टिकट के मापदंड को लेकर नई लकीर खींच रही वसुंधरा राजे

जयपुर । विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मात देकर दोबारा सत्ता में लौटने के लिए रणनीति बना रही भाजपा के भीतर भी सियासी दंगल जारी है। चुनाव के हर पहलू पर नजर रखते हुए पार्टी आलाकमान जहां इस बार प्रत्याशियों को टिकट देने के लिए जिताऊ-टिकाऊ का फॉर्मूला तैयार करने में जुटे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे टिकट के मापदंड को लेकर नई लकीर खींच रही हैं। प्रदेश में राजस्थान गौरव यात्रा निकाल रही वसुंधरा ने टिकट को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि चुनाव में टिकटों का वितरण सर्वे के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो सभी को साथ लेकर चलेगा उसे ही टिकट मिलेगा। वहीं, कार्यकर्ताओं से भी कहा कि जिसको टिकट मिलेगा उसके साथ लगना होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिसको टिकट मिलेगी, उसकी भी जिम्मेदारी होगी कि वह सभी को साथ में लेकर चले। जानकारी के मुताबिक बीकानेर संभाग का दौरा करने के दौरान वसुंधरा ने ये बात कही। उनके इस बयान के बाद से पार्टी के भीतर सियासत गरमा गई है। टिकट को लेकर लम्बे समय से दावेदारी जता रहे लोग बड़े नेताओं से मिलकर जुगाड़ बिठाने में लगे हैं। आपको बता दें कि इससे पहले भाजपा प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने कहा था कि मिशन 180 को पूरा करने के लिए जिताऊ उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जाएगा। इसके लिए प्रत्याशियों को लेकर मंथन जारी है। साथ ही उन्होंने भी कहा था कि जिसे भी टिकट मिलेगा, उसके साथ सभी कार्यकर्ता जुट जाएंगे। खन्ना का यह बयान पार्टी के आलाकमान की मंशा को जताने वाला था। क्योंकि, भाजपा आलाकमान अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए हर हाल में राजस्थान का चुनाव जीतना चाहता है। यही वजह है कि इस बार पार्टी की तरफ से जिताऊ उम्मीदवारों पर मंथन किया जा रहा है। राजनीति के जानकारों की मानें तो हर चुनावी रणनीति पर खुद पार्टी  अध्यक्ष अमित शाह नजर बनाए हुए हैं। वे हर रणनीति की बारीकी से समीक्षा करने के बाद आगे कदम बढ़ा रहे हैं। हाल में चुनाव प्रबंधन समिति की घोषणा करने के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और शाह ने अपने चहेते केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह को संयोजक बनाकर टिकट वितरण दिल्ली के मंथन से होने का संकेत दे दिया। ऐसे में वसुंधरा राजे की ओर से टिकट वितरण को लेकर दिए बयान के बाद पार्टी के भीतर सियासी लहरें उठना शुरू हो गई है। पार्टी के जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर ये सियासत और भी गरमा सकती है।