भाजपा के भीतर भी सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए हो रही ‘रण’ की तैयारी

जयपुर . चुनाव के मैदान में कांग्रेस को पटखनी देते हुए सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए प्लान बना रही भाजपा के भीतर भी ‘रण’ की तैयारी हो रही है. प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह एक बार फिर सियासी रण में टिकट को लेकर आमने-सामने हो सकते हैं. क्योंकि, टिकट की मशक्कत के बीच दोनों ही शीर्ष नेता जिस फॉर्मूले को अपना रहे हैं. उसके दरमियान दोनों खेमों के बीच लट्ठ चलना तय माना जा रहा है.
राजस्थान के चुनाव से पहले प्रदेशाध्यक्ष के मुद्दे पर दोनों नेता आमने-सामने हो चुके हैं. चुनाव की बारी आने पर शाह ने चुनाव प्रबंधन समिति में अपने खास गजेंद्र सिंह शेखावत को संयोजक बनाकर पुरानी कसर पूरी कर दी. शेखावत के संयोजक बनने के बाद से वसुंधरा पार्टी अध्यक्ष शाह की सभा से दूरी बनाए हुए हैं. इस दूरी के बीच अब टिकट को लेकर पार्टी के भीतर जो मशक्कत शुरू हुई है. उसके दरमियान भी दोनों नेताओं के फार्मूले आड़े आते दिखाई दे रहे हैं.  सूत्र बताते हैं कि पार्टी की पहली सूची दीपावली के आसपास तक ही जारी हो पाएगी. आपको बता दें कि वसुंधरा जहां अपने हिसाब से टिकट का वितरण करना चाहती हैं. वहीं, शाह अब राजस्थान की पकड़ को और मजबूत करने में जुटे हैं.
साथ ही वे इस बार खराब परफोर्मेंस के नाम पर कई विधायकों और मंत्रियों की टिकट पर कैंची चलाने की तैयारी कर रहे हैं. जिसका आभास वसुंधरा को है. पार्टी सूत्रों ने बताया कि वसुंधरा कई बार पार्टी की बैठक में संकेत दे चुकी हैं कि टिकट का वितरण वही करेंगी. टिकट को लेकर वसुंधरा अपने स्तर पर रिपोर्ट भी तैयार करा चुकी हैं. वसुंधरा की ओर से टिकट बांटने को लेकर दिए स्पष्ट  संकेत के पीछे कई  कारण हैं. प्रदेश में 15 साल से पार्टी का प्रमुख चेहरा रही वसुंधरा के खेमे में करीब 125 विधायक माने जाते हैं. जिन्हें टिकट कैसे बांटना है यह केवल वसुंधरा के ऊपर ही निर्भर है. वहीं, संगठन के स्तर पर भी सभी जिलाध्यक्ष उन्हीं के खेमे के हैं. इन जिलाध्यक्षों से वसुंधरा हर जमीनी फीडबैक ले रही हैं.
संगठन में जमीनी स्तर तक पकड़ रखने वाली वसुंधरा इसी ताकत के बल पर साफ कहती हैं कि टिकट वही बांटेंगी. वहीं, दिल्ली वाले भी इस बार मैदान में खड़े होकर चुनाव के साथ ही टिकट की कमान भी अपने हाथ में लेना चाहते हैं. इसीलिए वे अपने खास मंत्रियों और संगठन के नेताओं को मैदान में उतारकर जमीनी आकलन कराने में जुटे हैं. शाह के मंत्री और नेता जमीनी आंकलन के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं. जिसे वे कुछ दिन में शाह को सौंप देंगे. इस रिपोर्ट के आधार पर शाह टिकट का वितरण खुद करना चाहते हैं. जिससे चुनावी मैदान में चेहरे बदलने में उन्हें ज्यादा समस्या नहीं हो. इसके संकेत प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना, प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी सहित कई नेता लगातार दे रहे हैं. वे लगातार कह रहे हैं कि खराब परफोर्मेंस वाले नेताओं के टिकट कटेंगे.
जानकारों का कहना है कि इस सर्वे रिपोर्ट में वसुंधरा के कई खास मंत्रियों और विधायकों की गरदन भी फंस रही है. यही वजह है कि वसुंधरा टिकट की कमान अपने हाथ में लेना चाहती हैं. जिससे उनके टिकट वितरण की राह में कोई खलल नहीं पड़े. राजनीति के जानकारों का कहना है कि वसुंधरा और शाह के बीच टिकट का चयन होना इतना आसान नहीं है. माना जा रहा है कि दोनों के अपने-अपने सर्वे रिपोर्ट में जिन सीटों पर आसानी से सहमति बन जाएगी. उन पर प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी जाएगी. लेकिन, जिन सीटों पर दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आएंगे. उन पर प्रत्याशी का चयन होने में काफी समय लग सकता है. वहीं,पार्टी में टिकट के दावेदार भी इस स्थिति को समझ रहे हैं. लेकिन, टिकट कौन बांटेगा ये स्पष्ट नहीं होने पर वे दोनों दरबारों में हाजिरी लगाते हुए आशीर्वाद के इंतजार में खड़े हैं.