वसुंधरा दिल्ली आ रही है…सुबह अचानक ओम माथुर के घर….संदेश साफ उनके बगैर कुछ भी नहीं

जयपुर . चुनावी समर में उतरी भाजपा के भीतर असल खेल अब शुरू हो गया है. टिकट बंटवारे को लेकर जयपुर में दो दिन के मंथन के बाद तैयार पैनल के दिल्ली पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने फिर से तुरुप का पत्ता आगे कर दिया है. दिल्ली जाने से पहले वसुंधरा अचानक पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर के आवास पर जा पहुंची. माथुर और वसुंधरा के बीच चली आधे घंटे की मंत्रणा से सियासी पारा चढ़ गया है. सूत्रों की मानें तो इस मंत्रणा के दौरान वसुंधरा ने साफ संकेत दे दिया है कि राजस्थान के टिकट बंटवारे में उनकी ‘हां’ में ही सभी को ‘हां’ मिलानी होगी.
ओम माथुर पार्टी के आलाकमान अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी के विश्वसनीय हैं. ऐसे में जब शाम को राजस्थान के  200 विधानसभा सीटों पर टिकट को लेकर शाह से चर्चा होनी है, उससे पहले वसुंधरा  की माथुर से हुई मुलाकात ने पार्टी के भीतर चर्चाओं को गर्म कर दिया है. माथुर के आवास पर बिना सुरक्षा के  पहुंची वसुंधरा के इस कदम के बाद दिल्ली कि सियासी हवा भी गर्म हो चुकी है. सूत्रों ने बताया कि प्रदेश  के विधानसभा सीटों पर अपने निर्देशन में कवायद पूरी करते हुए पैनल बनवा चुकी वसुंधरा ने इस मुलाकात में अपने इरादों को साफ बता दिया है. साथ ही ये संकेत भी माथुर के जरिए दे दिया है कि टिकट बंटवारे में उनकी ही चलेगी. माथुर से मुलाकात के बाद वसुंधरा दिल्ली जा रही हैं. सूत्रों की मानें तो दिल्ली में आज वे शाह से तैयार किए पैनल पर चर्चा  कर सकती हैं. आपको बता दें कि  भाजपा के संसदीय बोर्ड की बैठक 1 नवंबर को होनी है.
इस बैठक के दौरान राजस्थान के टिकटों पर मुहर लगेगी. लेकिन, इस बैठक से पहले वसुंधरा के सियासी कदम से पार्टी के भीतर चर्चाओं के साथ ही कयासों ने जन्म ले लिया है. इससे पहले राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष को लेकर शाह के खिलाफ खड़ी हो चुकी वसुंधरा के इरादों को जान दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व भी सतर्क हो चुका है. आपको बता दें कि राजस्थान की राजनीति पर अपनी पकड़ को मजबूत करते हुए अमित शाह ने जिस तरीके से अपनी सक्रियता दिखाई. उसके बाद यह माना जाता रहा है कि इस बार टिकट पर मुहर  दिल्ली से ही लगेगी. चुनाव प्रबंधन समिति में शाह ने अपने विश्वसनीय केंद्रीय राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर को संयोजक बनाकर इस संबंध में अपना इरादा और पक्का कर दिया.  साथ ही वसुंधरा की घेरेबंदी के लिए आलाकमान ने अपनी टीम के प्रकाश जावड़ेकर को चुनाव प्रभारी बनाने के साथ ही अविनाश राय खन्ना, अर्जुन राम मेघवाल सहित कई नेताओं को पहले से मैदान में उतार रखा है.
शाह के इस कदम के बाद से यह चर्चा जोरों पर रही है कि प्रत्याशियों के टिकट पर फैसला दिल्ली में होगा. लेकिन, दिल्ली में टिकट को लेकर होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले वसुंधरा ने सियासी चौसर पर जो पासा फेंक दिया है, उसके बाद से पार्टी के भीतर खलबली बढ़ गई है . माथुर और वसुंधरा के बीच हुई चर्चा के बाद कई तरह के कयासों के साथ ही चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. गौरतलब है कि ओम माथुर राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष विवाद के मामले में भी मध्यस्थता कर चुके हैं. उस दौरान भी माथुर के जरिए ही उस विवाद को सुलझाने के लिए प्रयासों को तेज किया गया था।
पार्टी की ओर से तैयार पैनल में यह है खास

जयपुर में प्रदेश भाजपा कोर कमेटी और आला नेताओं के बीच चले 2 दिन के मंथन के बाद प्रदेश नेतृत्व ने सभी 200 विधानसभा सीटों पर पैनल बना लिए हैं. 2 दिन के मंथन के दौरान हर सीट पर जिताऊ और मजबूत उम्मीदवारों के पैनल को तैयार किया है. हालांकि 70 से 80 सीटें ऐसी भी हैं जहां भाजपा ने सिंगल नाम का पैनल बनाया है. वहीं 50 के करीब ऐसी सीटें हैं जहां 2 नामों के पैनल बनाए जाने की सूचना है. जो सीटें विवादित हैं वहां 3 नामों का पैनल बनाया गया है. माना जा रहा है कि जिन सीटों पर कोई विवाद नहीं है, उन सीटों पर प्रत्याशियों के नाम का एलान पहली सूची में हो जाएगा. वहीं जिन सीटों पर 3 या इससे अधिक नामों का पैनल बनाकर भेजा गया है, वहां प्रत्याशियों के नाम की सूची सबसे अंत में जारी होगी.