तीन बागियों ने बढ़ाई राजस्थान में भाजपा नेतृत्व की चिंता

जयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनाव की तारीख फिलहाल घोषित नहीं हुई है, लेकिन भाजपा के तीन दिग्गज बागियों ने पार्टी नेतृत्व की नींद उड़ा दी है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से व्यक्तिगत नाराजगी के चलते भाजपा से अलग हुए इन तीनों बागियों ने बीजेपी को हराने को लेकर पूरा दम लगा दिया है। इनमें वरिष्ठ विधायक और भारत वाहिनी पार्टी के अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी, दो दिन पहले भाजपा छोड़ने वाले दिग्गज नेता जसवंत सिंह के विधायक बेटे मानवेंद्र सिंह और निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल शामिल है। इन तीनों नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों और मुख्यमंत्री पर लगाए जा रहे व्यक्तिगत आरोपों के चलते भाजपा नेतृत्व हैरान और परेशान है। तिवाड़ी, मानवेंद्र और बेनीवाल को मिल रहे समर्थन के चलते भाजपा नेतृत्व ने नए सिरे से चुनावी रणनीति बनानी प्रारंभ कर दी है। भाजपा नेतृत्व इन तीनों बागी नेताओं की काट खोजने में जुटा है। हालांकि भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी का कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव से पहले इन नेताओं से संपर्क साधा जाएगा। यह नेता इन तीनों बािगयों से विधानसभा चुनाव में नुकसान होने की बात को स्वीकारते हुए कहते है कि इनकी नाराजगी वसुंधरा राजे से व्यक्तिगत तौर पर है। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर तीनों बागी एक बार फिर भाजपा के साथ आ सकते हैं।
तीनों बागी नेताओं ने इसलिए बढ़ाई भाजपा की बेचैनी
1.घनश्याम तिवाड़ी
करीब पांच दशक तक आरएसएस के स्वयंसेवक, जनसंघ और भाजपा में विभिन्न पदों पर रहे विधायक घनश्याम तिवाड़ी प्रदेश के पुराने नेताओं में माने जाते हैं। राजनीति के चतुर खिलाड़ी तिवाड़ी प्रदेश में भाजपा की स्थापना और आगे बढ़ाने वालों में से एक है। तिवाड़ी का मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से शुरू से ही छत्तीस का आंकड़ा रहा है। तिवाड़ी ने पिछले चार साल से मुख्यमंत्री के खिलाफ सार्वजिनक रूप से मोर्चा खोल रखा है। मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार सहित अन्य व्यक्तिगत आरोप लगाने वाले तिवाड़ी ने कुछ माह पूर्व ही भारत वाहिनी नाम से नई पार्टी बनाई और सभी 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। नई पार्टी बनाने वाले तिवाड़ी ने भाजपा के कई पुराने पदाधिकारियों और आरएसएस के स्वयंसेवकों को अपने साथ जोड़ा है। भाजपा में पिछले कुछ साल से हाशिये पर चले गए पूर्व विधायकों और नेताओं को चुनाव लड़ाने की घोषणा की है। अब भाजपा की चिंता यह है कि तिवाड़ी की पार्टी से चुनाव लड़ने वाले ज्यादातर नेता पार्टी के परम्परागत वोट बैंक में सेंध लगाएंगे। इसके साथ ही तिवाड़ी के कारण कुछ लोग चुनाव में सक्रिय नहीं रहेंगे। आर्थिक रूप से पिछड़ों को आरक्षण का मुद्दा उठाकर भी तिवाड़ी भाजपा के परम्परागत वोट बैंक राजपूत, ब्राहम्ण,वैश्य और अन्य अगड़ी जातियों में सेंध लगा रहे हैं। 
2 हनुमान बेनीवाल
निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल की प्रदेश में जाट समाज के युवाओं में गहरी पकड़ है। प्रदेश के जोधपुर, नागौर, बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर, चूरू, झुंझुंनू और सीकर जिलों में बेनीवाल के समर्थकों की तादाद काफी है। हनुमान बेनीवाल द्वारा पिछले एक साल में जाट बाहुल्य क्षत्रों में आयोजित की गई रैलियों में आई भीड़ ने भाजपा नेतृत्व की चिंता बढ़ा रखी है। करीब एक दशक पहले तक भाजपा में रहे बेनीवाल भी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से व्यक्तिगत नाराजगी के चलते अलग हुए और निर्दलीय चुनाव जीते है। बेनीवाल ने कई बार विधानसभा में और बाहर अपनी रैलियों में मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए है।
3 मानवेन्द्र सिंह
दो दिन पहले ही भाजपा से अलग होने वाले दिग्गज नेता जसवंत सिंह के बेटे विधायक मानवेंद्र सिंह भी पार्टी नेतृत्व की चिंता का कारण बन गए हैं। मारवाड़ (जोधपुर संभाग)के राजपूत वोट बैंक पर जसवंत सिंह की पकड़ और मुख्यमंत्री से नाराज चल रहे राजपूत समाज के नेताओं द्वारा मानवेंद्र सिंह को समर्थन देने के कारण विधानसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान हो सकता है। मानवेंद्र के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर चर्चाएं चल रही है,लेकिन प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की आपत्ति के चलते उनकी राह मुश्किल भी होती जा रही है।