टिकटों में वसुंधरा की चली….शाह और संघ बैकफुट पर….अब तक 170

जयपुर: भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए अब तक तीन सूचियों के जरीए चुनावी समर में अपने 170 यौद्धाओं को उतार दिया है. अब तक घोषित हुए प्रत्याशियों में अधिकतर नाम वो ही शामिल रहे जो वसुंधरा राजे खेमे से आते हैं. या फिर कहें कि अब तक जारी सूचियों में केन्द्र के सर्वे से ज्यादा प्रदेश में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के फीडबैक और पसंद को तरजीह दी गई है. हालांकि यूपी की तर्ज पर राजस्थान में हिन्दुत्व को आगे बढ़ाते हुए प्रत्याशी चयन में मुस्लिम चेहरों को दूर रखने के केन्द्र के फैसले के आगे मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अब तक नहीं चल पाई. लेकिन यह राजे का दबाव ही था कि मुस्लिम समाज से आने वाले मुख्यमंत्री के सबसे नजदीकी मंत्री यूनुस खान की किस्मत पर अब तक पार्टी कोई फैसला नहीं कर पाई है. उनकी डीडवाना सीट पर अब भी बीजेपी प्रत्याशी की घोषणा होना बाकी है. हालांकि प्रत्याशी चयन में पूरी तरह सीएम राजे की ही चली हो ऐसा भी नहीं है. कई सीटों पर संघ की पंसद से प्रत्याशी उतारे गए तो कुछ पर सीधे दिल्ली से नाम आए और उसे फाइनल भी कर दिया गया.
यहां राजे ने किया अपने वीटो का इस्तेमाल
जिन मौजूदा विधायकों के परिजनों को टिकट दिया गया उनके लिए भी राजे ने अपने वीटो का इस्तेमाल किया. इसके अलावा राजे के विश्वस्त नेताओं में शामिल स्वर्गीय दिगंबर सिंह और सांवरलाल जाट के निधन के बाद इनके पुत्रों को पहली सूची में विधानसभा का टिकट दिलवाने का श्रेय भी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को ही जाता है. इसी तरह मौजूदा सांसद कर्नल सोनाराम को बाड़मेर से टिकट दिलाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है. इसी तरह मंत्री नंदलाल मीणा के बेटे हेमंत मीणा, विधायक सुंदरलाल काका के बेटे कैलाश प्रधान और देवी सिंह भाटी की पुत्रवधु को टिकट दिलाने में भी राजे की भूमिका महत्वपूर्ण रही.  वहीं अपने खास रहे पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, मंत्री राजेन्द्र राठौड़, पुष्पेन्द्र सिंह, कृष्णेन्द्र कौर दीपा, बंशीधर खंडेला, डॉ. रामप्रताप, कमसा मेघवाल, अजय सिंह किलक, श्रीचंद कृपलानी, प्रभुलाल सैनी को भी टिकट दिलाने में कामियाब रहीं. हालांकि इनके अलावा जिन मंत्रियों को पहली सूची में जगह मिली वो केन्द्र और संघ के कहने पर ही हुआ. इस तरह पहली सूची में जिस तरह रामगंज मंडी से विधायक चंद्रकांता मेघवाल का टिकट तो संघ और केन्द्र के सर्वे के आधार पर काट दिया गया. लेकिन दूसरी सूची में सीएम के दखल से मेघवाल को सीट बदलकर केशवराय पाटन से टिकट दिलवाया गया. हालांकि इस बदलाव में सीएम के नजदीकी मंत्री बाबूलाल वर्मा का टिकट कट गया. लेकिन वर्मा ने खुद इस बार अपनी मौजूदा स्थिति को देखते हुए चुनाव नहीं लड़ने का मन बना लिया था. दूसरी सूची में भी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ही पूरी तरह चली. राजे के हस्तक्षेप के चलते पहली सूची में जिन मंत्रियों के टिकट रोके गए थे उनमें से राजे के नजदीकी चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ, राजपाल सिंह शेखावत, संसदीय सचिव कैलाश वर्मा का टिकट घोषित करवाया गया. संघ के सर्वे में इन सीटों पर प्रत्याशी बदलने की सिफारिश की गई थी. लेकिन सीएम राजे के दखल के चलते ऐसा नहीं हो पाया. अब तक की सूची में सीएम चहेते मंत्रियों के टिकट उड़ने से बचाने में पूरी तरह कामियाब रहीं तो वहीं जो टिकट कटे उसमें राजे की भी रजामंदी बताई जा रही है.
मौजूदा विधायकों में से राजे की पंसद के बचे

अब तक आई तीन सूचियों में जिन मौजूदा विधायकों या मंत्रियों के टिकट गए, उनकी संख्या 45 हैं. लेकिन इनमें अधिकतर वो नाम थे जो सीएम वसुंधरा राजे के खेमे में नहीं आते या फिर कहें कि कुछ नाम किसी भी खेमे से ताल्लुक नहीं रखते. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अदावत विधायक ज्ञानदेव आहुजा पर भारी पड़ी और उन्हें रामगढ़ सीट से हाथ धोना पड़ा. इसी तरह बनवारी लाल सिंघल, मंत्री हेमसिंह भड़ाना, धन सिंह रावत, राजकुमार रिणवां ये वो नाम हैं जो सीधे तौर पर सीएम खेमे से नहीं आते. वहीं विधायक अनिता कटारा, देवेन्द्र कटारा, शैतान सिंह, लक्ष्मी नारायण बैरवा, तरूण राय, कागा कृष्णा राम नाई शिमला बावरी और जयपुर राजघराने से आने वाले विधायक दीया कुमारी जैसे कई नाम हैं. जो सीएम खेमे से नहीं आने के कारण बीजेपी की सूची में अपनी जगह नहीं बना पाए.
इन पैराशूटर्स को राजे ही लाई और टिकट भी दिलाया—
1-  बसपा से आए अभिनेष महर्षि को मिला रतनगढ़ से टिकट
2- कांग्रेस से बीजेपी में आए अशोक शर्मा को मिला राजाखेड़ा से टिकट
3- कांग्रेस से बीजेपी में आए गुरदीप सिंह शाहपीणी को मिला संगरिया से टिकट
4- कांग्रेस से बीजेपी में आए महेश प्रताप सिंह को मिला नाथद्वारा से टिकट
5— कांग्रेस से बीजेपी में आए रामकिशोर सैनी को बांदीकुई से टिकट दिलाया.
इन बड़े नामों में संघ और केन्द्र की रही भूमिका
जयपुर के विद्याधर नगर सीट से पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत के दामाद नरपत सिंह राजवी को सीएम राजे के विरोध के बावजूद टिकट मिला. क्योंकि इसके लिए संघ और केन्द्र ने पूरी ताकत लगाई. इसी तरह शिक्षा राज्य मंत्री वासुंदेव देवनानी को अजमेर उत्तर, पूर्व मंत्री मदन दिलावर को रामगंज मंडी, गुर्जर विधायक प्रहलाद गुंजल सहित कई ऐसे नाम भी हैं, जिन्हें सीएम के विरोध के बावजूद केन्द्र और संघ के हस्तक्षेप से टिकट मिला. वहीं संघ खेमे से आने वाले गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी, प्रदेश प्रवक्ता सतीश पूनिया और श्रीमाधोपुर से झाबर सिंह खर्रा भी संघ खेमे से ही टिकट लेकर आए हैं. हालांकि इन दो नामों पर सीएम का विरोध भी नहीं था.