दिल्ली में टिकटों को लेकर आखिर हो क्या रहा है….वो बातें जिन पर अटक रहा मामला

नई दिल्ली . राजस्थान के चुनावी रण में घमासान जारी है. इससे इतर कांग्रेस के भीतर भी टिकटों को लेकर घमासन चल रहा है. दावेदारों की नजर बस कांग्रेस मुख्यालय पर टिकी हुई है. हर कोई इस उम्मीद में दिल्ली पहुंच रहा है कि ऊपर वालों की कृपा मिल जाए. उधर, पार्टी के बड़े नेता मेराथन बैठकें करते हुए टिकटों पर मंथन कर रहे हैं, लेकिन, मामला है कि पूरी तरह सुलझ ही नहीं पा रहा है. लगातार बैठकों और मंथन के बीच राजस्थान से लेकर दिल्ली तक बस एक की सवाल हर किसी के जुबान पर घूम रहा है कि ‘आखिर दिल्ली में टिकटों को लेकर हो क्या रहा है’. लेकिन, इसका जवाब किसी के पास नहीं है, सिवाय कयासों के.
ये सवाल इसलिए बार-बार घूम रहा है क्योंकि, जिस रफ्तार के साथ कांग्रेस में प्रत्याशियों के चयन को लेकर काम शुरू हुआ था, वो अब उतनी ही पेचीदगियों में उलझी नजर आ रही है. दरअसल, चुनाव के मैदान में भाजपा को चारों खाने चित करने के लिए रणनीति बना रही कांग्रेस में बड़े नेताओं के बीच चल रही अंदरखाने गहमागहमी के बीच हर सीट पर चर्चा दर चर्चा का दौर जारी है. सूत्रों की मानें तो बड़े नेताओं के बीच सहमति के साथ ही टिकट के मापदंड के बिन्दुओं पर मामला अटका हुआ है. तमाम सर्वे से लेकर ओपीनियन पोल में मिली बढ़त ने कांग्रेस उत्साहित है. इसे देखते हुए पार्टी के कर्ता-धर्ता इस मौके पर कतई चूकना नहीं चाहते हैं, इसलिए वे हर सीट पर अपने प्यादे को बिठाने में जुट गए हैं. सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ  सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी  और डॉ सीपी जोशी टिकटों के मंथन के बीच अपने चहेतों के जुगाड़ को भी बिठाने में लगे हैं.
वहीं, गहलोत के सीधे स्क्रीनिंग कमेटी में जा बैठने से पायलट, जोशी सहित सभी की चिंताएं बढ़ गई हैं. माना जा रहा है कि जिस सीट पर आपस में बातचीत करने के बाद सहमति बैठ रही है, उसे पैनल बनाकर लॉक किया जा रहा है. जबकि, जिस पर आपसी सहमति के साथ ही कांग्रेस के मापदंड को लेकर मतभेद की स्थिति बन रही है, उस पर चर्चा दर चर्चा का जोर जारी है. आपको बता दें कि दिल्ली में करीब 9 घंटे तक चली पहले दौर की मैराथन बैठक के दौरान 70 से 80 सीटो पर चर्चा हो पाई.  वहीं, दो बार एक सीट से चुनाव हारने के वाले नेताओं के टिकट को लेकर क्या करना है, इस पर भी कोई अंतिम निर्णय अभी नहीं हो सका है.
आपको बता दें कि पूर्व में पार्टी हाई कमान की तरफ से ऐसे नेताओं के टिकट काटने को लेकर मंशा सामने आई थी. इसके पीछे तर्क यह रखा गया है कि दो बार लगातार हारने का मतलब है कि जनता के बीच उनकी लोकप्रियता अब पहले जैसी नहीं है. लेकिन, इस नियम में अपने कई चहेतों की गर्दन फंसता देख नेताओं के बीच अभी आम सहमति नहीं बन पाई है. हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि अगर इस पर निर्णय होता भी है तो भी चहेतों की गर्दन को बचाने के लिए पोल रखने के लिए गलि निकाली जाएगी. पार्टी सूत्रों ने बताया कि बैठकों के दौरान पायलट और गहलोत के गुट के प्रत्याशियों को लेकर भी सहमति बनने में देर हो रही है. जिसके चलते अभी तक पार्टी सभी सीटों पर चर्चा पूरी नहीं कर पाई है.
बताया जा रहा है कि टिकटों के मंथन में जमीनी फीडबैक और सर्वे रिपोर्ट के आधार पायलट अपने तर्कों को  रख रहे हैं तो गहलोत भी हर सीट पर जमीनी पकड़ और मिली रिपोर्ट पर प्रत्याशियों के नामों को आगे रख रहे हैं. इन सबके बीच टिकटों को लेकर कांग्रेस के मापदंडों पर भी आम राय बनने में देरी हो रही है. आपको बता दें कि बैठक के दौरान 20 हजार  से ज्यादा मतों से हारे हुए दावेदार,  पूर्व सांसद और दागी नेताओं को टिकट नहीं देने जैसे मापदंडों पर पार्टी के बड़े नेताओं की राय  अलग-अलग रूप में सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि इन मापदंडों के जाल में कई नेताओं  की गर्दन फंस रही है, जिसे देखते हुए इन सहमति नहीं बन पा रही है.
इतने सीटों पर हो चुकी है मंथन

पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर चल रही मंथन के बीच अब तक 90 सीटों पर चर्चा पूरी हो चुकी है. जिनमें से 50 सीटे वें हैं जिन पर मौजूदा विधायकों के साथ ही बड़े नेताओं के नाम शामिल हैं. साथ ही इन सीटों पर पार्टी कोई विवाद नहीं मानती है. वहीं, दिल्ली में जारी बैठक में पहले दिन करीब 40 सीट पर चर्चा पूरी हुई है. शेष सीटों पर पार्टी के नेताओं के बीच मंथन जारी है. वहीं, पार्टी पहली सूची में केवल उन्हीं नामों को जारी करने को लेकर रणनीति बना रही है, जिन पर दावेदारों के बीच विरोध की स्थिति नहीं है.

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