कांग्रेस बुरी तरह चिंतित है कि कहीं हाथ में आई हुई बाजी हाथ से ना निकल जाए…इसलिए अपना रही रणनीति

कांग्रेस अबकी बार आश्वस्त है कि राजस्थान की सत्ता में वो आ रही है. यहां तक की भाजपा को शिकस्त देने के लिए कांग्रेस रोजाना नए-नए प्लान तैयार कर रही है. ऐसे में अब पार्टी के लिए नई सिरदर्दी उन्हीं के उम्मीदवार है. जो पार्टी से टिकट की मांग जोरों-शोरों से कर रहे है, लेकिन सभी को टिकट मिले ये जरूर नहीं. ऐसे में टिकट नहीं मिलने वाले प्रत्याशियों से डरी कांग्रेस टिकट के साथ-साथ बागियों की भी लिस्ट बना रही है. जो कहीं उनका बना बनाया खेल ना बिगाड़ दे. कांग्रेस में पैनल तैयार करने के साथ हर सीट पर टिकट कटने से बागी के रूप में सामने आने वाले संभावित लोगों की भी सूची तैयार की जा रही है. बागियों के चलते पहले भी कांग्रेस सत्ता से दूर हो चुकी है. कांग्रेस 1993 की विधानसभा चुनावों की गलती दोहराना नहीं चाहती. क्योंकि उस वक्त भी कांग्रेस के सामने बागियों की फौज खड़ी हो गई थी और सत्ता से महज चंद कदमों की दूरी से पहले कांग्रेस को निराश होकर लौटना पड़ा.

अयोध्या विवाद के बाद राजस्थान की राजनीति में बदलाव

दरअसल, 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिरा दिया गया. पूरे देश में सांप्रदायिक दंगे शुरू हो गए. कांग्रेस के समर्थन से केंद्र में चल रही चंद्रशेखर सरकार ने भैरोंसिंह शेखावत सरकार को अपदस्थ कर दिया. फिर 1993 के विधानसभा चुनाव आए. इस दौरान कांग्रेस के सामने बागियों ने खूब चुनाव लड़े. 1993 में राज्य में कुल 21 निर्दलीय चुनाव जीते. 95 सीटों के साथ बीजेपी सत्ता में लौटी. भाजपा ने कांग्रेस से 0.33% वोट ज्यादा हासिल कर सरकार बना ली थी। तब भाजपा को 38.60% और कांग्रेस को 38.27% वोट मिले थे. बस इसी को याद रखते हुए कांग्रेस अब वो गलती नहीं दोहराना चाहती है. इसके लिए कांग्रेस ने अंदर ही अंदर पक्का इंतजाम कर दिया है.

कांग्रेस दफ्तर में कार्यकर्ताओं का हंगामा

कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर जारी माथापच्ची के बीच टोंक की निवाई विधानसभा सीट से टिकट मांग रहे प्रशांत बैरवा और कमल बैरवा के समर्थक पीसीसी कार्यालय पर भिड़ गए. दोनों समर्थक आपस में गुत्थम-गुत्था हो गए. समर्थकों के विवाद को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने जमकर लाठी भांजी. वहीं, विवाद की सूचना मिलने के साथ ही मौके पर पहुंचे पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने मामला शांत कराया.

सचिन पायलट और रामेश्वर डूडी का विवाद भी आया सामने

राजनीतिक सूत्रों की मानें तो डॉ. चंद्रभान-मालपुरा से टिकट पर टकराव हुआ था. फिर हरेंद्र मिर्धा के नागौर विधानसभा सीट पर चर्चा के दौरान विवाद हो गया. पायलट की लिस्ट में मिर्धा का नाम नागौर विधानसभा क्षेत्र से तो डूडी की लिस्ट में खींवसर नेता प्रतिपक्ष डूडी मिर्धा को हनुमान बेनीवाल के सामने कांग्रेस उम्मीदवार बनाने के पक्ष में थे. तो पायलट ने कहा हरेंद्र मिर्धा का निर्वाचन क्षेत्र नागौर है, सीट नहीं बदलेंगे. जिसके बाद पायलट और डूडी के बीच टकराव सामने आया. ऐसे में पार्टी के खिलाफ जहां भी मजबूत बागी मैदान में ताल ठोकेगा. तो हो सकता है पार्टी को मुंह की खानी पड़ें. हार के खतरे को भापंते हुए कांग्रेस ऐसे नेताओं की सूची तैयार करने के साथ ही ये भी मानस बना लिया कि नेताओं को कैसे खुश किया जाएगा. क्योंकि उम्मीदवारों ने ये साफ कर दिया कि अगर टिकट नहीं मिल तो बागी होकर चुनाव लड़ेंगे.