नागौर में विरासत की राजनीति पाने के लिए भाई-बहन और चाचा-भतीजी के बीच खिंची तलवार

दरअसल बिंदु चौधरी सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक की बहन हैं. जिन्होंने पिछले दिनों भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है. हालांकि, विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाने के सवाल पर बिंदु चौधरी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. उनका जवाब यही है कि अगर पार्टी उन्हें कहीं से चुनाव में उतारती है तो देखेंगे. बहरहाल, भले ही बिंदु चौधरी चुनाव नहीं लड़ें. लेकिन, कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थन में वो प्रचार जरूर करेंगी. ऐसे में चुनाव के इस मैदान में उनका अपने भाई अजय किलक से आमना-सामना होना तय है. इधर, नई पार्टी बनाकर प्रदेश में तीसरे मोर्चे की सरकार बनाने का दावा करने वाले हनुमान बेनीवाल की भतीजी डॉ. अनिता ने खींवसर में अपने पैर जमाने शुरू कर दिए हैं. उनका साफ कहना है कि फिलहाल उन्होंने भाजपा से खींवसर सीट से टिकट मांगा है, लेकिन भाजपा यदि उन्हें टिकट नहीं भी देती है तो वे अपने चाचा हनुमान के खिलाफ निर्दलीय मैदान में उतरेंगी. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि भाई-बहन और चाचा-भतीजी की टक्कर में जनता किसका साथ देती है.

बिंदु के पिता दो बार सांसद, अनिता के दादा दो बार विधायक रहे
तीन बार जिला प्रमुख रहीं बिंदु चौधरी के पिता रामरघुनाथ चौधरी दो बार नागौर से कांग्रेस के टिकट पर संसद रहे थे. वे खुद भी पहले कांग्रेस में ही थीं. बाद में अजय किलक ने भाजपा से चुनाव लड़ा तो वे भी भाई के समर्थन में भाजपा में आ गईं. वहीं, अनिता बेनीवाल के दादा और हनुमान बेनीवाल के पिता चौधरी रामदेव बेनीवाल मूंडवा से दो बार विधायक रहे थे. अनिता के पिता रामप्रसाद बेनीवाल भी बरनगांव के सरपंच रहे थे.
नाथूराम मिर्धा और रामनिवास मिर्धा ने भी लड़ा आमने-सामने चुनाव

राजनीतिक विरासत पर काबिज होने की ये लड़ाई नागौर में नई नहीं है. कुचेरा के मिर्धा परिवार के नाथूराम मिर्धा और रामनिवास मिर्धा कई बार चुनाव के मैदान में आमने-सामने हुए. फिर नाथूराम मिर्धा के बेटे भानू प्रकाश ने भी रामनिवास मिर्धा के सामने चुनाव लड़ा. अब नाथूराम मिर्धा की विरासत रिछपाल और ज्योति मिर्धा संभाल रहे हैं.वहीं, रामनिवास मिर्धा के राजनीतिक उत्तराधिकारी हरेंद्र मिर्धा हैं. हालांकि, ये अब आमने-सामने चुनाव नहीं लड़ते. रिछपाल मिर्धा कांग्रेस के टिकट पर डेगाना से और हरेंद्र मिर्धा कांग्रेस के टिकट पर और निर्दलीय नागौर से चुनाव लड़े और जीते भी. इस बार भी दोनों अपनी-अपनी सीट पर दावेदारी जता रहे हैं. वहीं, ज्योति मिर्धा कांग्रेस के टिकट पर सांसद बनी. पिछले लोकसभा चुनाव में वो सीआर चौधरी से हार गई थीं.