बिसात बिछ गई…वे 21 सीटें जिसपर राजस्थान ही नहीं पूरे देश की रहेगी नजर

जयपुर . चुनावी घमासान के बीच भाजपा-कांग्रेस की ओर से मैदान में प्रत्याशियों को उतारने के साथ ही राजनीतिक लड़ाई तेज हो गई है. हर एक सीट पर दोनों प्रमुख दलों की ओर से सियासी गोटियों को फिट किया जा रहा है.  साथ ही बनते-बिगड़ते समीकरणों पर भी बारीकी से निगाह रखी जा रही है. लेकिन, दोनों ही दलों की ओर से प्रत्याशियों को लेकर किए गए निर्णय के बीच राजस्थान की 21 सीटें सबसे हॉट हो गई हैं. इन सीटों पर दोनों पार्टियों के अपने निर्णय के बाद बने समीकरणों के बाद हर किसी की निगाह टिक गई है. राजस्थान की सबसे हॉट सीट में जहां झालरापाटन का नाम जुड़ गया है, वहीं, सांगानेर से लेकर टोंक सहित कई ऐसी सीटें भी सामने आई हैं. जहां पर सियासी मुकाबला रोचक हो चला है. साथ ही इन सीटों पर दिग्गज नेताओं की साख भी जुड़ गई है. चुनावी मैदान में टिकट नहीं मिलने से नाराज कई नेताओं की ओर से भी ताल ठोकने के बाद हर सीट के समीकरण में तेजी से बदलाव आ रहा है. जिसके बाद हर किसी की जुबान पर इन 21 सीटों की चर्चा शुरू हो चुकी है. वहीं, इन सीटों पर दोनों प्रमुख दलों के नेताओं की निगाहें पर टिक गई है. इन सीटों को लेकर जहां सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म होता जा रहा है. वहीं, जीत-हार को लेकर अभी से कयासों का दौर शुरू हो चुका है. राजनीति के जानकारों की मानें तो इस बार कई दिग्गजों की साख भी उनकी अपनी सीटों को लेकर जुड़ी है. जिसके चलते ये चुनाव दिन प्रतिदिन और दिलचस्प होता जा रहा है. हम आपको बताते हैं कि राजस्थान की इन 21 सीटों का सियासी गणित के साथ ही महत्व क्या है.

झालरापाटन
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह निर्वाचन क्षेत्र झालावाड़ की झालरापाटन विधानसभा सीट पर इस बार राजस्थान ही नहीं दिल्ली की भी  नजरें टिक गई हैं. क्योंकि, इस सीट पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने कांग्रेस ने मारवाड़ के दिग्गज नेता मानवेंद्र सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है. इस सीट पर मानवेंद्र और वसुंधरा राजे के आमने-सामने होने के बाद से ये प्रदेश की सबसे हॉट सीट बन गई है. इस सीट के खास बनने के पीछे सबसे बड़ा कारण दोनों ही नेताओं की राजनीतिक तनातनी है. पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह को 2014 में सांसद के चुनाव का टिकट नहीं मिलने के बाद से मानवेंद्र सिंह भाजपा से नाराज थे. अब उनके कांग्रेस में जाने के बाद पार्टी ने उन्हें वसुंधरा राजे के सामने उतारकर इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है.

सांगानेर
चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर नई पार्टी बनाकर सियासी ताल ठोक चुके दिग्गज नेता घनश्याम तिवाड़ी की इस सीट पर इस बार चुनाव दिलचस्प बन गया है. भाजपा  से अलग होने के बाद खाली हुई सीट पर भाजपा ने वैश्य कार्ड खेलते हुए महापौर अशोक लाहोटी को मैदान में उतारा है. वहीं, कांग्रेस ने पुष्पेंद्र भारद्वाज पर दांव खेला है. जबकि, रामगढ़ से टिकट नहीं मिलने पर बागी हुए विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने भी इस सीट पर निर्दलीय ताल ठोकते हुए इस सीट के सियासी माहौल को गरम कर दिया है. अब तक भाजपा के खाते में रहने वाली  इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने की चुनौती जहां पार्टी के सामने है. वहीं, कांग्रेस भी भाजपा के गढ़ में सेंध लगाना चाहती है.

टोंक
राजस्थान की हॉट सीट में इस बार टोंक विधानसभाक्षेत्र का नाम जुड़ गया है. इस सीट पर कांग्रेस के प्रदेश मुखिया सचिन पायलट मैदान में है. पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे पायलट के मैदान में आने के बाद भाजपा ने इस सीट के प्रत्याशी में बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता यूनुस खान को मैदान में उतारा है. कांग्रेस के पायलट और भाजपा के यूनुस के मैदान में आने के बाद यहां  का सियासी मुकाबला रोचक हो गया है. यहां से भाजपा ने विधायक अजीत मेहता का टिकट काटते हुए नामांकन से ठीक पहले मुस्लिम कार्ड खेला है. इस सीट के लिहाज से दोनों ही उम्मीदवार बाहरी हैं, लेकिन, राजनीतिक कद में बड़े होने के कारण  सभी की निगाहें इस सीट पर टिक गई है.

उदयपुर शहर

मेवाड़ के वरिष्ठ नेता और गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के गढ़ उदयपुर में इस बार हो रहे चुनावी संग्राम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं. कटारिया के सामने कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता डॉ. गिरिजा व्यास को मैदान में उतार दिया है. कांग्रेस ने इस बार व्यास को मैदान में उतारकर कटारिया को पटखनी देने की रणनीति बना रही है. वही, यहां से इस बार कटारिया का विरोध करते हुए जनता सेना के बेनर तले दलपत सुराणा भी मैदान मैं हैं. जिसके बाद यहां का मुकाबला त्रिकोणीय होता जा रहा है. माना जा रहा है कि इस बार कटारिया के चुनावी राह में पहले से अधिक चुनौतियां हैं.

सरदारपुरा
पिछले दोशक से सरदारपुरा सीट पर कब्जा बनाकर रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत फिर मैदान में उतर गए हैं. दो दशक से भाजपा इस सीट को जीतने के लिए मशक्कत कर रही है. लेकिन, अब तक सफलता नहीं मिल पाई है. 1998 से यहां से जीत रहे गहलोत के सामने भाजपा ने शंभूसिंह खेतासर को फिर से मैदान में उतारा है. 2013 के चुनाव में इस सीट पर गहलोत ने खेतासर को 18 हजार वोटों से हराया था. इस बार भी इन्हीं दोनों चेहरों के बीच चुनावी मुकाबला होना है.

नाथद्वारा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी एक बार फिर नाथद्वारा सीट से चुनाव मैदान में उतर गए हैं. इस सीट पर उन्हें 2008 के चुनाव में महज एक वोट से हार मिली थी. इस दौरान वे कांग्रेस की तरफ से सीएम के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे. इस सीट पर फिर से जोशी मैदान में आ गए हैं. वहीं भाजपा ने सीपी जोशी के सामने राजपूत वोटरों को टार्गेट करते हुए महेश प्रताप सिंह को मैदान में उतारा है. महेश कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं. महेश प्रताप के सामने आने के बाद सीपी जोशी ने बयान भी दिया है कि जिसने मुझसे राजनीति सीखी है, वही अब सामने मैदान में है.

झोटवाड़ा

जयपुर की झोटवाड़ा सीट से भाजपा ने उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत को मैदान मं उतारा है. इस सीट से राजपाल सिंह 2008 और 2013 का चुनाव जीत चुके हैं. वहीं, इस बार कांग्रेस ने यहां से पूर्व मंत्री लालचंद कटारिया को चुनाव मैदान में उतारा है. 2008 के चुनाव में लालचंद को शेखावत यहां से सियासी पटखनी दे चुके हैं. वहीं, 2013 के चुनाव में भी शेखावत ने कटारिया की पत्नी को मात दी थी. तीसरी बार इस सीट से भाग्य आजमा रहे शेखावत और कटारिया के बीच यहां से कड़ा मुकाबला होने आसार बन गए हैं.

महुआ

महुवा विधानसभा सीट पर इस बार लड़ा जाने वाला चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है. इस सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ किरोड़ी लाल मीणा के भतीजे राजेंद्र मीणा को मैदान में उतारा गया है. उन्हें विधायक ओम प्रकाश हुड़ला का टिकट काटकर चुनाव मैदान में उतारा गया है. 2013 के चुनाव में किरोड़ी लाल की पत्नी  गोलमा देवी को हरा चुके हुड़ला के टिकट को कटवाने में किरोड़ी लाल का हाथ रहा है. हालांकि, हुड़ला के साथ सीएम वसुंधरा राजे खड़ी थी, लेकिन किरोड़ी  के दबाव में टिकट कट गया. वहीं, इस सीट पर कांग्रेस ने अजय बोहरा को प्रत्याशी बनाया है. जिसके बाद इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार बन गए हैं.

अंता

हाड़ौती की अंता विधानसभा सीट से इस बार भाजपा के मंत्री प्रभुलाल सैनी और कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया के बीच मुकाबला होना है. चुनाव के मैदान में उतरे भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच इस बार रोचक मुकाबला होने के आसार बन गए हैं.

लाडपुरा

हाड़ौती की प्रमुख सीटों में से एक लाडपुरा में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है. इस सीट पर भाजपा ने तीन बार से विधायक चुने जा रहे वरिष्ठ नेता भवानी सिंह राजावत का टिकट काटकर उनकी जगह  कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व सांसद इज्यराज सिंह की पत्नी कल्पना को टिकट दिया है. वहीं, कांग्रेस ने नईमुद्दीन गुड्डू की पत्नी  गुलनाज को मैदान में उतारा है. वहीं, भाजपा की ओर से टिकट कटने के बाद भवानी सिंह राजावत भी निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं.

बाड़मेर

इस बार लगातार चुनावी सुर्खियों में रहने वाले पश्चिमी राजस्थान के बाड़ेर जिले में कांग्रेस ने जहां  मेवाराम जैन को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है. वहीं, भाजपा की तरफ से सांसद कर्नल सोनाराम मैदान में उतर गए हैं. भाजपा छोड़कर कांग्रेस में गए मानवेंद्र सिंह के गढ़ में इस सीट पर कब्जा करने के लिए सोनाराम के जरिए जाट कार्ड  खेला है. वहीं, इस सीट पर सोनाराम को टिकट देने के बाद नाराज होकर यूआईटी अध्यक्ष के पद से प्रियंका चौधरी ने इस्तीफा दे दिया है.

राजाखेड़ा

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह जिला धौलपुर की राजाखेड़ा सीट पर इस बार राजनीतिक रूप से बड़ा बदलाव हुआ है. भाजपा-कांग्रेस के बीच यहां मुकाबला इस बार नई  पीढ़ी के बीच होना है. इस सीट पर भाजपा ने जहां धौलपुर से पूर्व विधायक अशोक शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है. वहीं,  कांग्रेस से 8 बार विधायक रह चुके पूर्व वित्त मंत्री प्रद्युम्न सिंह के बेटे रोहित बोहरा को कांग्रेस ने उतारा है. इस सीट पर इस बार दोनों के बीच रोचक मुकाबला होना है.

डीग-कुम्हेर

भरतपुर की हॉट सीट डीग-कुम्हेर से कांग्रेस के टिकट पर विधायक और वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह फिर से मैदान में हैं. भरतपुर राजघराने के पूर्व महाराज विश्वेंद्र सिंह के मुकाबले भाजपा ने दिवंगत नेता दिगंबर सिंह के पुत्र डॉ. शैलेष सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है. शैलेष सिंह पहली बार चुनाव के मैदान में उतरे है. 2013 के चुनाव में मोदी लहर के बीच विश्वेंद्र सिंह ने पूर्व चिकित्सा मंत्री दिगंबर सिंह को हरा दिया थी. कांग्रेस की पहली सूची में विश्वेंद्र सिंह का नाम नहीं आने के बाद एक बारगी यहां की सियासत गर्मा गई थी.

नागौर

राजस्थान की राजनीति का केंद्र रहा नागौर की सीट पर राजनीतिक  रूप से बड़ा उलटफेर होने के बाद से ये सीट भी हॉट हो गई है. भाजपा ने यहां से विधायक हबीबुर्ररहमान का टिकट काटकर मोहनराम चौधरी को प्रत्याशी बनाया है. जबकि, कांग्रेस ने इस सीट पर मिर्धा परिवार से दावेदार हरेंद्र मिर्धा का टिकट काटकर भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हबीबुर्रहमान को चुनाव मैदान में उतारा है. इस राजनीतिक उलटफेर के बाद ये सीट भी काफी हॉट बन गई है.

बीकानेर पश्चिम

कांग्रेस की ओर से किए गए टिकट बंटवारे के दौरान अंतिम समय में बीकानेर की सीटों को लेकर हुए राजनीतिक उलटफेर के बीच बीकानेर पश्चिम को लेकर जमकर घमासान हुआ. इस सीट पर पहली सूची में बीडी कल्ला का टिकट कटने के बाद बवाल मच गया. कल्ला की जगह यहां से कांग्रेस ने यशपाल गहलोत को टिकट देकर उतार दिया. लेकिन, कल्ला समर्थकों के बढ़ते विरोध के बीच पार्टी ने इस सीट पर उम्मीदवार में बदलाव करते हुए कल्ला को फिर से मैदान में उतारा गया है. जबकि, यशपाल गहलोत को बीकानेर पूर्व में भेजा गया. लेकिन, बाद में वहां से भी गहलोत का टिकट काट दिया गया. बीकानेर की सीटों को लेकर सियासी खेल खेलने वाले नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी यहां के सीटों का समीकरण रोचक बना दिया है. इस सीट पर भाजपा ने तीन बार विधायक रहे गोपाल जोशी को फिर से मैदान में उतारा है.  जोशी दो बार कल्ला को हरा चुके हैं. इस सीट से गोपाल गहलोत ने निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है.

नोखा

बीकानेर की सीटों को लेकर अंतिम समय में कांग्रेस के भीतर खेले गए राजनीतिक खेल के बीच नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी की खुद की सीट मुकाबले के लिहाज से काफी रोचक हो गई है. इस सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में डूडी को चुनौती देने वाले कन्हैयालाल झंवर को डूडी ने अंतिम समय में कांग्रेस में शामिल कराकर बीकानेर पूर्व से टिकट दिला दिया.  वहीं, नोखा सीट से कांग्रेस की तरफ से रामेश्वर डूडी चुनाव मैदान में उतर गए हैं. वहीं, भाजपा ने यहां से बिहारी लाल विश्नोई को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है.  सियासी रूप से माना जा रहा है कि ये सीट डूडी के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गई है.

रतनगढ़

चुनावी मैदान में इस बार रतनगढ़ सीट काफी महत्वपूर्ण बनी हुई है. भाजपा ने यहां से विधायक और मंत्री राजकुमार रिणवा का टिकट काटकर उनकी जगह पार्टी में शामिल हुए अभिनेष महर्षि को उम्मीदवार बनाया है. वहीं, कांग्रेस की तरफ से यहां से भंवरलाल पुजारी को उतारा गया है. भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद मंत्री राजकुमार रिणवा ने बागी होकर चुनावी ताल ठोक दी है. जिसके बाद इस सीट से मुकाबला त्रिकोणीय होता दिखाई दे रहा है.

अजमेर उत्तर

शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी के सीट अजमेर उत्तर से इस बार राजनीतिक रूप से बड़ा घमासान होने के आसार हैं. भाजपा ने यहां से जहां वासुदेव देवनानी को प्रत्याशी बनाया है. वहीं, कांग्रेस ने इस बार सभी को चौंकाते हुए गैर सिंधी प्रत्याशी मैदान में उतारा है. कांग्रेस की तरफ से राजपूत नेता महेंद्र सिंह रलावता को चुनाव मैदान में उतारा है. खास बात यह है कि इस सीट से अब तक गैर सिंधी कोई भी प्रत्याशी चुनाव  नहीं जीत सका है. ऐसे में यह सीट सियासी रूप से खास हो गई है.

बायतु

पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले का बायतु विधानसभा सीट पर होने वाला मुकाबला भी खास होने जा रहा है. इस सीट से कांग्रेस ने पूर्व सांसद हरीश चौधरी को मैदान में उतारा है. वहीं, भाजपा की तरफ से कैलाश चौधरी मैदान में उतरे हैं. भाजपा-कांग्रेस की ओर से जाट कार्ड खेलने के बाद से ये सीट काफी अहम हो गई है.

निम्बाहेड़ा

निम्बाहेड़ा विधानसभा सीट से भाजपा ने एक बार फिर मंत्री श्रीचंद कृपलानी पर दांव खेला है. कृपलानी की राह इस बार इस सीट से काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.  पिछले चुनाव में मोदी लहर के बाद भी काफी मुश्किलों के बाद कृपलानी को यहां जीत हासिल हुई थी. इस बार भी कांग्रेस ने यहां कृपलानी के सामने उदय लाल आंजना को मैदान में उतारा है. बदले सियासी समीकरण के बीच इस सीट पर भी मुकाबला रोचक बनता जा रहा है.

सपोटरा

करौली जिले की सपोटरा सीट पर इस बार चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प होने जा रहा है. इस सीट से कांग्रेस की तरफ से उपनेता प्रतिपक्ष रमेश मीणा मैदान में हैं. वहीं, भाजपा की तरफ से राज्यसभा सदस्य किरोड़ी लाल मीणा की पत्नी गोलमा देवी को चुनाव के मैदान में उतारा गया है. राजनीतिक रूप से किरोड़ी लाल और रमेश मीणा तगड़े प्रतिद्वंदि हैं. इस सीट पर दोनों ही प्रत्याशी मीणा होने का कारण यहां से मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है.