वसुंधरा का झालरापाटन तो पक्का….राजखेड़ा पर भी है नजर

जयपुर . चुनावी अखाड़े में जारी सियासी कुश्ती के बीच मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने साफ कर दिया है कि वे झालरापाटन विधानसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगी. उनके इस एलान के साथ ही झालरापाटन हॉट सीट में बदल गई है. साथ ही यहां का सियासी पारा भी चढ़ गया है. हालांकि, इसके साथ ही कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि वे झालरापाटन के साथ ही अपने गृह जिला धौलपुर की राजाखेड़ा सीट से भी मैदान में उतर सकती हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से झालावाड़ में सभा करने के बाद यहां के दौरे पर आई सीएम राजे ने कार्यकर्ताओं के समक्ष साफ कर दिया कि वे यहीं से चुनाव लड़ेंगी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि झालावड़ के साथ उनका अटूट रिश्ता है. वसुंधरा के इस एलान के साथ ही इस सीट पर चुनावी हलचल  बढ़ती जा रही है. चुनावी फीडबैक लेने के दौरान वसुंधरा ने कहा कि यहां का विकास किसी से छिपा नहीं है. यही वजह है कि यहां कांग्रेस अध्यक्ष को खुद आकर चुनावी सभा करनी पड़ रही है. आपको बता दें कि इस बार कांग्रेस की ओर से लगातार उनके गृह निर्वाचन क्षेत्र झालरापाटन को लेकर किए जा रहे ताबड़तोड़ हमलों के बीच माना जा रहा था कि वसुंधरा अपनी सीट बदल सकती हैं. कांग्रेस के बढ़ते वार को देखते हुए कयास चल रहे थे कि वसुंधरा राजे इस बार किसी अन्य सुरक्षित सीट से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं. लेकिन, वसुंधरा ने फिर अपने निर्वाचन क्षेत्र से ही मैदान में उतरने की घोषणा करते हुए यह राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है कि वे किसी हमलों को देख सीट छोड़ने वाली नहीं हैं. वहीं राजनीति के जानकारों का कहना है कि वसुंधरा राजे का यह निर्णय सियासी रूप से दूरगामी है. उन्होंने बताया कि यदि वसुंधरा इस बार चुनाव में अपनी सीट बदल लेतीं तो राजनीतिक रूप से गलत संदेश जाता. उनके इस निर्णय को प्रतिद्वंदि दल मुद्दा बना सकता था, जिसका नुकसान भाजपा को चुनाव के बीच होने की आशंका बढ़ जाती. लेकिन, वसुंधरा ने झालरापाटन से ही चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए पार्टी की मजबूती को दर्शाने की कोशिश की है. हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि वे झालरापाटन के साथ ही किसी एक और सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. इसमें सबसे पहला कयास उनके गृह जिला धौलपुर की राजाखेड़ा सीट पर लगाए जा रहे हैं. आपको बता दें कि हाल में धौलपुर के कद्दावर नेता बनवारी लाल शर्मा के बेटे अशोक शर्मा के भाजपा में शामिल होने के बाद बदले समीकरण के बीच इस कयास को और बल मिल रहा है. दूसरा कारण यह है कि धौलपुर इनका गृह जिला होने के कारण यहां की सभी सीटों पर उनकी पकड़ है. ऐसे में चुनाव लड़ने में ज्यादा मुश्किलों का सामना भी नहीं करना पड़ेगा. यही वजह है कि यह माना जा रहा है कि वसुंधरा झालरापाटन के साथ ही किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ती हैं तो राजाखेड़ा की सीट उनकी पहली प्राथमिकता में होगी. आपको बता दें कि राजाखेड़ा सीट से हर बार कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रद्युम्न सिंह चुनाव लड़ते हैं.

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