चुनावी रण में बिछी सियासी बिसात पर चारों ओर से घिरती जा रही हैं वसुंधरा

जयपुर। चुनावी रण में बिछी सियासी बिसात पर भाजपा के चाणक्य अमित शाह हर मोहरा सेट करते जा रहे हैं. चुनावी शतरंज को लेकर चल रहे चालों से वे जहां कांग्रेस को मात देने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं, प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी लगातार घेर रहे हैं. इस दिशा में चुनाव प्रबंधन समिति के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को राजस्थान चुनाव की कमान देकर बड़ा दांव खेला है. सत्ता की इस लड़ाई में घिर रही वसुंधरा खेमे में खलबली लगातार बढ़ती जा रही है.
कर्नाटक चुनाव में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभारने वाले जावड़ेकर को शाह ने प्रदेश की कमान यहां की राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए सौंपी है. जावड़ेकर की गिनती मोदी-शाह के विश्वसनीय व्यक्तिों में होती है. जावड़ेकर को प्रदेश के चुनाव प्रभारी रूप में उतारने के साथ ही शाह कांग्रेस को मात देने के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं. वहीं, जावड़ेकर की नियुक्ति के साथ ही वसुंधरा खेमे में खलबली बढ़ गई है. सियासी रूप से माना जा रहा है कि शाह ने जावड़ेकर का दांव खेलकर प्रदेश के सियासी नब्ज पर सीधे हाथ रखने की तैयारी कर ली है. आपको बता दें कि प्रदेशाध्यक्ष के मुद्दे पर अमित शाह और वसुंधरा राजे के बीच खिंची तलवार मदन लाला सैनी को प्रदेशाध्यक्ष बनाने के बाद कुछ समय के लिए शांत हो गई. लेकिन, अंदरूनी रूप से दोनों के बीच विवाद जारी है. कुछ दिन पहले प्रदेश के चुनाव प्रबंधन समिति की घोषणा करने के साथ ही  शाह ने अपने विश्ववसनीय केंद्रीय राज्यमंत्री  गजेंद्र सिंह शेखावत को समिति में संयोजक बनाया था. जबकि, इस समिति में सीएम राजे बतौर सदस्य शामिल की गई हैं. चुनावी लिहाज से महत्वपूर्ण चुनाव प्रबंधन समिति में शेखावत को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए शाह ने प्रदेश की सियासत पर अपनी पकड़ को मजबूत करना शुरू कर दिया था. शेखावत की नियुक्ति के साथ ही वसुंधरा खेमे में खलबली भी बढ़ गई थी. ये खलबली इसलिए बढ़ी क्योंकि, शेखावत का हस्तक्षेप राजस्थान की सियासत में वसुंधरा नहीं चाहती हैं. यही वजह थी कि प्रदेशाध्यक्ष  के मुद्दे पर वे शेखावत के नाम पर अड़ गई थी. उस समय शाह ने अपने कदम पीछे ले लिए. लेकिन, चुनावी माहौल में शेखावत को बड़ी जिम्मेदारी के साथ मैदान में उतारकर उन्होंने वसुंधरा को राजनीतिक संदेश दे दिया था. वहीं, अब जावड़ेकर को चुनाव प्रभारी बनाकर शाह ने साफ कर दिया है कि राजस्थान के चुनावी कमान को इस बार वे अपने हाथ में ही रखेंगे. वहीं, राजनीति के जानकारों का कहना है कि चुनावी निर्णयों के साथ ही टिकट वितरण को अपने हिसाब से करने के लिए ही शाह अपनी टीम मैदान में उतारते जा रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के चुनाव प्रभारी के रूप में वसुंधरा की पहली पसंद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी थे. क्योंकि, गडकरी के साथ वसुंधरा के  रिश्ते काफी अच्छे  हैं. लेकिन, पार्टी आलाकमान ने गडकरी की जगह जावड़ेकर को मैदान में उतारकर वसुंधरा को लागातार घेरते जा रहे हैं. गौरतलब है कि भाजपा में चुनाव प्रभारी का प्रमुख काम चुनाव के दौरान केंद्र और राज्य के बीच में समन्वय बनाने के साथ ही चुनावी निर्णय को अंजाम देना रहता है. साथ ही वे चुनावी रणनीती को जमीनी रूप देने के साथ ही राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए उसमें बदलाव आदि करते हैं. वहीं चुनाव के बाद किस नेता को आगे करना है इससे जुड़ा सारा फीडबैक पार्टी आलाकमान को देने का भी काम करते हैं.