो एक पार्टी का साथ छोड़कर दूसरी का हाथ थाम रहे हैं. अब इनमें नागौर से बिंदु चौधरी और विजय पूनिया का नाम भी शामिल हो गया है. खास बात यह है कि दोनों जाट समाज से हैं और आमजन की नब्ज पकड़ने की कला में दोनों ही माहिर हैं. विजय पूनिया और बिंदु चौधरी में एक और समानता यह है की दोनों ही कांग्रेस पृष्ठभूमि के नेता हैं. लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हुए. अब वापस कांग्रेस का हाथ पकड़ा है. बिंदु के पिता रामरघुनाथ चौधरी 12वीं और 13वीं लोकसभा में कांग्रेस के टिकट पर संसद में पहुंचे थे. इससे पहले विधायक और प्रधान भी रहे. वहीं, विजय पूनिया की माता गौरी पूनिया चार बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक रही थी. अब इनके भाजपा से कांग्रेस में जाने पर दोनों ही पार्टियों को अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है.

पूनिया की नागौर-खींवसर और बिंदु की नागौर-डेगाना में मजबूत पकड़

इन दोनों नेताओं के कांग्रेस जॉइन करने से नागौर जिले में राजनीतिक समीकरण गड़बड़ा गए हैं. जाट समाज में अच्छी पकड़ रखने वाले विजय पूनिया की नागौर के साथ ही खींवसर इलाके में मजबूत पकड़ है. खींवसर से वर्तमान में हनुमान बेनीवाल निर्दलीय विधायक हैं. बेनीवाल ने फिलहाल प्रदेशभर में कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. वह नई पार्टी बनाकर आगामी चुनाव में तीसरे मोर्चे को भी हवा दे रहे हैं. बेनीवाल का जाट समाज के किसानों और युवाओं का खासा समर्थन मिल रहा है. लेकिन पूनिया के कांग्रेस में जाने के बाद क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण गड़बड़ा गए हैं. इससे जाट वोट बैंक में बिखराव की संभावना जोरो पर है. इसका सीधा नुकसान भाजपा और हनुमान बेनीवाल को होता दिखाई दे रहा है. जबकि, बिंदु चौधरी की नागौर के साथ डेगाना में खास पकड़ है. हालांकि, बिंदु चौधरी तीन बार जिला प्रमुख रही हैं. इसलिए जिले के हर गांव में उनका संपर्क है. जबकि, विजय पूनिया की माता गौरी पूनिया तीन बार डेगाना से और एक बार मकराना से विधायक रही थीं. वहीं, विजय की पत्नी उषा पूनिया 2003 में मूंडवा से भाजपा की विधायक और पर्यटन राज्यमंत्री रहीं. वे खुद भी सांसद के चुनाव लड़ चुके हैं.
बिंदु की लोकसभा के टिकट और पूनिया की राजनीतिक नियुक्ति पर नजर

बिंदु और पूनिया दोनों ने साफ कर दिया है कि उन्होंने विधानसभा चुनाव में कहीं से भी टिकट की मांग नहीं की है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि बिंदु नागौर से लोकसभा का चुनाव लड़ सकती हैं. उन्होंने 2009 में ज्योति मिर्धा के सामने भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा भी था. लेकिन वे ज्योति को हरा नहीं पाईं. वहीं, प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर विजय पूनिया को कोई राजनीतिक नियुक्ति देकर खुश किया जा सकता है. हालांकि, उनका कहना है कि वे बिना शर्त कांग्रेस के साथ केवल मान-सम्मान की खातिर आए हैं. क्योंकि भाजपा में निष्ठावान कार्यकर्ताओं का अब सम्मान नहीं रहा है. हालांकि बिंदु और पूनिया के भाजपा छोड़ने के सवाल पर भाजपा के शहर इकाई जिलाध्यक्ष रामचंद्र उत्ता का कहना है कि हम अपनी रणनीति में कोई बदलाव नहीं करने जा रहे हैं. पार्टी निष्ठावान और जिताऊ कार्यकर्ता को ही उम्मीदवार बनाएगी.