वसुंधरा को मुख्यमंत्री चेहरा तो बनाया, लेकिन कोई जिम्मेदारी नहीं दी- पायलट

सचिन पायलट ने कहा कि तिकडम लगाकर मुख्यमंत्री पांच साल पूरे कर रहीं हैं, लेकिन जो उपचुनाव की हार के बाद भाजपा अध्यक्ष को लेकर मसला हुआ. उससे साफ हो गया कि भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व की राय और अलाप अलग है, जबकि प्रदेश नेतृत्व की राय अलग-अलग है पायलट यहीं नहीं रूके उन्होंने राजे को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी तो राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है, लेकिन भाजपा ने तो अपना मुख्यमंत्री चेहरा वसुन्धरा राजे को घोषित करने के बाद भी जो चुनाव संचालन कमेटी बनायी. उसमें राजे को केवल सदस्य बनाया है, बाकि कमेटियां जो लगातार भाजपा की बन रही है उसके बारे में ना तो सीएम कैंडिडेट राजे से राय ली जा रही है ना ही उनकी भूमिका इन कमेटियों में रहेगी, मतलब साफ है कि टिकट वितरण में भी वसुंधरा राजे से ना तो पूछा जायेगा ना ही उनकी भूमिका होगी. पायलट ने बताया कि प्रदेश में अब साफ दिखने लगा है कि अमित शाह अलग राजे अलग है. भाजपा की सरकार में प्रदेश और राष्ट्रीय इकार्ई में मतभेद बढ़ गए है. जबकी राजस्थान कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात  तय कर चुकी है. कांग्रेस की प्रदेश और जिला इकाइयों मिलकर ताकत बढ़ा रही है. पायलट ने कहा कि प्रदेश भाजपा में हालात ये है कि प्रदेश की मुख्यमंत्री और भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार वसुन्धरा राजे तक के झालरापाटन की जगह धौलपुर से चुनाव लड़ने की अफवाहें हैं. यहां तक की भाजपा के 160 में से आधे विधायकों के टिकट काटने की तैयारी हो रही है. ऐसे में जब भाजपा के विधायकों से उनका नेतृत्व ही खुश नहीं है तो आम जनता कैसे खुश हो सकती है.

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