राहुल 20 को उदयपुर संभाग में, यहां की जीत दिलाएगी ‘सत्ता’

जयपुर। विधानसभा चुनाव के मैदान में भाजपा को पटखनी देकर सत्ता तक पहुंचने के लिए कांग्रेस रणनीति बनाने में जुटी है. वहीं, चुनाव अभियान को तेज करने के लिए पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी 20 सितम्बर को फिर राजस्थान आ रहे हैं. उनकी सभा उदयपुर संभाग के डूंगरपुर में सागवाड़ा में होगी. राहुल गांधी के सभा स्थल का चयन होने के बाद पार्टी स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं. पार्टी पदाधिकारी यहां भी जयपुर की तरह ही सफल सभा करके राजनीतिक ताकत दिखाने के मूड में हैं. राजस्थान में चुनावी अभियान के तौर पर राहुल गांधी का सागवाड़ा में दूसरा दौरा होगा. इससे पहले वे जयपुर में रोड शो कर चुके हैं. जयपुर को भाजपा का गढ़ माना जाता है. पिछले चुनाव में कांग्रेस जयपुर जिले की 19 विधानसभा सीटों में से केवल एक सीट पर जीत हासिल कर पाई थी. वहीं, अब राहुल गांधी उदयपुर संभाग में सभा कर पार्टी के प्रचार अभियान को जहां तेज करेंगे. साथ ही भाजपा सरकार को कई मुद्दों के जरिए घेरेंगे. राजनीतिक लिहाज से उदयपुर संभाग काफी महत्वपूर्ण है. क्योंकि, पिछले कई चुनावों का ट्रेंड देखने को मिला है कि जिसने उदयपुर संभाग में जीत हासिल की है, वो प्रदेश में सत्ता हासिल करने में कामयाब रहा है.
पांच चुनाव में यह रहा है जीत-हार का गणित
उदयपुर संभाग में 6 जिले आते हैं. जिसमें, बंसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, राजसमंद, उदयपुर और प्रतापगढ़ शामिल है. 2008 में परिसीमन के बाद  इस जिले में कुल 28 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें से 16 सीट एसटी के लिए तो एक सीट एससी के लिए रिजर्व है. 2013 के चुनाव में भाजपा ने 25 सीटें जीती थी, जबकि कांग्रेस केवल 2 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी. एक सीट पर निर्दलिय रणधीर सिंह जीते थे. वहीं, 2008 में देखें तो 20 सीटों पर कांग्रेस काबिज हुई थी. वहीं. 6 सीटों पर भाजपा और एक-एक सीट पर निर्दलिय और जेडीयू ने जीत दर्ज की थी. वहीं, परिसीमन से पहले उदयपुर संभाग में 30 विधानसभा सीटें थी. जिनमें 2003 में 21 भाजपा ने जीती थी, जबकि 7 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा रहा. वहीं, 2 पर जेडीयू ने जीत दर्ज की. 2003 में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी. इसी तरह 1998 में अशोक गहलोत ने बड़े मार्जिन के साथ सरकार बनाई थी. इस चुनाव में उदयपुर संभाग की 30 में से 24 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. जबकि, भाजपा को तीन सीटों पर संतोष करना पड़ा था. वहीं, तीन सीटों पर जेडीयू ने कब्जा जमाया था. 1993 में जब भैरो सिंह शेखावत के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी तो 16 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी. वहीं, 11 सीटों पर कांग्रेस और 3 पर जेडीयू ने जीत दर्ज की. मतलब साफ है कि जिस पार्टी को उदयपुर की जनता का साथ मिला, वही सत्ता पर आसीन हुई. यही वजह है कि दोनों ही राजनीतिक दल उदयपुर संभाग के हर समीकरण पर नजर बनाए हुए हैं. यहां के राजनीतिक महत्व को देखते हुए ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी गौरव यात्रा की शुरुआत यहीं से की थी. जबकि, कांग्रेस ने भी संकल्प रैली की शुरुआत उदयपुर संभाग के चित्तौड़ से की. वहीं, अब कांग्रेस एक कदम आगे बढ़ते हुए सागवाड़ा में राहुल गांधी की रैली करते हुए बड़ा सियासी दांप चलने जा रही है.
डूंगरपुर में 4 विधानसभा सीटें  हैं, चारों एसटी के लिए रिजर्व हैं

विधानसभा        कैटेगिरी       2013                           2008

  • डूंगरपुर           एसटी       देवेन्द्र कटारा (भाजपा)    लालशंकर  (कांग्रेस)
  • आसपुर           एसटी      गोपीचंद (भाजपा)            रैया मीणा (कांग्रेस)
  • सागवाड़ा         एसटी      अनिता कटारा (भाजपा)   सुरेन्द्र कुमार (कांग्रेस)
  • चौरासी            एसटी      सुशील कटारा (भाजपा)     शंकर लाल (कांग्रेस)
बांसवाड़ा जिले में 5 विधानसभा सीटें हैं, सभी एसटी के लिए रिजर्व हैं
  • बांसवाडा        एसटी    धनसिंह रावत (भाजपा)     अर्जुन बामनिया (कांग्रेस)
  • घाटोल            एसटी    नवनीत लाल  (भाजपा)       नानालाल निर्दलिय
  • गढी               एसटी    जीतमल खांट  (भाजपा)      कांता गरासिया (कांग्रेस)
  • बागीदोरा        एसटी   महेन्द्र जीत     (कांग्रेस)      महेन्द्र जीत (कांग्रेस)
  • कुशलगढ         एसटी    भीमा भाई   (भाजपा)       फतेह सिंह जेडीयू
राजसमंद जिले में 4 सीटे आती हैं, सभी जनरल हैं
  • भीम                जनरल   हरी सिंह रावत (भाजपा)      हरी सिंह रावत (भाजपा)          
  • कुंभलगढ        जनरल   सुरेन्द सिंह राठौड़ (भाजपा)   गणेश सिंह परमार (कांग्रेस)
  • राजसमंद        जनरल    किरण महेश्वरी  (भाजपा)      किरण महेश्वरी (भाजपा)
  • नाथदवारा       जनरल    कल्याण सिंह  (भाजपा)     कल्याण सिंह (भाजपा)
चित्तौड़गढ़ में पांच सीटें हैं, जिनमें से एक एससी सीट है
  • कपासन         एससी     अर्जुन लाल   (भाजपा)      शंकर लाल (कांग्रेस)
  • बेगू               जनरल     सुरेश धाकड़ (भाजपा)        राजेन्द्र विधूड़ी (कांग्रेस)
  • चित्तोडगढ    जनरल    चंद्रभान सिंह आक्या (भाजपा)     सुरेन्द्र जाडावत (कांग्रेस)
  • निम्बाहेडा     जनरल    श्रीचंद कृपलानी  (भाजपा)    उदयलालआंजना (कांग्रेस)
  • बडी सादडी   जनरल    गोतम कुमार   (भाजपा)      प्रकाश चौधरी (कांग्रेस)
उदयपुर जिले में आठ विधासभा क्षेत्र हैं, इनमें से पांच एसटी रिजर्व है

गोगुंदा            एसटी       प्रताप भील (भाजपा)        मांगीलाल  (कांग्रेस)

  • झाडोल           एसटी       हीरालाल   (कांग्रेस)         बाबूलाल       (भाजपा)
  • खेरवाडा          एसटी        नानालाल  (भाजपा)        दयाराम (कांग्रेस)
  • उदयपुर ग्रामीण     एसटी  फूलचंदमीणा  (भाजपा)   सज्जन कटारा  (कांग्रेस)
  • सलूम्बर          एसटी         अमृतलाल (भाजपा)        रधुवीर मीणा (कांग्रेस)
  • उदयपुर          जनरल      गुलाब कटारिया (भाजपा)   गुलाब कटारिया (भाजपा)
  • मावली            जनरल       डाली चंद डांगी  (भाजपा)   पुष्कर लाल (कांग्रेस)
  • वल्लभनगर     जनरल        रणधीर सिंह निर्दलिय        गजेन्द्र शक्तावत (कांग्रेस)
प्रतापगढ़ में दो सीटें हैं जो एसटी के लिए रिजर्व हैं
  • प्रतापगढ़          एसटी        नंदलाल मीणा  (भाजपा)  नंदलाल मीणा (भाजपा)
  • धारीयाबाद        एसटी        गौतमलाल  (भाजपा)    नागराज (कांग्रेस)