वसुंधरा-शाह में आखिरकार लट्ठ बज ही गए….शाह ने रिजेक्ट की वसुंधरा की लिस्ट

नई दिल्ली . प्रदेशाध्यक्ष की रार खत्म होने के चार महीने के बाद चुनावी घमासान के बीच एक बार फिर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच लट्ठ बज गए हैं. पहले मुद्दा एक व्यक्ति का था, इस बार 90 से अधिक खासमखास विधायकों के टिकट का है. इसलिए वसुंधरा ने अपने तेवर पहली बैठक में ही कड़े कर लिए हैं. वहीं, शाह भी मैदान में डटते हुए अपने इरादे बता दिए हैं. शाह और वसुंधरा के तेवरों को देख पार्टी पदाधिकारियों में करंट दौड़ गया है.
दरअसल, चुनावी समर में उतरी भाजपा सत्ता को बरकरार रखने के लिए जिताऊ प्रत्याशियों के चयन में माथापच्ची कर रही है. राज्य में रणकपुर और जयपुर में 12 हजार कार्यकर्ताओं से हुई रायशुमारी के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 90 से अधिक सीटों पर सिंगल नामों का पैनल तैयार कराया. इन नामों की लिस्ट को लेकर वसुंधरा दिल्ली पहुंची. उनके साथ ही चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी, प्रदेश संगठन मंत्री चंद्रशेखर, चुनाव प्रबंधन समिति संयोजक गजेंद्र सिंह शेखावत, राष्ट्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव, वी सतीश, अशोक परनामी राजेंद्र सिंह राठौड़ भी पहुंचे. सूत्रों ने बताया कि यहां पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के सामने वसुंधरा राजे ने 90 से अधिक नामों के सिंगल पैनल को रखा. जिसे देखने के साथ ही शाह ने रिजेक्ट कर दिया. उन्होंने इतनी सीटों पर सिंगल पैनल पर विचार करने से साफ तौर पर मना कर दिया है.
शाह के तेवर को देख वसुंधरा राजे ने भी पहले की तरह अड़ियल रुख अख्तियार कर लिया है. सूत्रों ने बताया कि जिन सीटों पर सिंगल नामों का पैनल तैयार किया गया है. उनमें से अधिकतर नाम वसुंधरा के खास मंत्रियों और विधायकों के हैं. पार्टी सूत्रों ने बताया कि इस लिस्ट में उन विधायकों के नाम भी शामिल हैं, जिनकी परफोर्मेंस सर्वे और फीडबैक के दौरान खराब मिली है. यही वजह है कि इस लिस्ट को देखने के बाद ही शाह खफा हो गए. उन्होंने दोबार से सूची को तैयार करने के निर्देश वसुंधरा को दे दिए हैं. सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान वसुंधरा भी अपने विधायकों के टिकट को बचाने के लिए ढाल बनकर खड़ी हो गई. उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी के साथ हमेशा खड़े रहते हैं उनकी अनदेखी नहीं की जा सकती. जबकि, शाह ने सीधे तौर पर इतनी सीटों पर सिंगल पैनल के नामों पर विचार करने से मना कर दिया है.
बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान यह भी प्रश्न खड़ा हुआ है कि जब हजारों कार्यकर्ताओं से रायशुमारी की गई तो फिर एक ही नाम का पैनल इतनी सीटों पर कैसे बन गया.  शाह की दो-टूक के बाद वसुंधरा राजे अपने विधायकों के साथ बैठक से बाहर आ गई. वहीं, इसके बाद वसुंधरा राजे की प्रकाश जावड़ेकर के साथ उनके आवास पर चर्चा हुई. देर रात चली इस बैठक के दौरान सभी सीटों पर आम सहमति बनाने को लेकर कवायद चलती रही . लेकिन, कोई नतीजा नहीं निकल सका है. सूत्रों ने बताया कि शाह के साथ पहली बैठक में सामने आई खींचतान के बाद अब माना जा रहा है कि टिकट को लेकर एक बार फिर शाह और वसुंधरा के बीच बवाल होना तय है. इस बैठक के बाद शाह और वसुंधरा खेमा भी फिर से एक्टिव हो गया है. वहीं, बैठक के बाद बाहर आए प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अभी नामों को लेकर शाह के साथ प्राथमिक रूप से चर्चा हुई है. इस दौरान जावड़ेकर ने यह कहा कि सारी कवायद को पूरी करने के बाद केंद्रीय चुनाव समिति के सामने जाएंगे. उनके बयानों के बात तय हो गया है कि पार्टी के टिकट पर कवायद का दौर दीपावली के बाद भी जारी रहेगा. जावड़ेकर ने बड़ी साफगोई से कहा कि कहीं कोई विवाद नहीं है . लेकिन, पहली बैठक में ही शाह और वसुंधरा के आमने-सामने होने चर्चा के साथ ही सियासत गरमाती जा रही है. आपको बता दें कि इससे पहले प्रदेशाध्यक्ष में पसंद-नापसंद की राजनीति के चलते 74 दिन तक घमासान जारी रहा. शाह और वसुंधरा खेमे के बीच चली लंबी खींचतान के बाद अंत में  शाह को ही बीच का रास्ता निकालना पड़ा था.

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